Brekings: गंदगी के दलदल में डूबा फुलझर! छुरा विकासखंड का यह गांव बना संक्रमण का केंद्र, पंचायत बेपरवाह

 

छुरा/गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। गंदगी के दलदल में डूबा फुलझर!छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के छुरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत फुलझर की हालत इन दिनों इतनी बदहाल है कि गांव के लोग इसे “बीमारियों की नर्सरी” कहने लगे हैं। वार्ड क्रमांक 5 और 6 में नालियों की सफाई महीनों से नहीं हुई है। जगह-जगह कचरे के ढेर, सड़कों पर कीचड़, बहता गंदा पानी और बिजली के ट्रांसफार्मर के पास जलजमाव—गांव के हालात चीख-चीख कर प्रशासन की लापरवाही बयां कर रहे हैं।

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गंदगी के दलदल, कीचड़ की गलियां, और मच्छरों का आतंक

गांव के निवासी योगेश्वर साहू बताते हैं कि स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि बरसात शुरू होते ही गलियों में चलना मुश्किल हो गया है। नालियों की सफाई नहीं होने के कारण गंदा पानी बाहर आकर सड़कों पर बह रहा है, जिससे पूरे गांव में बदबू फैल रही है। गलियों में कीचड़ और फिसलन के कारण बच्चों और बुजुर्गों के लिए बाहर निकलना किसी जोखिम से कम नहीं है।

“लोग खुद अपने घर का कचरा नालियों में डाल रहे हैं,” साहू ने बताया। “यहां तक कि पढ़े-लिखे परिवारों की महिलाएं भी जागरूक नहीं हैं। सफाई का जिम्मा पंचायत का है, लेकिन वो भी आंख मूंदे बैठी है।”

न सोकपिट, न निकासी व्यवस्था: सीधे गलियों में छोड़ा जा रहा नल का पानी

गांव के कई घरों में नल का पानी या नहाने-धोने का पानी सीधे गलियों में छोड़ा जा रहा है। कारण साफ है—अधिकांश घरों में सोकपिट का निर्माण नहीं किया गया है। इससे गलियों में लगातार नमी बनी रहती है और गंदगी पनपती रहती है। गंदगी में मच्छरों का पैदा होना अब आम बात हो चुकी है, जिससे मलेरिया, डेंगू और त्वचा संबंधी बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।

बिजली का ट्रांसफार्मर बना मौत का जाल

फुलझर गांव की गली में स्थित बिजली का ट्रांसफार्मर, जहां रोज बच्चे खेलते हैं और ग्रामीण गुजरते हैं, अब खतरे का केंद्र बन चुका है। बरसात के पानी के साथ नालियों की गंदगी ट्रांसफार्मर के आसपास इकट्ठी हो रही है। इससे करंट फैलने या शॉर्ट सर्किट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

ग्रामीणों ने बताया कि पहले भी एक बार एक दुर्घटना हो चुकी है, जिससे गांव में दहशत फैल गई थी।

अब लोग मांग कर रहे हैं कि ट्रांसफार्मर और मेन लाइन को गली से बाहर स्थानांतरित किया जाए, ताकि आने वाले समय में कोई बड़ा हादसा न हो।

जल निकासी की दिशा बदली, नई मुसीबत खड़ी

गांव की जलनिकासी व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। मौली पारा की ओर जाने वाले बारिश के पानी को बावा पारा की ओर मोड़ दिया गया है, जिससे बावा पारा की गलियों में जलभराव और गंदगी की समस्या और बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह निर्णय बिना किसी तकनीकी सलाह या सर्वे के लिया गया, जिससे एक समस्या के समाधान के चक्कर में दूसरी समस्या पैदा हो गई है।

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पंचायत की सफाई—’जून लगते ही करेंगे सफाई’

जब इस विषय में ग्राम पंचायत फुलझर के सरपंच संतोष कंवर से बात की गई, तो उन्होंने संक्षिप्त उत्तर देते हुए कहा, “जून लगते ही नालियों की सफाई करा देंगे।” लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यह जवाब वह हर बार बरसात से पहले सुनते हैं, और सफाई का काम तब तक नहीं होता जब तक हालात बेकाबू न हो जाएं।

प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग

ग्रामीणों ने अब जिला प्रशासन से अपील की है कि ग्राम पंचायत की निष्क्रियता की जांच हो और त्वरित कार्यवाही कर नालियों की सफाई, ट्रांसफार्मर स्थानांतरण और जल निकासी की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द कदम नहीं उठाए गए, तो गांव में स्वास्थ्य संकट और जान-माल की हानि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

निष्कर्ष:

फुलझर गांव की यह स्थिति न केवल पंचायत की विफलता का प्रतीक है, बल्कि यह भी दिखाती है कि ग्राम विकास केवल कागज़ी योजना से नहीं, ज़मीनी क्रियान्वयन से होता है। जब तक प्रशासन और पंचायतें संवेदनशील नहीं बनेंगी, तब तक फुलझर जैसे गांव गंदगी, बीमारी और हादसों के दलदल में डूबे ही रहेंगे।


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