कोलकाता | पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता सहित राज्य के दक्षिण हिस्से के कई जिलों में शुक्रवार दोपहर करीब 1:22 बजे भूकंप के जोरदार झटके महसूस किए गए। लगभग 10 सेकंड तक चली इस हलचल के कारण बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले लोग दहशत में आ गए और फौरन सड़कों व खुले मैदानों की ओर भागे।
बांग्लादेश में था भूकंप का केंद्र
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) और अन्य वैश्विक एजेंसियों के अनुसार:
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तीव्रता: रिक्टर स्केल पर 5.3 से 5.4 के बीच।
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केंद्र: भूकंप का केंद्र बांग्लादेश के सतखिरा/खुलना क्षेत्र (ढाका के पास) में जमीन के नीचे करीब 10 किलोमीटर की गहराई पर था।
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दूरी: यह केंद्र कोलकाता से लगभग 100-150 किलोमीटर की दूरी पर स्थित था, जिस कारण झटके काफी तीव्र महसूस हुए।
कोलकाता में मची अफरातफरी
भूकंप के झटके इतने तेज थे कि दफ्तरों में रखे कंप्यूटर, कुर्सियां और घरों के पंखे तेजी से हिलने लगे।
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नबन्ना और विधानसभा खाली: राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ और पश्चिम बंगाल विधानसभा की कार्यवाही के दौरान भी झटके महसूस किए गए, जिसके बाद एहतियातन इमारतों को खाली करा लिया गया।
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आईटी हब में दहशत: साल्ट लेक के सेक्टर V और न्यू टाउन स्थित आईटी कंपनियों के हजारों कर्मचारी डर के मारे इमारतों से बाहर निकल आए।
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अन्य जिले: कोलकाता के अलावा हावड़ा, हुगली, उत्तर और दक्षिण 24 परगना और पूर्व मेदिनीपुर जिलों में भी झटके महसूस किए गए।
जान-माल के नुकसान की खबर नहीं
रिपोर्टों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में अब तक किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान या बड़ी इमारत के गिरने की सूचना नहीं मिली है। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए है और पुराने व जर्जर भवनों का आकलन किया जा रहा है।
विशेषज्ञों की राय
भूकंप वैज्ञानिकों का कहना है कि कोलकाता ‘सॉफ्ट एल्युवियल सॉइल’ (नरम मिट्टी) पर बसा है, जो भूकंप की तरंगों को और अधिक तीव्र (Amplify) कर देती है। यही कारण है कि बांग्लादेश या म्यांमार में आने वाले मध्यम श्रेणी के भूकंपों का असर भी कोलकाता में काफी ज्यादा महसूस होता है।
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