शासकीय प्राथमिक शाला चंद्रनगर, विकासखंड कटघोरा हुआ जर्जर, छत एवं दीवारों में पड़ी दरारें, स्कूल के बाउंड्री वाल का कोई अता पता नहीं.

ग्राम वासियों के घरों में पत्थरों के टुकड़े आसमान से गिर रहे, कुसमुंडा खान प्रबंधन मामले पर मौन.

कोरबा(गंगा प्रकाश )। एशिया की सबसे बड़ी कुसमुंडा कोयला खदान में कोयला का उत्पादन निरंतर किया जा रहा है। जो कि देश के विकास में एक अहम ही भूमिका निभा रही है। एसईसीएल कुसमुंडा कोल खदान के अंतर्गत आने वाले आसपास क्षेत्र के ग्राम वासियों को रोजगार, बसाहट, पुनर्निवास देने में एसईसीएल कुसमुंडा अपनी विफलता का प्रमाण प्रस्तुत करते हुए ग्रामीणों की जायज मांगों को लगातार नजरअंदाज और दरकिनार करते हुए नजर आ रही है।

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इसी तारतम्य में आज देखा गया कि कुसमुंडा खदान से सटे हुए ग्राम वासियों ने आरोप लगाया है कि ग्राम चंद्रपुर ,पड़नीया, पाली अन्य जगहों पर कुसमुंडा कोल खदान के अंदर बारूद भरी हैवी ब्लास्टिंग किया जा रहा है जिससे ग्रामीणों का जीवन प्रभावित हो रहा है। ग्रामीण अपनी जान पर खेलकर ब्लास्टिंग वाले क्षेत्रों में रहने को मजबूर हैं। ब्लास्टिंग होने पर पत्थरों के टुकड़े आम लोगों के घरों और स्कूलो तथा रास्तों पर छिटक रहे हैं। जिससे किसी भी समय पर कोई बड़ी घटना होने के आसार है। लोगों के घरों की दीवारें धराशाई हो रही है। इसी प्रकार आज स्कूल का मुआयना किया गया तो देखा गया कि स्कूल की छत, छोटे–छोटे टुकड़ों में टूटकर जमीन पर गिर रही है। इसी प्रकार ग्राम जटराज के शासकीय स्कूल की दीवारों पर भी दरारें आ चुकी है। जबकि शासकीय स्कूल के बाउंड्रीवाल का घेराव जो किया गया था पूरी तरह से धराशाई हो चुकी है। स्कूली बच्चे स्कूल और स्कूल में बने मैदान में बाउंड्री वॉल नहीं होने पर सुरक्षित नहीं है। स्कूल में लाइट की सुविधा नहीं है, पानी की सुविधा नहीं है। स्कूली बच्चों के बैठने का टेबल एवं बेंच टूटे-फूटे व यह सुविधा लगभग नहीं के बराबर है। स्कूल में बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था है परंतु पीने हेतु पानी की सुविधा नहीं। ऐसे में बिना पानी के भोजन करना कैसे संभव है?

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शासकीय स्कूल के परिसर में एक हैंडपंप है परंतु वह भी खराब है। अब सवाल यह बनती है कि पानी की आपूर्ति कहां से और कैसे की जाती है? इसके साथ ही स्कूली बच्चों के लिए बनाई गई प्रसाधन का स्त्रोत भी किसी काम का नहीं। प्रसाधन रूम का दरवाजा ही नहीं है। प्रसाधन कमरे के आसपास में बड़े-बड़े घास उग आए हैं। प्रसाधन के लिए बच्चे इधर उधर जाते हैं। सभ्य समाज में स्कूली बच्चों को यह कैसी शिक्षा दी जा रही है, समझ से परे? शासकीय स्कूलों के लिए सरकार की तरफ से लाखों करोड़ों रुपए का आवंटन किया जाता रहा है परंतु यह रुपए आखिर किसके जेब में जाता है?

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कुसमुंडा खदान और शासकीय स्कूल जाटराज की दूरी

बता दें कि कुसमुंडा कोल खदान से 50 मीटर की दूरी पर ही ग्राम जटराज, के ग्रामीणों का निवास स्थल है। कुसमुंडा खदान के इतने करीब होने के बावजूद ग्रामीण ब्लास्टिंग वाले क्षेत्र में निवास करने को लेकर मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि एसईसीएल कुसमुंडा नौकरी देने के नाम पर आश्वासन देते हुए एसईसीएल कुसमुंडा प्रबंधन के द्वारा पूर्व में भी छल कपट, धोखाधड़ी करते हुए ग्रामीणों की जमीनो को अधिग्रहित की गई, बदले में किसानों को किसी भी प्रकार की राहत नहीं दी गई। समय के साथ जागरूक होने पर किसान अब 1 इंच भी अपना जमीन एसईसीएल कुसमुंडा को देना नहीं चाहती। जब तक उन्हें रोजगार, बसाहट, पुनर्वास नही मिल जाती।

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बता दें कि डेढ़ सौ मीटर की दूरी पर ग्राम जटराज, शासकीय स्कूल स्थित है। खदान के निकट ही यह स्कूल स्थित है। ब्लास्टिंग होने पर स्कूल की खिड़कियां और दरवाजे तीव्र गति से कंपन होता है। खदान में ब्लास्टिंग होने पर स्कूली बच्चे डरे एवं सहमे हुए रहते हैं। रिपोर्टिंग करने के दौरान लगभग 8 से 10 हैवी ब्लास्टिंग कुसमुंडा खदान में की गई जिससे कि पूरे ग्राम के जमीन , घरों के खिड़की व दरवाजे हिल गई। बार-बार लगातार ब्लास्टिंग होने से घर की छतें एवं दीवारें धराशाई होने का डर लोगों में बना हुआ रहता है। परंतु ग्रामीणों की समस्याओं को अनदेखा करते हुए कुसुंडा खान प्रबंधन के द्वारा इस मामले को अनदेखा एवं लापरवाही बरतते हुए ग्रामीणों के बसाहट, पुनर्वास, मुआवजा संबंधित मामले पर कोई निराकरण नहीं किया जा रहा है एक प्रकार से ग्रामीणों के साथ शोषण किया जा रहा है। किससे नाराज होकर अब ग्रामीण किसी भी हालत में अपना जमीन एसईसीएल कुसमुंडा को देना नहीं चाहती। अगर इसी बीच हैवी ब्लास्टिंग होने के पश्चात अगर किसी भी प्रकार की कोई ग्रामीणों के साथ घटना घटित होती है तो संपूर्ण जिम्मेदारी व जवाबदारी आखिर किसकी होगी?

लगातार जल का स्तर कम हो रही आखिर क्यों?

ग्राम पाली, पड़निया, जटराज अन्य ग्राम कुसमुंडा खदान के करीब होने के कारण इस स्थल का जल खदानों में प्रवेश कर रही हैं। जल का संकट ग्रामों में हो रही है। जिससे कि ग्राम वासियों के साथ-साथ पशु पक्षी भी प्रभावित हो रहे हैं। गर्मियों के दिनों में यहां पानी का संकट देखा जा सकता है। प्रभावित ग्रामों में कुसमुंडा खदान प्रबंधन के द्वारा शुद्ध पेयजल की आपूर्ति को लेकर अक्सर लापरवाही बरती गई है जिसकी प्रमाण आज शासकीय स्कूल में प्रस्तुत की गई है।

चौबीसों घंटे आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण से प्रभावित ग्रामीण

हैवी ब्लास्टिंग तथा कोयला उत्पादन को लेकर तीव्र गति से जमीनों की खुदाई की जा रही है जिससे कि लगातार प्रदूषण बढ़ रहे हैं एवं आसपास के क्षेत्र प्रदूषण से प्रभावित हो रहे हैं जिससे कि आम लोगों तथा जीव जंतु के स्वास्थ्य पर गंभीर बीमारियां पनप रही है इसकी रोकथाम के लिए किसी भी प्रकार की कोई व्यवस्था कुसमुंडा खान प्रबंधन के द्वारा नहीं की गई है। खदानों के मुख्य रास्तों में पानी का छिड़काव समय पर नहीं की जाती जिससे कि शुद्ध वातावरण एवं शुद्ध वायु में प्रदूषित धूल,डस्ट एवं कण घुलमिल जाते हैं। जिससे कि आसपास के क्षेत्र अत्यधिक मात्रा में वायु प्रदूषित हो रही है क्षेत्र के साथ-साथ समूचे कोरबा जिला वायु प्रदूषण से प्रभावित है। क्योंकि कुसमुंडा खदान ही नहीं गेवरा, दीपका,मानिकपुर, राजगामार अन्य खदानें तथा पावर हाउस, बालको प्लांट, एसीबी प्लांट अन्य प्लांटों के चीमनियों से निकलने वाले रासायनिक,कार्बनिक जहरीले पदार्थ को बिना फिल्टर किए चिमनियों से निकलते हुए उनके धुए, डस्ट एवम् कण से वायु एवं पर्यावरण को प्रदूषित करने में अहम भूमिका निभा रही है तथा जिला कोरबा में प्रदूषण निरंतर जारी है।

शासकीय स्कूल, आंगनबाड़ी और समुदायिक भवन में भ्रष्टाचार

ग्राम जटराज के शासकीय स्कूल, आंगनबाड़ी और सामुदायिक भवन सिर्फ नाम की रह गई है। आंगनबाड़ी में एक ठेले का सामान रखा जाता है। आंगनबाड़ी को एक ठेले वाला चला रहा है। भजिया, समोसा अन्य सामग्री बेचने को लेकर ठेले का सामान आंगनबाड़ी में ही रखा जा रहा है। बच्चों की स्वास्थ्य सुविधाएं एवं प्राथमिक शिक्षा, उपचार के लिए आंगनबाड़ी खोली गई है दूर-दूर तक आंगनबाड़ी के कार्यकर्ताओं की कोई दर्शन नहीं हुई। परंतु दुर्भाग्य की बात है कि इस आंगनबाड़ी के दरवाजे पर ताला लटकती हुई देखी गई इसी प्रकार आंगनबाड़ी पूरी तरीके से जर्जर हो चुकी है साफ-सफाई का ध्यान बिल्कुल ही नहीं है। आंगनबाड़ी को बाहर से देखने पर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि वह पूरी तरीके से खंडहर में तब्दील हो गई है।

इसी प्रकार सामुदायिक भवन का भी जायजा लिया गया तो देखा गया कि समुदायिक भवन निर्माण को लेकर भवन तो बनाई गई परंतु यह स्थल में गाय एवं भैंसों के अवशेष गोबर से भरा हुआ है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जानवरों के लिए सामुदायिक भवन बनाई गई है इतनी बड़ी मात्रा में आखिर किसके द्वारा भ्रष्टाचार किया जा रहा है? अब यह खबर लिखे जाने पर इस मामले को लेकर कोरबा जिला प्रशासन, संबंधित जिम्मेदार दोषियों के ऊपर क्या कार्रवाई करती देखने वाली बात होगी।

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