PM Modi : भारत के राष्ट्रीय-गीत वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर कल (8 दिसंबर 2025) निचले सदन लोकसभा में एक विशेष चर्चा आयोजित की जाएगी। इस ऐतिहासिक चर्चा की शुरुआत नरेंद्र मोदी करेंगे।
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क्यों है यह चर्चा महत्वपूर्ण
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वंदे मातरम पहली बार 7 नवंबर 1875 को प्रकाशित हुआ था, जिसे 2025 में 150 साल पूरे हो गए हैं।
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इस गीत ने भारत के स्वतंत्रता संघर्ष में एक मजबूत पहचान तथा राष्ट्र-चेतना को जन-आंदोलन का रूप दिया।
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अब, 150 साल पूरे होने के अवसर पर देश भर में इस गीत की विरासत और उसके वर्तमान-काल के महत्व पर सार्वजनिक विमर्श का आयोजन किया जा रहा है।
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संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान 8 दिसंबर को यह विशेष चर्चा तय है।
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शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी करेंगे। उन्होंने पहले ही देशव्यापी स्मरणोत्सव का उद्घाटन 7 नवंबर को किया था, जिसमें उन्होंने स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी किया था।
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इस चर्चा में दक्षिण से लेकर उत्तर तक, पूर्व–पश्चिम तक सभी राज्यों के प्रतिनिधि भाग लेंगे; लक्ष्य है कि वंदे मातरम के आदर्श — एकता, स्वतंत्रता, मातृभूमि के प्रति प्रेम — को पुनर्स्थापित किया जाए।
PM मोदी का दृष्टिकोण और वह संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि वंदे मातरम सिर्फ एक गीत नहीं — “एक मंत्र, एक ऊर्जा, एक स्वप्न, एक संकल्प” है।
उन्होंने यह भी जोर दिया कि वंदे मातरम हमें हमारे इतिहास से जोड़ता है, आज के भारत को आत्मविश्वास देता है, और आने वाली पीढ़ियों को गर्व एवं जिम्मेदारी की भावना सिखाता है।
기대 — क्या हो सकती है बहस में दिक्कत / संभावनाएँ
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यह चर्चा राष्ट्र-गान के इतिहास, आज की पीढ़ी में उसकी उपयोगिता, विविध धार्मिक-सांस्कृति वाले भारत में एकता के स्वरूप, और वंदे मातरम का समकालीन सामाजिक-राजनीतिक महत्व जैसे विषयों को छुएगी।
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कुछ राजनीतिक दल और विचारक संभवतः यह भी उठाएँगे कि आज के समय में वंदे मातरम का क्या स्वरूप हो — किस तरह से उसे सभी धर्म/जाति/भाषा के नागरिकों से जोड़कर देखा जाए।
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