केसीजी जिले के किसान पटवारियों से है बेहद परेशान!

खैरागढ़ – छत्तीसगढ़ में भले ही शासन-प्रशासन से आमजनता के बीच की दूरी को कम करने व जनता की समस्याओं सहित विभिन्न कार्यो को सरलता बनाने के उद्देश्य से भले ही नवगठित जिले खैरागढ़-छुईखदान-गंडई का शुभारंभ हो गया है बावजूद इसके किसानों को कोई राहत मिलती हुई नही दिखाई दे रही है बता दें कि केसीजी जिले में पटवारियों को मानो लूट की पूरी छूट मिल गई हो की तर्ज में हर कार्यो के लिए किसानों से लंबी रकम वसूली जा रही है जिससे किसानों में राज्य सरकार के प्रति काफी आक्रोश देखा जा रहा है सूत्रों की माने तो पटवारी नामांकन  फौती बटवारा से लेकर किसानों से नक्शा बटांकन सहित हर कार्यो के लिए रूपये की डिमांड करते है पटवारी यही तक नही रुकते जब किसान अपने जमीन को विक्रय करते हैं तो पटवारी के पास चौहद्दी बनवाने जाते हैं तो भी कई पटवारी बिना रुपये के किसानों के जमीन के चौहद्दी को भी नही बनाते जिससे किसानों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ता है वही दूसरी ओर नक्शा कटवाने से लेकर प्रमाणीकरण में भी पटवारी मोटी रकम की मांग करते हैं तथा बिना घुस लिए ऋण पुस्तिका भी नही बनाते जिससे किसानों को बहुत ही परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पटवारियों को अन्य जिलों में भेजने की हो रही मांग- किसानों के द्वारा लंबे समय से अंचल में पदस्थ पटवारियों को अन्य जिलों में भेजने की मांग की जा रही है लेकिन राज्य सरकार के द्वारा न तो पटवारियों के घुस लेने पर कोई अंकुश लगाया गया है और न ही अभी तक दूसरे जिलों में भेजने की कोई तैयारी की है जिसके चलते पटवारियों के हौसले बुलंद हो गए हैं। पटवारी कहते हैं कहीं भी शिकायत कर दो हमे कुछ नहीं होने वाला-कई पटवारियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि उनको अधिकारियों का डर भी नहीं है जिसके चलते कोई किसान यदि पैसा नहीं देने या शिकायत करने की बात कहे तो पटवारी बिना डरे कह देते हैं कि जहां चाहे चले जाओ कही भी शिकायत कर दो हमे कुछ नहीं होने वाला है, जिससे यह बिल्कुल भी कहना लाजमी नही होता कि पटवारियों की सेटिंग उच्च अधिकारियों से साथ न रहती हो बल्कि अब तो यह खूब चर्चा होती रहती है कि पटवारियों को कोई डर ही नही है जिसके चलते उन्हें लूटने की पूरी छूट मिली है। ग्राम पंचायत स्तर में शिकायत समिति का होना चाहिए गठन- जिस तरह ग्राम पंचायतों में ग्राम पंचायत के कार्यो के लिए समिति का गठन होता है उसी प्रकार से पटवारी के कामकाज सहित नामांकन-बटवारा के लिए ग्राम पंचायत स्तर में निगरानी समिति गठन की मांग को यदि शासन स्तर से पूरी हो जाती है तो किसानों को सहूलियत हो सकती है साथ ही पटवारी के खिलाफ शिकायत होने पर पटवारी को बर्खास्त भी किया जाना चाहिए जिससे पटवारियों के द्वारा किये जा रहे अवैध उगाही पर लगाम लग सके।


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