- कड़ा एक्शन: नियमों की अनदेखी पर जिले के 5 अस्पतालों के लाइसेंस तुरंत प्रभाव से रद्द किए गए।
- जांच का दायरा: कलेक्टर के निर्देश पर गठित 04 विशेष टीमों ने एक महीने तक गुप्त निरीक्षण किया।
- कारण बताओ नोटिस: खामियां पाए जाने पर 48 अन्य अस्पतालों को स्पष्टीकरण देने का अल्टीमेटम मिला।
Durg Action News , दुर्ग — छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने के लिए प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी के आदेश पर नर्सिंग होम एक्ट और आयुष्मान योजना के नियमों को ताक पर रखने वाले निजी अस्पतालों के खिलाफ हंटर चला है। 04 अलग-अलग निरीक्षण टीमों की रिपोर्ट के आधार पर 5 अस्पतालों के पंजीयन रद्द कर दिए गए हैं, जिससे चिकित्सा जगत में हड़कंप मच गया है।
निरीक्षण का ‘फुल कोर्ट प्रेस’: कैसे हुई कार्रवाई?
कलेक्टर के निर्देशानुसार, जिले के सभी एम्पेनल्ड निजी अस्पतालों का फिजिकल ऑडिट किया गया। इस चेकिंग के लिए बनी टीमों में जिला आयुष कार्यालय, स्थानीय नगरीय निकाय और स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि शामिल थे। टीमों ने चेकलिस्ट के आधार पर अस्पतालों की सुविधाओं, स्टाफ और इलाज की गुणवत्ता की बारीकी से जांच की।
- टीमों का गठन: 04 विशेष टीमें मैदान पर उतरीं।
- निरीक्षण अवधि: 30 दिनों के भीतर जिले के सभी बड़े केंद्रों की जांच पूरी की गई।
- आयुष्मान योजना: एम्पेनल्ड अस्पतालों में सरकारी नियमों के पालन की सख्ती से जांच हुई।
जांच में पाया गया कि कई अस्पताल बिना पर्याप्त सुविधाओं और योग्य स्टाफ के ही आयुष्मान कार्ड पर इलाज कर रहे थे। वहीं कुछ केंद्रों पर नर्सिंग होम एक्ट की बुनियादी शर्तों का भी उल्लंघन मिला।
“मरीजों की जान से खिलवाड़ और नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निरीक्षण के दौरान जिन अस्पतालों में मानक पूरे नहीं पाए गए, उन पर कार्रवाई की गई है। 48 केंद्रों को सुधार के लिए नोटिस दिया गया है, जवाब संतोषजनक न होने पर उन पर भी एक्शन होगा।”
— जिला प्रशासन, दुर्ग
लाइसेंस रद्द होने वाले 5 अस्पतालों के मरीज अब वहां भर्ती नहीं हो सकेंगे। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह अभियान सिर्फ एक बार का नहीं है, बल्कि समय-समय पर ऐसे ‘सरप्राइज विजिट’ होते रहेंगे। 48 अस्पतालों को अपनी कमियां दूर करने के लिए सीमित समय दिया गया है।
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