अरविन्द तिवारी
नई दिल्ली (गंगा प्रकाश) – मोदी सरकार ने आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों के लिये एक नया आदेश जारी किया है। इस आदेश के मुताबिक यदि इन अधिकारियों का कुल निवेश , स्टॉक , शेयर या किसी अन्य इन्वेस्टमेंट में एक कैलेंडर इयर के दौरान छह महीने की बेसिक सैलरी से ज्यादा हो जाता है तो उन्हें इसकी डिटेल देनी होगी। ये जानकारी एआईएस यानि अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 के नियम 16 (4) के तहत उनके द्वारा शेयर की जाने वाली समान जानकारी से अलग है। इस संबंध में कार्मिक मंत्रालय ने निर्देश जारी किये हैं। ये नियम ऑल इंडिया सर्विसेज यानि आईएएस , आईपीएस और आईएफएस से जुड़े कर्मचारियों के लिये लागू होंगे। सरकार के इस फैसले से साफ जाहिर होता है कि वे आईएएस , आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों के शेयर बाजार निवेश पर नजर रखना चाहती है। ये आदेश केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों के सचिवों को जारी किया गया है। अभी तक आईएएस , आईपीएस , आईएफएस अधिकारियों से उनके निवेश के बारे में जानकारी प्राप्त करने का कोई तरीका नहीं था। हाल के समय में केंद्र के पास कई रिपोर्ट आ रही थीं , जिसमें लाल बत्ती में चलने वाले अधिकारियों का शेयर बाजार में एक्सपोजर के संकेत मिल रहे थे। अब सरकार ने खुद ही अधिकारियों से पूछा है कि वे अपने निवेश के बारे में उसे सूचित करें। यहां पर सरकार ने छह महीने के बेसिक वेतन की भी शर्त लागू की है। ये नियम ऑल इंडिया सर्विस- इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (आईएएस) , इंडियन पुलिस सर्विस (आईपीएस) और इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (आईएफएस) अधिकारियों पर लागू होंगे। मंत्रालय ने 20 मार्च के आदेश में कहा कि शेयर , सिक्योरिटी , डिबेंचर आदि को इस नियम 16(4) के तहत चल संपत्ति माना जाता है , ऐसे में अगर ट्रांजेक्शन अधिकारी के दो महीने के मूल वेतन से अधिक होता है तो ऐसी स्थिति में इस बारे में अथॉरिटी को सूचित करना जरूरी होगा। कार्मिक मंत्रालय की ओर से जारी आदेश में लिखा गया है , ‘अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्यों के संबंध में किसी भी स्टॉक , शेयर या अन्य निवेश आदि में लेन-देन पर नजर रखने के लिये प्रशासनिक अधिकारियों को सक्षम करने की दृष्टि से, यह निर्णय लिया गया है।’ सभी केंद्र सरकार के सचिवों को जारी आदेश में कहा गया है कि स्टॉक , शेयर या अन्य निवेश आदि में कुल लेन देन एक वर्ष के दौरान सरकारी कर्मचारी के छह महीने के मूल वेतन से अधिक होने पर प्रत्येक वर्ष निर्धारित प्राधिकारी को संलग्न प्रोफार्मा में जानकारी दें। इसमें आचरण नियमों के नियम 14 (1) का उल्लेख किया गया है , जो कहता है कि “सेवा का कोई भी सदस्य किसी स्टॉक , शेयर या अन्य निवेशों में सट्टा नहीं लगायेगा , लेकिन यह प्रावधान स्टॉक-दलालों या अन्य अधिकृत व्यक्तियों के माध्यम से किये गये सामयिक निवेश पर लागू नहीं होगा।’
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