रायपुर(गंगा प्रकाश)। छत्तीसगढ़ के पूर्व खाद्य मंत्री अमरजीत भगत के घर आयकर की जांच में करोड़ों की अघोषित संपत्ति का पता चला है। दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूर्व मंत्री द्वारा अपने राजनैतिक पहुंच से सहयोगियों के माध्यम से 13 करोड़ रुपये की अवैध कमाई का पता चला है। करीबियों द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से आठ करोड़ रुपये का लाभ अर्जित करने का पता चला है। रियल एस्टेट में पूर्व मंत्री व करीबी सहयोगियों द्वारा करोड़ों के निवेश का भी पता चला है।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड की मुख्य आयुक्त सुरभि अहलूवालिया की ओर से छत्तीसगढ़ के पॉलिटिकल एक्सपोज्ड पर्सन (पीईपी) व उनके करीबियों के यहां छापे का ब्यौरा जारी किया गया है। यह जानकारी पूर्व मंत्री भगत के यहां छापे के बाद प्रेस रिलीज के रूप में जारी की गई है।

अमरजीत भगत व करीबी सहयोगियों के यहां आयकर ने की कार्रवाई

जारी बयान में सुरभि अहलूवालिया ने कहा है कि 31 जनवरी 2024 को एक राजनीतिक रूप से उजागर व्यक्ति (पीईपी) अमरजीत भगत व उसके करीबी सहयोगियों और कुछ सरकारी अधिकारियों के यहां तलाशी और जब्ती अभियान शुरू किया गया था। भगत के करीबी सहयोगियों में से एक रियल एस्टेट के कारोबार में लगा हुआ है।
तलाशी अभियान में छत्तीसगढ़ के रायपुर, सरगुजा, सीतापुर और रायगढ़ जिलों में फैले 25 से अधिक परिसरों को शामिल किया गया। तलाशी अभियान के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज़, डिजिटल बैलेंस शीट और डिजिटल सबूत पाए गए। इन्हें जब्त कर लिए गए है। ये साक्ष्य इन व्यक्तियों द्वारा अपनाई गई कर चोरी और अन्य संदिग्ध प्रथाओं के तौर-तरीकों को उजागर करते हैं।
प्रारंभिक विश्लेषण से पता चलता है कि इन व्यक्तियों ने सरकार से संबंधित कार्यों में विभिन्न व्यक्तियों को अनुचित लाभ देने के बदले में अवैध धन प्राप्त किया है। तलाशी के दौरान बरामद किए गए आपत्तिजनक दस्तावेजों में कथित पीईपी द्वारा अपने करीबी सहयोगियों के माध्यम से नकद में प्राप्त लगभग 13 करोड़ रुपये का विवरण शामिल है।

लगभग तीन करोड़ रुपये के आन-मनी भुगतान का मिला प्रमाण

इसके अलावा जब्त किए गए सबूतों से पता चलता है कि गलत तरीके से कमाया गया यह पैसा पीईपी के सहयोगियों के माध्यम से रियल एस्टेट में निवेश किया गया है। इसी तरह अचल संपत्ति की खरीद में लगभग तीन करोड़ रुपये के ऑन-मनी भुगतान (नकद) का प्रमाण मिला है।
रियल एस्टेट कारोबार में पीईपी (अमरजीत भगत) के सहयोगियों द्वारा कमाए गए आठ करोड़ रुपये भी पाए गए हैं। ऐसे साक्ष्यों की सत्यता को भगत के करीबी सहयोगियों और उनके कर्मचारियों के बयानों से भी बल मिला है, जिसमें उन्होंने उपरोक्त कदाचार को स्वीकार किया है।
इसके अलावा भगत के करीबी सहयोगियों द्वारा अवैध रूप से जमीन हड़पने से संबंधित आपत्तिजनक दस्तावेज भी पाए गए हैं। जिन किसानों और प्रभावित व्यक्तियों की भूमि इस प्रकार हस्तांतरित की गई है, उन्होंने भी अपने बयान में स्वीकार किया है कि उक्त भूमि लेनदेन अनुचित तरीके से पूरा किया गया था।
पुनर्वास पट्टा जमीन की खरीद की अनुमति प्राप्त करने में भी उनके सहयोगियों द्वारा पूर्व मंत्री के अनुचित प्रभाव का उपयोग किया गया था।भगत की पत्नी के ह्यूम पाइप्स की निर्माण कंपनी के स्वामित्व वाले कारखाने के परिसर से बैंक क्रेडिट के मुकाबले टर्नओवर में बेमेल से संबंधित मुद्दों का भी पता चला है।

13 करीबियों का आयकर विभाग ने मांगा है ब्यौरा

आयकर विभाग ने अंबिकापुर कलेक्टर को पत्र लिखकर 13 लोगों की संपत्ति का ब्यौरा मांगा है। इनके संबंध में विभाग ने पिछले पांच साल में जमीन की खरीदी और बिक्री की जानकारी मांगी है। साथ ही रियल इस्टेट कारोबार में निवेश या अन्य प्रॉपर्टी के साथ-साथ जमीन आबंटन के अलावा वन अधिकार अधिनियम ( एफआरए) व अन्य लाभ की जानकारी उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। इन लोगों के यहां पिछले दिनों आयकर टीम ने जांच भी की थी।

अमरजीत ने परेशान करने का लगाया था आरोप

पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने आयकर की जांच को परेशान करने की कार्रवाई बताया था। उन्होंने विधानसभा चुनाव से पहले घोषणा पत्र में 7.55 करोड़ की संपत्ति का उल्लेख किया था लेकिन आयकर विभाग ने करोड़ों की अघोषित संपत्ति मिलने का दावा जांच के बाद किया है।
मालूम हो कि भगत व उनके नजदीकी लोगों यहां छापामार कार्रवाई की गई थी। भगत के करीबी कांग्रेस नेता व वन ठेकेदार संघ राजीव अग्रवाल जांच में उपस्थित नहीं थे।उनके अंबिकापुर स्थित घर के कुछ कमरों को सील किया गया है।

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