- बड़ी जीत: संयुक्त टीम ने घेराबंदी कर सक्रिय शिकारी गिरोह का किया खात्मा।
- बरामदगी: छापेमारी के दौरान अलग-अलग ठिकानों से बाघ और तेंदुए की खालें जब्त।
- नतीजा: सभी 6 आरोपियों को गैर-जमानती धाराओं के तहत भेजा गया जेल।
Chhattisgarh News , दंतेवाड़ा — छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जंगलों में आतंक का पर्याय बने शिकारियों के खिलाफ वन विभाग ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। विभाग की एक विशेष संयुक्त टीम ने सुनियोजित घेराबंदी के बाद 6 से अधिक शिकारियों को रंगे हाथों धर दबोचा। यह गिरोह पिछले काफी समय से इस क्षेत्र में बाघ और तेंदुए जैसे संरक्षित वन्यजीवों को निशाना बना रहा था। छापेमारी के दौरान टीम ने इन बेशकीमती वन्यजीवों की खालें भी बरामद की हैं, जो अंतरराष्ट्रीय ब्लैक मार्केट में तस्करी के लिए तैयार की गई थीं।
घेराबंदी और छापेमारी: कैसे बिछाया गया जाल
वन विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि दंतेवाड़ा के अंदरूनी जंगलों में शिकारियों की हलचल तेज हो गई है। टीम ने बिना वक्त गंवाए अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की। गिरोह इतना शातिर था कि वे घने जंगलों का फायदा उठाकर भागने की फिराक में थे, लेकिन अधिकारियों ने चारों ओर से घेरा डाल दिया। टीम ने बाघ और तेंदुए की खाल के साथ अवैध हथियार और जाल भी बरामद किए हैं।
“यह एक पेशेवर गिरोह है जो हमारे वन्यजीव पारिस्थितिकी तंत्र को तबाह कर रहा था। हमने आरोपियों को जेल भेज दिया है और गिरोह के अन्य संपर्कों की जांच जारी है।” — वन विभाग अधिकारी
प्रारंभिक पूछताछ में पता चला है कि गिरफ्तार किए गए 6 आरोपी केवल प्यादे हैं। इनके पीछे एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है जो वन्यजीवों के अंगों का व्यापार करता है। दंतेवाड़ा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में बाघ और तेंदुए का शिकार होना सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती है। वन विभाग अब इस गिरोह के ‘मास्टरमाइंड’ तक पहुंचने की कोशिश में है। पकड़े गए आरोपियों पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की कड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। विभाग ने जंगल में गश्त बढ़ा दी है ताकि गिरोह के बाकी सदस्यों को भी दबोचा जा सके।
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