नई दिल्ली/लखनऊ | विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी ‘समता विनियम 2026’ (Promotion of Equity Regulations 2026) को लेकर देशभर में सवर्ण समाज और जनरल कैटेगरी के छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा है। दिल्ली में यूजीसी मुख्यालय के बाहर भारी विरोध प्रदर्शन और घेराव को देखते हुए सुरक्षा बढ़ा दी गई है। वहीं उत्तर प्रदेश के कई जिलों में प्रदर्शनकारियों ने सवर्ण सांसदों और विधायकों को चूड़ियां भेजकर अपना विरोध दर्ज कराया है।

बढ़ते विवाद को देखते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को बयान जारी कर आश्वस्त किया है कि ये नियम संविधान के दायरे में हैं और इनका दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा।

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मामले की मुख्य बातें :

  • दिल्ली में प्रदर्शन: यूजीसी हेडक्वार्टर के बाहर भारी सुरक्षा और बैरिकेडिंग; छात्रों ने की नियम वापस लेने की मांग।

  • राजनीतिक हलचल: यूपी में बीजेपी के कई पदाधिकारियों ने इस्तीफा दिया; सवर्ण सांसदों को ‘चूड़ियां’ भेजकर किया विरोध।

  • नियमों का विरोध: प्रदर्शनकारियों ने इसे ‘काला कानून’ बताया; कहा- इससे सवर्ण छात्रों को झूठे मामलों में फंसाया जा सकता है।

  • सरकार की सफाई: शिक्षा मंत्रालय ने कहा- “किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा, कानून का मिसयूज रोकने की जिम्मेदारी हमारी।”

क्यों हो रहा है विरोध? (विवाद की 4 बड़ी वजहें)

प्रदर्शनकारी छात्रों और सवर्ण संगठनों का आरोप है कि 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित नए नियम ‘भेदभावपूर्ण’ हैं:

  1. झूठी शिकायतों पर सजा का प्रावधान नहीं: पहले के ड्राफ्ट में ‘झूठी शिकायत’ करने पर दंड का प्रावधान था, जिसे अंतिम नियमों से हटा दिया गया है।

  2. सबूत का बोझ आरोपी पर: प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इन नियमों में ‘Presumption of Guilt’ (दोषी मान लेने की प्रवृत्ति) है, जिससे निर्दोष छात्रों का करियर बर्बाद हो सकता है।

  3. सिर्फ आरक्षित वर्ग के लिए समिति: इक्विटी कमेटी में सवर्ण वर्ग के प्रतिनिधित्व को लेकर आशंकाएं हैं।

  4. कड़े दंड: नियमों का पालन न करने पर विश्वविद्यालयों की मान्यता रद्द करने या ग्रांट रोकने जैसे सख्त प्रावधान हैं।

यूपी में बढ़ा सियासी पारा

उत्तर प्रदेश में इस कानून की गूंज सबसे ज्यादा है। रायबरेली, आगरा और मेरठ जैसे शहरों में सवर्ण समाज ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। आगरा में एक बीजेपी नेता ने प्रधानमंत्री को खून से पत्र लिखकर कानून वापस लेने की मांग की। कई जगहों पर बीजेपी के स्थानीय पदाधिकारियों ने इसे ‘आत्मसम्मान के खिलाफ’ बताकर इस्तीफे दे दिए हैं।

सरकार का पक्ष: “यह सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुआ”

विवाद बढ़ता देख शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि ये नियम रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत बनाए गए हैं।

“मैं आश्वस्त करता हूँ कि किसी का उत्पीड़न नहीं होगा। भेदभाव के नाम पर कानून का दुरुपयोग करने का अधिकार किसी को नहीं होगा। सब कुछ संविधान की परिधि में होगा।” — धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय शिक्षा मंत्री

ताजा स्थिति

दिल्ली पुलिस ने यूजीसी कार्यालय के आसपास धारा 144 जैसे कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। प्रदर्शनकारी छात्र संगठन 15 दिनों के भीतर इन नियमों में संशोधन की मांग पर अड़े हुए हैं, अन्यथा आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी गई है।


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