नगरी ब्लॉक के आठ गांवों में चक्काजाम, मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर फूटा ग्रामीणों का आक्रोश

 

कृष्णा दीवान

धमतरी (गंगा प्रकाश)। नगरी ब्लॉक अंतर्गत आने वाले आठ गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने शनिवार को बोराई संघर्ष समिति के बैनर तले मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शन के चलते करीब तीन घंटे तक भारत माता प्रोजेक्ट की ओर जाने वाले वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप रही। ग्रामीणों ने बीच सड़क पर चटाई बिछाकर सांकेतिक धरना प्रदर्शन किया, जिससे कोंडागांव मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

 

यह आंदोलन धमतरी जिला मुख्यालय से लगभग 110 किलोमीटर दूर स्थित बोराई, घुटकल, लिखमा, मैनपुर पंचायतों और उनके आश्रित आठ गांवों के 7500 से अधिक ग्रामीणों द्वारा किया गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि आज़ादी के बाद से अब तक इस क्षेत्र को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं। सड़कों की हालत जर्जर है, बिजली-पानी की समस्या गंभीर बनी हुई है और स्वास्थ्य सुविधाओं का भी अभाव है।

ग्रामीणों की प्रमुख 9 मांगें हैं:

  1.  सिहावा से बोराई-उडोसा सीमा मार्ग तक डामरीकरण।
  2. बोराई सिविल अस्पताल में पूर्ण स्टाफ और निवास भवन की व्यवस्था।
  3. बोराई से बेलरगांव तहसील कार्यालय तक सड़क और पुलिया का निर्माण।
  4. बिजली और पानी की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
  5. बोराई पंचायत के आश्रित ग्राम बुड़ा के लिए सड़क और पुलिया निर्माण।
  6.  एकावरी रोड का मुरमीकरण कार्य कराया जाए।
  7. पोस्टमेटोक आदिवासी बालक छात्रावास भवन का निर्माण।
  8. घुटकेल हायर सेकेंडरी स्कूल में पूर्णकालिक प्राचार्य की नियुक्ति।
  9. क्षेत्र के सभी स्कूलों में स्वीकृत पदों के अनुसार शिक्षकों की नियुक्ति।

 

प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आने वाले दिनों में व्यापक स्तर पर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन और चक्काजाम करने को विवश होंगे।

घटनास्थल पर पहुंचे बेलरगांव तहसीलदार ने ग्रामीणों को समझाइश देकर और उचित आश्वासन देकर चक्काजाम समाप्त करवाया। हालांकि ग्रामीणों ने साफ किया कि वे केवल आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं और जब तक मांगे पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।

ग्रामीणों का कहना है कि बड़ी गाड़ियों के आवागमन से सड़कें जर्जर हो चुकी हैं और रोज़ हादसे हो रहे हैं। वहीं, बोराई का सिविल अस्पताल नाम मात्र का रह गया है, स्टाफ की भारी कमी है, जिससे गर्भवती महिलाओं को कोंडागांव जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में ले जाना पड़ता है।

सम्बंधित विभागों की चुप्पी और प्रशासन की निष्क्रियता के खिलाफ अब यह आंदोलन और तेज़ होने की संभावना है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है।

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