जवानों ने ऐसे खोला नक्सलियों की ‘बैंक’ का राज
यह पूरी कार्रवाई जिले के वनांचल क्षेत्रों में की गई। मुखबिर से मिली पुख्ता जानकारी के बाद जिला पुलिस और केंद्रीय सुरक्षाबलों की एक संयुक्त टीम ने सर्च ऑपरेशन चलाया। घने जंगलों के बीच एक संदिग्ध स्थान पर खुदाई करने पर प्लास्टिक के ड्रम और कंटेनर बरामद हुए। जब इन्हें खोला गया, तो अंदर नोटों की गड्डियां और हथियार सलीके से पैक करके रखे गए थे। पुलिस को अंदेशा है कि यह नक्सलियों की लेवी (जबरन वसूली) की रकम है जिसे भविष्य में बड़े हमलों के वित्तपोषण के लिए छिपाया गया था।
हथियार और गोला-बारूद का बड़ा जखीरा जब्त
कैश के अलावा, जवानों ने मौके से कई घातक हथियार भी बरामद किए हैं। इनमें देसी कट्टे, विस्फोटक सामग्री, डेटोनेटर और नक्सलियों के दैनिक उपयोग का सामान शामिल है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इतने भारी मात्रा में हथियारों का मिलना इस बात का संकेत है कि नक्सली इस क्षेत्र में किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की फिराक में थे। 2000 रुपये के नोटों की बरामदगी से यह भी स्पष्ट होता है कि नोटबंदी के लंबे समय बाद भी नक्सलियों के पास पुराने नोटों का स्टॉक बचा हुआ है, जिसे वे खपाने की कोशिश कर रहे थे।
“यह गरियाबंद पुलिस के लिए एक रणनीतिक जीत है। हमने न केवल उनके हथियारों को जब्त किया है, बल्कि उनके आर्थिक नेटवर्क को भी तगड़ी चोट पहुंचाई है। जमीन के नीचे दबा यह कैश नक्सलियों की कमर तोड़ने के लिए काफी है। इलाके में सर्चिंग ऑपरेशन अभी भी जारी है।”
— अमित कांबले, पुलिस अधीक्षक (SP), गरियाबंद
इस बड़ी बरामदगी के बाद ओडिशा सीमा से सटे गरियाबंद के गांवों में चौकसी बढ़ा दी गई है। पुलिस अब उन कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है जो नक्सलियों को रसद और फंड मुहैया कराते थे। स्थानीय ग्रामीणों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है। सुरक्षाबलों का मानना है कि इस फंड के छिन जाने से नक्सलियों की भर्ती प्रक्रिया और हथियारों की खरीद-फरोख्त पर गहरा असर पड़ेगा। आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
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