परमात्मा पर विश्वास,संबंध और समर्पण की भाव हमेशा होनी चाहिए

राघवेंद्र सिंह

बलौदाबाजार(गंगा प्रकाश)। बलौदा बाजार जिले में गांधी नगर चौक में आयोजक शुक्ला परिवार के द्वारा श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है जिसमें मोहतरा बलौदाबाजार वाले व्यासपीठ गति से महाराज जितेंद्र शर्मा जी के द्वारा अनवरत 28 जनवरी से भागवत कथा का रसपान कराया जा रहा है जिसमें गौकर्ण कथा,शिव विवाह, भरत चरित्र, राम जन्म,कृष्ण जन्म, सुदामा चरित्र, हिरण्याक्ष वध, प्रहलाद चरित्र, हिरण्यकश्यप वध, गोवर्धन पूजा, रुक्मणी विवाह के पश्चात आज छठे दिवस में परीक्षित की कथा का रसपान पंडित जितेंद्र शर्मा जी के द्वारा कराया जा रहा है जिसमें आज श्री शर्मा जी ने बताया की भागवत की कथा मोक्ष प्राप्ति हेतु होती है और ,,कृष्ण का नाम ही सार है बाकी सब बेकार है,,क्योंकि भागवत की कथा से यह मानुष तन जीवन मोक्ष प्राप्ति करती है और आत्मा से परमात्मा को मिलाने में भागवत कथा का महत्वपूर्ण कथा रहता है। कथा का रसपान कराते हुए जितेंद्र शर्मा जी ने बताया कि भगवान प्रेम के भूखे होते हैं और भगवान हमेशा भक्तों के हृदय में वास करते हैं और सुदामा,मीरा, सूरदास,प्रहलाद, गोपिया इसके उदाहरण है भगवान के नाम का उच्चारण कितने ही ऋषि मुनि संत महात्मा पुरुष भी अनवरत मंत्रोच्चारण यज्ञ,हवन, पूजन कई माध्यमों से करते हैं क्योंकि भगवान के नाम से ही दरिद्रता दूर हो जाती है मन से अहंकार दूर हो जाता है और सुखदेव महाराज जी राजा परीक्षित को भागवत कथा सुनाते हुए कहते हैं कि भगवान को पाने के लिए आत्मा के कल्याण के लिए परमात्मा से आत्मा को मिलाने के लिए तीन धारा की आवश्यकता होती है प्रारंभ विश्वास,मध्यम संबंध और अंतिम समर्पण है,कहने का तात्पर्य यह है कि विश्वासकम् फलम् दायक, भगवान को प्राप्त करने के लिए विश्वास का होना परम आवश्यक होता है और भगवान से संबंध स्थापित करने के लिए उनसे भक्ति पूर्ण आवरण का फायदा होना आवश्यक होता है उसी तरह से अंतिम आत्मसमर्पण की होती है अर्पण की होती है जिस प्रकार से हम मानव जीवन को प्राप्त किए हैं और 84 लाख योनि से पार करने के पश्चात यह मनुष्य का जीवन प्राप्त होता है तुलसीदास जी कहते हैं कि ,,बड़े भाग्य मानुष तन पावा,, कहने का तात्पर्य है कि यह मनुष्य का जीवन हमें बड़े ही भाग्य से मिलता है और इस मानव जीवन में हम जितने भी सुखी जीवन व्यतीत करते हुए परमात्मा की कृपा से ही होता है और भगवान के प्रति समर्पण की भावना तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा यह भाव हमेशा रहना चाहिए अगर यहां भाव हम हमेशा रखते हैं तो परमात्मा की आत्मा से मिलन अवश्य होती है और शरीर, मन, वचन,कर्म हम सभी को भगवान को अर्पण करते हैं तभी हमे भागवत कथा का रसपान का लाभ मिलता है। व्यासपीठ गद्दी से जितेंद्र शर्मा जी मोहतरा बलौदाबाजार वाले के साथ परायण कर्ता खिलावन प्रसाद तिवारी जी कथा आयोजक परिवार से श्रीमती अन्नपूर्णा शुक्ला, श्रीमती श्रुती विनय कुमार शुक्ला,श्रीमती सुषमा ऋषि शुक्ला, श्रीमती ईशा आशीष शुक्ला, श्रीमती शीतल आकाश शुक्ला के साथ निहारते पलक में श्रीमती लक्ष्मी चंद्रशेखर वाजपेई, श्रीमती नम्रता रविंद्र दुबे, श्रीमती वंदना आशुतोष अग्निहोत्री, कथा मधुभिलास आयोजक समिति में अभिषेक, श्रेयांश, रूद्र, अरनव, रुद्राक्ष, आर्य सभी सम्मिलित एवं उपस्थित रहे जिनके द्वारा श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह दिनांक 28 जनवरी से 5 फरवरी तक कराया जा रहा है जिसमें कथावाचक पंडित जितेंद्र शर्मा ने सभी को भागवत कथा सुनने की अपील की एवं भागवत कथा सुनने के पश्चात अपने जीवन में भगवान की कथा का मनोरम चित्र स्थापित करते हुए भगवान की कथा का अनुकरण करके दैनिक जीवन में निर्वाह करने हेतु बातें कहीं।


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