रायपुर: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पूर्व उप सचिव (डिप्टी सेक्रेटरी) सौम्या चौरसिया को देश की सर्वोच्च अदालत से बड़ी राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने आयकर अधिनियम (Income Tax Act) के तहत उनके खिलाफ जारी अभियोजन सैंक्शन नोटिस (Prosecution Sanction Notice) को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
आयकर विभाग ने सौम्या चौरसिया के खिलाफ भारी मात्रा में टैक्स चोरी के आरोपों के तहत मामला चलाने के लिए मंजूरी (सैंक्शन) दी थी। इस नोटिस की वैधता को चुनौती देते हुए चौरसिया ने पहले दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहाँ से राहत न मिलने पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट के CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी
याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभियोजन की वैधता और उससे जुड़े कानूनी तर्कों पर अभी विचार करना जल्दबाजी होगी। कोर्ट ने कहा:
“अभियोजन की वैधता से जुड़े सभी तर्क उचित समय पर सक्षम अदालत (Trial Court) के समक्ष उठाए जा सकते हैं। निचली अदालत इन तर्कों पर बिना हाई कोर्ट के आदेश से प्रभावित हुए विचार करेगी।”
भ्रष्टाचार और घोटाले के आरोपों में घिरी हैं चौरसिया
गौरतलब है कि सौम्या चौरसिया कोयला लेवी घोटाले और शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में लंबे समय से जांच एजेंसियों के घेरे में हैं। हालांकि, हाल ही में उन्हें कुछ अन्य मामलों में हाई कोर्ट से जमानत मिली थी, लेकिन आयकर विभाग की इस कार्रवाई ने उनकी कानूनी मुश्किलें फिर बढ़ा दी हैं। विभाग का आरोप है कि यह मामला ₹348 करोड़ से अधिक की टैक्स चोरी से संबंधित है।
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