संजय सिंह भदौरिया

सुकमा (गंगा)। हाल ही में भारत के कुछ  राजस्थान , हरियाणा , महाराष्ट्र , झारखंड आदि राज्यों में गाँठदार त्वचा रोग ( लम्पीस्कीन रोग ) के लक्षण देखने को मिले है । यह रोग गौवंशी तथा भैंसवंशी पशुओं में ” गाँठदार त्वचा रोग वायरस ” के संक्रमण के कारण होता है । इस रोग से ग्रषित पशु के पूरे शरीर में विशेष रूप से सिर , गर्दन , अंगों , थन ( मादा मवेशी की स्तन ग्रंथि ) और जननांगों के आसपास दो से पांच सेंटीमीटर व्यास की गाँठ के रूप में प्रकट होता है । यह गाँठ बाद में धीरे-धीरे एक बड़े और गहरे घाव का रूप ले लेती है । इसके अन्य लक्षणों में सामान्य अस्वस्थता ,आंख और नांक से पानी आना , बुखार तथा दुध के उत्पादन में अचानक कमी आदि शामिल है ।यह संक्रमण मच्छरों,मक्खियों और जूं के साथ पशुओं की लार तथा दूषित जल एवं भोजन के माध्यम से फैलता है ।

रात्रि में निरीक्षण कर लम्पि त्वचा रोग के टीकाकरण करने किया निर्देशित

संचालक,पशु चिकित्सा सेवाएं छत्तीसगढ़ के निर्देशानुसार जिला-सुकमा,विकासखंड कोंटा पशु चिकित्सालय दोरनापाल क्षेत्रांतर्गत छत्तीसगढ़ ओड़िशा बॉर्डर चेक पोस्ट का उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएं जिला-सुकमा के द्वारा रात्रि मे निरिक्षण किया गया,निरिक्षण मे ड्यूटीरत कर्मचारी मौके पर उपस्थित पाए गए तथा छत्तीसगढ़ ओड़िशा सीमा जाँच नाका मे तैनात ओड़िशा पुलिस के अधिकारीयों से लम्पि त्वचा रोग के नियंत्रण हेतु चर्चा कर परिवहन के माध्यम से पशुओं के आवागमन को रोकने विभागीय कर्मचारियों को सहयोग करने कहा गया!

तथा कार्यरत स्टॉफ को उक्त रोग के नियंत्रण हेतु संचालक  पशु चिकित्सा सेवाएं छत्तीसगढ़ के द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन कर नियमित होम-टू-होम जा कर पशुओं का डी-टिकिंग कर गोटपॉक्स वैक्सीन का टीकाकरण कर इलाके मे सतत निगरानी बनाये रखने हेतु निर्देशित भी किया गया!

तथा लम्पि त्वचा रोग के संक्रमण से बचाव हेतु पशु पालकों को आवश्यक समझाईश दे कर गौवंशीय भैंसवंशीय पशुओं का डी-टिकिंग कर गोट पॉक्स वैक्सीन का टीकाकरण किया गया!

साथ ही संचालक पशु चिकित्सा डॉ जहीरुद्दीन ने 

रोकथाम और नियंत्रण के उपाय बताते हुए कहा कि  फार्म और परिसर में सख्त जैव सुरक्षा को अपनाएं । नए जानवरों को अलग रखा जाना चाहिए और त्वचा की गाँठों और घावों की जांच की जानी चाहिए । प्रभावित क्षेत्र से जानवरों की आवाजाही से बचे । प्रभावित जानवरों को चारा , पानी और उपचार के साथ झुंड से अलग रखा जाना चाहिए , ऐसे जानवरों को चरने वाले क्षेत्र में नहीं जाने देना चाहिए । उचित कीटनाशकों का उपयोग करके मच्छरों और मक्खियों के काटने पर नियंत्रण | इसी तरह नियमित रूप से वेक्टर विकर्षण का उपयोग करें जिससे वेक्टर संचरण का जोखिम कम हो जाएगा । फार्म के पास वेक्टर प्रजनन स्थलों को सीमित करें जिसके लिए बेहतर खाद प्रबंधन की आवश्यकता होती है । वैक्सीन एक फ्रीज ड्राय , लाइव एटेन्युएटेड वैक्सीन उपलब्ध है जो बीमारी को नियंत्रित करने और फैलने से रोकने में मदद करता है । निर्माताओं के निर्देशों के अनुसार शेष जानवरों का टीकाकरण करे । गाँठदार त्वचा रोग का नियंत्रण और रोकथाम चार रणनीतियों पर निर्भर करता है , जो निम्नलिखित है- ” आवाजाही पर नियंत्रण ( क्वारंटीन ) , टीकाकरण , संक्रमित पशुओं का वध और प्रबंधन ।


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