अधिकारियों पर गुमराह करने का आरोप: सदन में भारी हंगामा
प्रश्नकाल के दौरान महंत ने एसटीपी निर्माण की वर्तमान स्थिति और लागत पर सवाल किए। उन्होंने कहा कि जमीनी हकीकत विभाग द्वारा पेश की गई कागजी रिपोर्ट से मेल नहीं खाती। नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि अधिकारियों ने विधानसभा को गलत जानकारी देकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अपमान किया है। उन्होंने मांग रखी कि ऐसे जिम्मेदार अधिकारियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाए।
नगरीय प्रशासन मंत्री का जवाब
विपक्ष के कड़े तेवरों के बीच नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने सरकार का पक्ष रखा। साव ने स्वीकार किया कि विपक्ष द्वारा उठाए गए बिंदु गंभीर हैं। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि विभाग इस पूरे मामले का बारीकी से परीक्षण कराएगा। मंत्री ने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर गलत जानकारी देने की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कदम उठाए जाएंगे।
“सदन में गलत जानकारी देना एक गंभीर अपराध है। एसटीपी निर्माण जनता के स्वास्थ्य और शहर के बुनियादी ढांचे से जुड़ा विषय है। हम चाहते हैं कि सत्य सामने आए और दोषियों को सजा मिले।”
— डॉ. चरणदास महंत, नेता प्रतिपक्ष, छत्तीसगढ़ विधानसभा
इस हंगामे के बाद अब नगरीय प्रशासन विभाग एसटीपी निर्माण की फाइलों को फिर से खंगाल रहा है। रायपुर और अन्य शहरों में चल रहे सीवेज प्रोजेक्ट्स की टाइमलाइन और बजट उपयोग की जांच के लिए एक विशेष समिति या वरिष्ठ अधिकारियों की टीम नियुक्त की जा सकती है। शहरवासियों के लिए यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सीवेज प्रोजेक्ट्स में देरी से सड़कों की खुदाई और जलभराव जैसी समस्याएं दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही हैं। मंत्री के निर्देशानुसार, आगामी कुछ दिनों में इस पर विस्तृत रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी जा सकती है।
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