रायपुर(गंगा प्रकाश)। कोयला लेवी घोटाले में ईडी की टीम ने आज लगातार चौथे दिन लगभग तीन घंटे तक आईएएस रानू साहू और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव सौम्या चौरसिया से पूछताछ की,दोनों आरोपी रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं।बता दें कि विशेष अदालत के न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने एक जनवरी को कोयला घोटाले की सुनवाई के दौरान ईडी को 10 से 16 जनवरी तक जेल में जाकर आरोपियों से पूछताछ की अनुमति प्रदान की थी,इसके बाद ईडी शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन आरोपियों से पूछताछ की,यह पूछताछ 16 जनवरी तक जारी रहेगी।छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय ने 540 करोड़ रुपए के कथित कोयला घोटाले का खुलासा किया था। इसके बाद 21 जुलाई 2023 को रानू साहू के देवेंद्र नगर स्थित सरकारी घर पर ED ने छापा भी मारा था,इस दौरान करीब चौबीस घंटे की जांच के बाद ED ने 22 जुलाई की सुबह IAS रानू साहू को गिरफ्तार कर लिया था,इस घटनाक्रम के बाद राज्य सरकार ने उन्हें पद से निलंबित कर दिया था।

छत्तीसगढ़ कोल स्कैम में बड़ा खुलासा, IAS रानू साहू, सौम्या चौरसिया ने पूछताछ में खोले राज

ईडी आरोपियों से रोजाना 3 से 4 घंटे पूछताछ की जा रही है। ईडी इस स्कैम में नेताओं का कनेक्शन और इन्वॉल्वमेंट होने की संभावना जता रही है। ईडी कोल स्कैम केस में बड़े चेहरों की भी एंट्री हो सकती है,भिलाई विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व विधायक चंद्रदेव राय, कांग्रेस नेता आरपी सिंह,विनोद तिवारी, रामगोपाल अग्रवाल को आरोपी बनाया गया है।बता दें कि देवेंद्र यादव की और से विशेष अदालत में अग्रिम जमानत याचिका लगाई गई थी।

कोयला घोटाले में ये हैं आरोपी

इनमें निलंबित IAS समीर विश्नोई, कारोबारी सूर्यकांत तिवारी, सुनील अग्रवाल, शिवशंकर नाग, लक्ष्मीकांत तिवारी और दीपक टांक समेत राजेश चौधरी शामिल हैं।
राज्य प्रशासनिक सेवा की निलंबित अधिकारी सौम्या चौरसिया ने मेडिकल लगाकर कोर्ट आने में असमर्थता जताई।
कोयला घोटाले मामले में  संस्पेंड आईएएस समीर विश्नोई, कारोबारी सूर्यकांत तिवारी, सुनील अग्रवाल, शिवशंकर नाग, लक्ष्मीकांत तिवारी, दीपक टांक समेत राजेश चौधरी पर आरोप हैं। इसके अलावा सस्पेंड अधिकारी सौम्या चौरसिया कोर्ट नहीं आई। कोर्ट न आने की वजह उन्होंने मेडीकल कंडीशन बताई।

कोयला घोटाले में 10 आरोपी जेल में

बता दें कि कोयला घोटाले में 10 आरोपी जेल में हैं। ईडी के वकील ने कहा फिलहाल हमें 220 करोड़ के घोटाले का पता चला है।
वैसे तो घोटाला 540 करोड़ का है। आगे की छानबीन के लिए हमने कोर्ट में अर्जी दी है ताकि हमें परमिशन मिल सके।

25 रुपये से 540 करोड़ की उगाही… छत्तीसगढ़ के कोयला लेवी घोटाले की पूरी कहानी

बताते चलें कि खदान से कोयला उठाना है, उसके लिए डीएम से एनओसी लेनी होगी, लेकिन उसके पहले हमें हर एक टन कोयले पर 25 रुपये चुका दीजिए,इस तरह से ट्रांसपोर्टर्स और कारोबारियों से जबरन वसूली की गई हर दिन दो से तीन करोड़ कमाए ये पैसा राजनेताओं, नौकरशाहों और कारोबारियों में बांटा गया।बस इतनी सी कहानी है छत्तीसगढ़ के कथित कोयला लेवी घोटाले की।इस सिलसिले में  प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने ताबड़तोड़ छापे मारे हैं ये छापे कांग्रेस के कई नेताओं के ठिकानों पर की गई थी ईडी ने जिनके यहां छापेमारी की, उनमें प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल और कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव समेत कई बड़े नेताओं के नाम शामिल हैं।छत्तीसगढ़ के कोयला लेवी घोटाले का मास्टरमाइंड कारोबारी सूर्यकांत तिवारी है। इस मामले में ईडी ने अब तक सूर्यकांत तिवारी, उसके चाचा लक्ष्मीकांत तिवारी, आईएएस अफसर समीर विश्नोई और कोयला कारोबारी सुनील अग्रवाल समेत 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। ऐसे में ये जानना जरूरी है कि छत्तीसगढ़ का ये पूरा घोटाला क्या है? कैसे 25 रुपये से 540 करोड़ रुपये की उगाही कर ली गई?

क्या है पूरा मामला?

– इसकी कहानी शुरू होती है 15 जुलाई 2020 से,राज्य के भूविज्ञान और खनन विभाग ने खदानों से कोयले के ट्रांसपोर्ट के लिए ई-परमिट की ऑनलाइन प्रक्रिया को संशोधित किया।

– इस नियम से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट यानी एनओसी जारी करना जरूरी हो गया,लेकिन ईडी का दावा है कि इसके लिए कोई एसओपी या प्रक्रिया जारी नहीं की गई।

– एक माइनिंग कंपनी खरीदार के पक्ष में कोल डिलीवरी ऑर्डर (CDO) जारी करती है, जिसे तब कंपनी के पास 500 रुपये प्रति मीट्रिक टन के हिसाब से बयाना राशि यानी EMD जमा करनी होती है और 45 दिनों के भीतर कोयला उठाना पड़ता है।

– ईडी का दावा है कि नए नोटिफिकेशन ने कथित तौर पर माइनिंग कंपनियों को ट्रांसमिट परमिट के लिए एनओसी लेने के लिए सरकार के पास आवेदन करने को मजबूर कर दिया।

– बगैर एनओसी के परमिट जारी नहीं किया जाता और CDO भी एक्जीक्यूट नहीं होती है।45 दिन के बाद CDO खत्म हो जाएगी और खरीदार की EMD को भी जब्त कर लिया जाएगा।

– ED की जांच में सामने आया कि माइनिंग डिपार्टमेंट की डॉक्यूमेंट प्रोसेस सही नहीं थी. कई जगहों पर सिग्नेचर नहीं थे,नोट शीट नहीं थी,कलेक्टर या डीएमओ की मनमर्जी पर नाममात्र की जांच करवाकर एनओसी जारी कर दी जाती थी।

– ईडी के मुताबिक, 15 जुलाई 2022 के बाद बगैर किसी एसओपी के 30 हजार से ज्यादा एनओसी जारी कर दी गईं। इन और आउट का रजिस्टर भी मेंटेन नहीं किया गया।अफसरों की भूमिका भी साफ नहीं थी,ट्रांसपोर्टर का नाम, कंपनी का नाम भी नहीं था।

– ईडी के मुताबिक, इस पूरे कार्टल को सूर्यकांत तिवारी चलाता था,उसने सीनियर अफसरों की मदद से उगाही का एक नेटवर्क तैयार किया था।

– इसमें हर खरीदार या ट्रांसपोर्ट को डीएम ऑफिस से एनओसी लेने से पहले 25 रुपये प्रति टन के हिसाब से चुकाना पड़ता था।

– इसके लिए उन्होंने कुछ आदमियों को रखा जो इस पैसे को इकट्ठा करते थे,बाद में इन पैसों को किंगपिन, वर्करों, सीनियर आईएएस-आईपीएस अफसरों और राजनेताओं में बांट दिया जाता था।

– ईडी का अनुमान है कि ऐसा करके हर दिन दो से तीन करोड़ रुपये की उगाही की गई, इस मामले में ईडी ने सूर्यकांत तिवारी के चाचा लक्ष्मीकांत तिवारी को गिरफ्तार किया था,लक्ष्मीकांत तिवारी ने कबूल किया है वो हर दिन 1-2 करोड़ रुपये की उगाही करता था।

– ईडी के मुताबिक, इस पूरे खेल में कम से कम 540 करोड़ रुपये की जबरन वसूली की गई।इस मामले में जनवरी 2023 तक ईडी ने आरोपियों की 170 करोड़ की संपत्ति जब्त कर ली थी।

हर चीज का रखा जाता था हिसाब-किताब

– ईडी ने बताया की सूर्यकांत तिवारी ने कोयला ट्रांसपोर्टर्स और कारोबारियों से जबरन पैसे ऐंठने के लिए जमीनी स्तर पर अपनी टीम बना रखी थी।

– उसकी ये टीम निचले स्तर के सरकारी अफसरों और ट्रांसपोर्टर्स और कारोबारियों के बीच को-ऑर्डिनेट किया करती थी।

– चूंकि, उसकी ये टीम पूरे राज्य में फैली थी, इसलिए उन्होंने वॉट्सऐप ग्रुप बना रखे थे,कोल डिलीवरी के ऑर्डर और जबरन वसूली की रकम को एक्सेल शीट में रखा जाता था। इसे सूर्यकांत तिवारी के साथ साझा किया जाता था।

– ईडी का मानना है कि दो साल में 500 करोड़ रुपये से ज्यादा की जबरन वसूली की गई, इसलिए माना जा सकता है कि इसके पीछे उन लोगों का हाथ रहा होगा, जिनके पास राज्य की मशीनरी को कंट्रोल करने की ताकत थी।

क्या हुआ इस पैसे का?

– ईडी के मुताबिक, सूर्यकांत तिवारी के पास से एक डायरी भी मिली है। इस डायरी में उसने लिखा है कि वो कितना पैसा किसे देता था।

– इस डायरी में लिखा है जबरन वसूली से आए 540 करोड़ में से 170 करोड़ रुपयी की बेनामी संपत्ति खरीदी गई।बेनामी संपत्ति यानी किसी दूसरे नाम से संपत्ति खरीदी गई।

– 52 करोड़ रुपये राजनेताओं को दिए गए। 4 करोड़ रुपये छत्तीसगढ़ के विधायकों को दिए गए, 6 करोड़ रुपये पूर्व विधायकों में बांटे गए, इसके अलावा 36 करोड़ रुपये अफसरों में बंटे।

ED ने किन-किनको आरोपी बनाया?

– सूर्यकांत तिवारीः इसे ही पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड माना जा रहा है।जबरन वसूली के लिए इसी ने नेटवर्क तैयार किया था।

– सौम्या चौरसियाः छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की डिप्टी सेक्रेटरी, इनकी साढ़े 7 करोड़ से ज्यादा की बेनामी संपत्ति जब्त हो चुकी है।

– लक्ष्मीकांत तिवारीः सूर्यकांत तिवारी के चाचा ने कबूला है कि हर दिन 1-2 करोड़ की उगाही करते थे। सूर्यकांत तिवारी के भाई रजनीकांत तिवारी और मां कैलाश तिवारी भी आरोपी हैं।

– समीर विश्नोईः 2009 बैच के आईएएस अफसर हैं।समीर और उनकी पत्नी के पास 47 लाख कैश और 4 किलो सोने की जवाहरात मिले थे।

– सुनील अग्रवालः इंद्रमाणी ग्रुप के मालिक,कोयला कारोबारी हैं।ईडी के मुताबिक, सूर्यकांत तिवारी के बड़े कारोबारी दोस्त हैं।

इन सबके अलावा माइनिंग अफसर शिव शंकर नाग, संदीप कुमार नायक और राजेश चौधरी भी आरोपी हैं।लक्ष्मीकांत तिवारी के रिश्तेदार मनीष उपाध्याय को भी आरोपी बनाया गया है।

अगले कदम का इंतजार

ईडी की कार्रवाई का इंतजार सभी कांग्रेस के वरिष्ठ और असंतुष नेतागण कर रहे ताकि आगे की रणनीति के अनुसार ईडी की कार्रवाई के उपरांत कांग्रेस में बड़े उठापटक और मुखालफत सामने आने की बात बताई जा रही है । ईडी की  कार्रवाई सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल को भारत लाते ही ताबड़तोड़ होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।असंतुष्ट नेता के बयान के अनुसार तत्कालीन पूर्व कांग्रेस सरकार के बड़े पदाधिकारी, पूर्व एमएलए वर्तमान एमएलए और भूपेश के सरकार में रहे बड़े पदाधिकारी सभी लोगों को ईडी गिरफ्तार कर सकती है। जमीन कारोबी सहित राइस मिल के मालिक को भी गिरफ्तार किया जा सकता है।

डायरी में मिले नामों का कर सकती है खुलासा

जानकारी अनुसार ईडी की डायरी जिसमें सभी नेताओं के नाम और दिल्ली के बड़े नेताओं के नाम बड़ी-बड़ी रकम का लेनदेन हुआ है इसका खुलासा भी ईडी कर सकती है सूत्रों के अनुसार ईडी ने इस डायरी के अनुसार लगातार सभी जगह छापेमारी की है। अब इस डायरी के पन्ने से राज खुलते ही सभी कांग्रेस के बड़े नेता जिनका नाम उस डायरी में शामिल है वह सभी नेताओं पर ईडी ने उचित कानूनी कार्रवाई करने का मन बना लिया है । वैसे भी ईडी की डायरी खुलने और कार्रवाई का इंतजार सभी को हो रहा है उसके बाद ही कांग्रेस में कुछ परिवर्तन की बातें की जा सकती है ऐसा जानकरों का कहना है। प्रदेश के वर्तमान पदाधिकारी भी ईडी के रडार पर हैं।

कारोबारी सुनील अग्रवाल  को वीआईपी सुविधा दे रहे जेल अधिकारी: ईडी

कोयला घोटाले में जेल बंद कारोबारी सुनील अग्रवाल व अन्य को सेंट्रल जेल से हटाकर दूसरे जेल में शिफ्ट करने की मांग ईडी ने कोर्ट से की है। ईडी का आरोप है कि जेल और अस्पताल के अधिकारियों की मिलीभगत से उन्हें जेल और अस्पताल में कई तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई। इलाज के दौरान उन्हें वीआईपी ट्रीटमेंट दिया गया। ईडी के पास कई तस्वीरें ऐसी हैं जिनके आधार पर दावा किया गया है कि अस्पतालों में इन्हें सामान्य कैदी की तरह जनरल वार्ड में नहीं बल्कि प्राइवेट रूम में रखा गया। इस रूम में एसी-टीवी सबकुछ उपलब्ध कराया गया। ईडी के पास जिन डॉक्टरों का बयान है कि उसके अनुसार दोनों ने कई बार अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान ट्रीटमेंट लेने से भी मना कर दिया था। इससे साफ है कि दोनों केवल सुविधाओं का फायदा लेने अस्पताल पहुंचे थे। ईडी ने कोर्ट में जो आवेदन दिया है उसके अनुसार सुनील अग्रवाल ने स्वास्थ्यगत कारणों का हवाला देकर दिसंबर 2022 से जुलाई 2023 के बीच 170 दिन अस्पताल में गुजारे। एक आरोपी फरवरी 2023 से जुलाई 2023 के बीच करीब 1 महीने तक अस्पताल में रहा। सुनील अग्रवाल ने मेडिशाइन अस्पताल के यूरोलॉजी डिपार्टमेंट में तीन महीने से ज्यादा का वक्त गुजारा है। इसी तरह वह डीकेएस अस्पताल के नेफ्रोलॉजी डिपार्टमेंट में 28 दिन तक भर्ती रहा।


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