स्टंट्स और रोमांच पर सख्ती: जान जोखिम में डाली तो खैर नहीं
आयोग ने स्पष्ट किया है कि किशोरावस्था में बच्चों का झुकाव साहसिक कार्यों की ओर रहता है, लेकिन इसकी आड़ में जीवन को खतरे में डालना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब फेयरवेल के दौरान किसी भी प्रकार के बाइक स्टंट, ओपन जीप में खतरनाक प्रदर्शन या रील बनाने के लिए किए जाने वाले जोखिम भरे कार्यों पर पूरी तरह रोक रहेगी। शाला प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना होगा कि समारोह केवल शिक्षकों की देखरेख में और एक गरिमामय तरीके से संपन्न हो।
- अनिवार्य निगरानी: हर विदाई समारोह में कम से कम दो वरिष्ठ शिक्षकों की उपस्थिति अनिवार्य होगी।
- लिखित अनुमति: आयोजन से पहले स्कूल के प्राचार्य से लिखित स्वीकृति लेना जरूरी है।
- प्रोटोकॉल का पालन: स्कूल के बाहर किसी निजी कैफे या होटल में होने वाली पार्टियों पर भी स्कूल की नैतिक जिम्मेदारी तय की गई है।
“रोमांच और साहसिक कार्यों के प्रति छात्रों का झुकाव स्वाभाविक है, लेकिन इससे बच्चों के जीवन को खतरा नहीं पहुंचना चाहिए। यदि समय रहते इन पर रोक नहीं लगाई गई, तो यह भविष्य में एक गलत और जानलेवा परंपरा का रूप ले सकते हैं। शिक्षकों की उपस्थिति में ही आयोजन गरिमामय ढंग से होने चाहिए।” — आदेश प्रति, छत्तीसगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग
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