स्व-सहायता समूहों ने मजबूत की आर्थिक स्थिति
स्वच्छता, बिजली और पेयजल सुविधाओं में बड़ा सुधार

गरीब परिवारों के पक्के मकान का सपना हुआ पूरा

गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। जिला मुख्यालय गरियाबंद से लगभग 55 किलोमीटर दूर बसे ग्राम किरवई की पहचान एक समृद्ध, मेहनतकश और कृषि आधारित गांव के रूप में की जाती है। यहां के लोग प्रारंभ से ही कृषि कार्य में दक्ष, मेहनती और निष्ठावान रहे है। जिसके कारण गांव की सामाजिक व आर्थिक स्थिति वर्षों से मजबूत रही है। ग्राम पंचायत किरवई की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि दर्शाती है कि प्रारंभ में यहां कुल 557 परिवार निवासरत थे। यह गांव स्टेट हाईवे से मात्र 08 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और यहां के लोगों का प्रमुख जीविकोपार्जन स्रोत कृषि और मजदूरी है। गांव में स्थित शीतला मंदिर, पुजेरिन दाई मंदिर तथा शीतला तालाब यहां के प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं। वर्तमान में ग्राम की कुल जनसंख्या 3 हजार 612 है, जिसमें 1 हजार 862 महिलाएं तथा 1 हजार 750 पुरुष शामिल हैं। किरवई में कुल 20 वार्ड हैं। यहां अनुसूचित जनजाति के 179, अनुसूचित जाति के 170, अन्य पिछड़ा वर्ग के 3 हजार 125 तथा सामान्य वर्ग के 119 मतदाता सहित कुल मतदाता संख्या 2 हजार 725 है। यहाँ प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 122 आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं। किरवई के लोगों की आर्थिक स्थिति में बीते वर्षों में काफी सुधार हुआ है। कृषि, मजदूरी, स्व-सहायता समूह गतिविधियों तथा अन्य रोजगार साधनों ने लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाया है। ग्राम संगठन के अंतर्गत कुल 25 महिला स्व-सहायता समूह सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। इन समूहों ने बैंक से ऋण प्राप्त कर आय में वृद्धि की है तथा कृषि एवं इससे संबंधित अनेक गतिविधियों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बने हैं। ग्राम में शासन की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत अनेक विकास कार्य स्वीकृत किए जा चुके हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत घर-घर शौचालय निर्माण, मनरेगा के तहत बकरी शेड, नाली निर्माण, सीसी रोड, गौठान निर्माण, तालाब गहरीकरण, रंगमंच निर्माण, बाउंड्रीवाल निर्माण सहित प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवासों का निर्माण जैसे कार्यों ने गांव की संरचनात्मक सुविधाओं में व्यापक सुधार किया है। स्वच्छता और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बड़ा परिवर्तन आया है। शौचालय, नालियां और सोख्ता गड्ढे बनने से गांव स्वच्छ हुआ है और बीमारियों में कमी आई है। उज्ज्वला योजना के तहत ग्रामीणों को गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जाने से लकड़ी पर निर्भरता कम हुई है, जिससे पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिली है। हर घर बिजली योजना के तहत गांव के प्रत्येक घर तक विद्युत सुविधा पहुंच गई है। नल-जल कनेक्शन उपलब्ध होने से शुद्ध पेयजल की उपलब्धता में वृद्धि हुई है। गांव की महिलाएं नवाचार कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति और अधिक मजबूत हुई है।
गांव की निवासी कान्ति बाई साहू बताती हैं कि पहले वह अपने परिवार के साथ मिट्टी, खपरैल और घास-फूस वाले घर में रहती थीं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पक्का मकान बनाना उनके लिए असंभव होता था। ग्राम पंचायत सचिव से जानकारी मिलने के बाद उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण में वर्ष 2024-25 में ओबीसी वर्ग के अंतर्गत चयनित किया गया। उन्हें शासन द्वारा 1 लाख 20 हजार रुपये तथा मनरेगा के तहत 22 हजार 113 रुपये के 90 मानव दिवस स्वीकृत हुए। किश्तों में राशि सीधे उनके खाते में आई और चरणबद्ध तरीके से निर्माण कार्य पूर्ण हुआ। आज उनका पक्का मकान उनके सपनों को साकार हुआ है।
इसी प्रकार ग्राम के गणेश राम भी आवास निर्माण में सक्षम नहीं थे। उनका मकान रूलर मेंशन ट्रेनिंग कार्यक्रम के अंतर्गत मास्टर ट्रेनर की निगरानी में तैयार कराया गया। आवास निर्माण के दौरान जनपद पंचायत फिंगेश्वर एवं जिला पंचायत के आवास शाखा के अधिकारी एवं कर्मचारी लगातार निरीक्षण और मार्गदर्शन देते रहे। अब उनका मकान पूर्णतः तैयार है और वह अपने नए घर में निवासरत हैं। पीएम-जनमन योजना ने उनका वर्षों पुराना सपना साकार किया है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसे अप्रैल 2016 में आरंभ किया गया। इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश के गरीब, बेघर और कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित, पक्के और सुविधाजनक आवास उपलब्ध कराना है। इस योजना के माध्यम से मकान निर्माण के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सड़क, दूरसंचार व अन्य बुनियादी सुविधाओं को भी सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि ग्रामीण परिवारों को बेहतर जीवन स्तर प्रदान किया जा सके। ग्राम किरवई में इस योजना के क्रियान्वयन से अनेक गरीब परिवारों का वर्षों से संजोया सपना अब वास्तविकता बन गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना ने सचमुच गरीबों की जिंदगी में खुशहाली लाया है।


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