नई दिल्ली: उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव का ऐलान इसी हफ्ते हो सकता है. अगस्त के आखिरी हफ्ते तक देश को नया उपराष्ट्रपति मिल जाएगा. जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के चलते उपराष्ट्रपति का पद खाली हो गया है. संविधान की धारा 68 (2) के मुताबिक, इस्तीफे के चलते खाली पद के लिए होने वाले चुनाव के लिए कोई समयसीमा नहीं दी गई है, लेकिन कहा गया है कि जल्द से जल्द चुनाव करवाया जाएगा. उप राष्ट्रपति पद के लिए सत्तापक्ष के साथ विपक्ष के पास भी अपना उम्मीदवार उतारने का अधिकार होता है. अगर विपक्ष से उम्मीदवार न आए तो सत्तापक्ष का प्रत्याशी निर्विरोध चुना जा सकता है.

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उपराष्ट्रपति का चुनाव संपन्न करने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की होती है. सूत्रों के मुताबिक मंगलवार को गृह मंत्रालय ने जैसे ही जगदीप धनखड़ के इस्तीफ़े का औपचारिक ऐलान किया , चुनाव आयोग ने चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी. एनडीटीवी को मिली जानकारी के मुताबिक इसी हफ्ते चुनाव आयोग चुनाव के कार्यक्रम का ऐलान कर देगा.

राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव से जुड़े 1952 के कानून के मुताबिक़ चुनाव की ज़रूरत पड़ने पर अधिसूचना जारी होने के 32 दिनों के भीतर उपराष्ट्रपति का चुनाव करवाना अनिवार्य होता है. इस लिहाज़ से अधिकतम अगस्त के आख़िरी हफ़्ते तक देश को नया उपराष्ट्रपति मिल जाएगा. नियम के मुताबिक चुनाव की अधिसूचना जारी होने के 14 दिनों तक योग्य उम्मीदवार अपना नामांकन दाखिल कर सकते हैं.

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राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव कानून 1952 के मुताबिक, चुनाव की अधिसूचना ( ऐलान नहीं ) जारी होने के 14 दिनों तक नामांकन दाखिल करने का समय रहता है. उसके अगले दिन नामांकन पत्रों की जांच की जाती है. उसके अगले दो दिनों तक नाम वापस लेने का समय रहता है. अगर एक से ज़्यादा उम्मीदवार बचे तो नामांकन वापस लेने की तारीख़ के 15 दिनों बाद चुनाव का प्रावधान है. यानी अधिसूचना जारी होने के 32 दिनों बाद जरूरत पड़ने पर चुनाव होता है. चूंकि पिछले उपराष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा के महासचिव को चुनाव अधिकारी बनाया गया था लिहाजा इस बार राज्यसभा के महासचिव पी सी मोदी को रिटर्निंग ऑफिसर बनाया जा सकता है.

गौरतलब है कि उप राष्ट्रपति पद से 21 जुलाई को जगदीप धनखड़ ने इस्तीफा दे दिया था. धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों से अपना त्यागपत्र दिया था. हालांकि यह कहा जा रहा है कि जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ विपक्ष के महाभियोग नोटिस को स्वीकार करने के बाद जो घटनाक्रम हुआ, उसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया. उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति भी होते हैं. ऐसे में अब उप सभापति हरिवंश के कंधों पर राज्यसभा के संचालन की बड़ी जिम्मेदारी होगी.


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