वित्त समिति की बैठक में लगी मुहर: क्यों बढ़ाया गया शुल्क?
परीक्षा शुल्क में वृद्धि का यह निर्णय माशिमं की वित्त समिति और कार्यपालिका समिति की अक्टूबर और दिसंबर में हुई बैठकों के बाद लिया गया है। बोर्ड प्रशासन का तर्क है कि पिछले कई वर्षों से शुल्क में कोई बदलाव नहीं हुआ था, जबकि परीक्षा केंद्र संचालन, प्रश्नपत्रों की छपाई और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के खर्च में कई गुना वृद्धि हो गई है। बोर्ड ने दस्तावेजों के सत्यापन (Verification) और प्रतिलिपि शुल्क में भी आनुपातिक बढ़ोतरी की है ताकि प्रशासनिक खर्चों को संतुलित किया जा सके।
क्या-क्या महंगा हुआ: इन सेवाओं पर देना होगा ज्यादा दाम
मंडल द्वारा जारी नई गाइडलाइन के अनुसार, शुल्क वृद्धि का दायरा काफी विस्तृत है:
- नियमित परीक्षा शुल्क: 10वीं और 12वीं के नियमित छात्रों के लिए बेस फीस में 15-20% की बढ़ोतरी की गई है।
- प्राइवेट छात्र: स्वाध्यायी (Private) परीक्षार्थियों के लिए आवेदन शुल्क अब रेगुलर छात्रों से काफी अधिक होगा।
- दस्तावेज शुल्क: अंकसूची की द्वितीय प्रति (Duplicate Marksheet), माइग्रेशन सर्टिफिकेट और नाम सुधार संबंधी प्रक्रियाओं के लिए सेवा शुल्क बढ़ाया गया है।
- विलंब शुल्क: निर्धारित समय सीमा के बाद फॉर्म भरने पर लगने वाले ‘लेट फाइन’ की दरों में भी बदलाव किया गया है।
Voices from the Ground / Official Statements
“मंडल की कार्यप्रणाली को सुचारू रखने और बढ़ती महंगाई के बीच परीक्षा आयोजन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए यह निर्णय आवश्यक था। वित्त समिति की सिफारिशों के बाद ही सत्र 2026-27 के लिए नई दरें तय की गई हैं।” — सचिव, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE)
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