महासमुंद(गंगा प्रकाश)। छत्तीसगढ़ के अधिकांश जिलों में प्राकृतिक संसाधनों को गिद्ध की तरह नोचने वाले माफिया अपने सियासी रसूख की बदौलत खुलेआम नदियों का सीना चीर कर रेत का अंधाधुंध अवैध खनन करते रहते हैं।सवाल उठता है कि आखिर छत्तीसगढ़ में कब तक चलता रहेगा अवैध रेत उत्खनन व परिवहन का कार्य? कब तक सत्ता पक्ष व विपक्ष के लोग गुंडागर्दी,दादागिरी,मारपीट,खौफ व प्रभाव का इस्तेमाल कर रेत और गौण खनिज का उत्खनन अवैध तरीके से करते रहेंगे। दिनरात चैन माउंटेन(पुकलेण्ड)से रेत की अवैध खुदाई कर सैकड़ों ट्रीप परिवहन हो रहा है।जिससे राजस्व को एक बड़ी हानि हो रही हैं तो वंही एनजीटी के सारे नियमो और सारे कानून कायदा को सरेआम ठेंगा दिखाते हुए चैन माउंटेन मशीन से  नदीयों का सीना छलनी किया जा रहा है और जिम्मेदार मौन साधे हुए है।  दिनदहाड़े कानून की धज्जियां उड़ाते हुए हो रहे रेत के अवैध कारोबार में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों,ओहदे पदो पर बैठे जिम्मेदारों सहित छुटभैयए और चुरकुट नेताओं का नाम सामने आ रहा है।जिसके वजह से प्रशासन अपना रोना रोने में लगे है।महासमुंद में हो रहे रेत के गोरखधंधे का तार रायपुर के ओहदेदार पदो पर बिराजमान जिम्मेदार से जुड़ने का खबर सामने आ रहीं हैं जो कि अवैध रेत खनन पर खनन माफियाओं को जिला प्रशासन की खुली छूट मिली हुई है।नतीजन सरकार को लाखो रुपए का राजस्व का चूना लगाया जा रहा है।गौरतलब है कि शासन द्वारा अवैध रेत खनन रोकने तरह-तरह के नियम बनाकर प्रशासन को लगातार निर्देश दे रहे है।तो दूसरी ओर महासमुंद जिले में जिला प्रशासन कि नाक के नीचे खुलेआम नियमों को ताक में रखकर नदीयों में रेत खनन का अवैध कारोबार खूब फल फूल रहा है।इस पूरे मामले में जिम्मेदार की संलिप्तता,तगड़ी सेटिंग और माफियाओं को खुला संरक्षण साफ तौर पर नजर आ रहा है।जिसके कारण बेरोकटोक रेत की अवैध खुदाई और परिवहन लगातार जारी है।कभी कभार दिखावे की कार्यवाही कर जिम्मेदार अपना पल्ला झाड़ लेते है।खनन माफिया की पहुंच और पैसों के दम पर सारे नियम और कानून कायदों को जेब में रख लिए है।जिसे प्रशासन भी रोकने में बेबस नजर आ रहे है।जिसके कारण खनन माफिया की दबंगई खुलकर सामने आ रहा है। अवैध रेत खुदाई में खनन माफियाओं को संरक्षण के चलते इनके हौसला इतना बुलंद है कि इसे किसी भी कानून का डर नहीं है।जिसके कारण बेधड़क चैन माउंटेन से रेत खुदाई कर कानून के विपरीत कार्य कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने में भी कोई गुरेज नहीं कर रहे है।बताना लाजमी होगा कि छत्तीसगढ़ के महामसुंद जिले में खनिज विभाग ने कोयला, गिट्टी व रेत का अवैध परिवहन करने वाले 23 वाहनों पर कार्रवाई कर जुर्माने किए जा रहे हैं। बिरकोनी, घोडारी, तुमगांव, पिथौरा क्षेत्र में अवैध परिवहन करने वाले वाहनों पर कार्रवाई की है।उल्लेखनीय है कि अवैध रूप से परिवहन किए जा रहे वाहनों के खिलाफ खान एवं खनिज विकास एवं विनियम अधिनियम 1957 की धारा 21 के तहत एवं छत्तीसगढ़ गौण खनिज अधिनियम 2015 के तहत सभी वाहनों पर जुर्माना किया जा रहा है। यह सभी वाहने महासमुंद जिले के बाहर के बताए जा रहे हैं। वाहनों के मालिकों के बारे में खनिज विभाग अभी जानकारी जुटाने में लगी है।विभाग के अधिकारियों से मिली जानकारी अनुसार कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। ये सभी वाहन अवैध रुप से बिना लिगल कागजात के खनिजों का परिवहन कर रहे थे। बिरकोनी, घोड़ारी, पिथौरा तुमगांव क्षेत्र से खनिज लेकर गुजरने वाले वाहनों की चेकिंग के दौरान 23 वाहनों पर माइनिंग एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।

नायब तहसीलदार ने दी दबिश, रेत के अवैध भंडारण पर हुई जब्ती की कार्रवाई


वही दूसरी तरफ दुर्ग कलेक्टर पुष्पेन्द्र कुमार मीणा के निर्देशानुसार राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से रेत के भंडारण पर जब्ती की कार्रवाई की गई है ज्ञात हो कि यहा करवाही जनदर्शन कार्यक्रम में रेत के अवैध भंडारण संबंधी शिकायत प्राप्त होने के बाद हुई है। जिस पर एसडीएम धमधा विपिन सोनी के मार्गदर्शन में नायब तहसीलदार बोरी द्वारा ग्राम सेवती तहसील बोरी में अवैध रूप से भंडारण की गई रेत को जब्त कर संरपंच के सुपुर्द किया है। उन्होंने खनिज निरीक्षक दुर्ग, ग्राम के सरपंच, कोटवार व ग्रामीणों की उपस्थिति में प्रकरण दर्ज कर अग्रिम कार्रवाई करते हुए जब्त की गई रेत को सरपंच के सुपुर्द किया गया है।

कलेक्टर के निर्देश के बाद भी नहीं रुक रहा अवैध खुदाई
आपको बता दे की हाल ही में अवैध खनन को लेकर टास्क फ़ोर्स की बैठक में छत्तीसगढ के समस्त कलेक्टरों ने अधिकारियो को निर्देश देते हुए कहा था कि अवैध रेत व मुरूम की खुदाई पर पुलिस विभाग के साथ टीम बनाकर कार्यवाही करे।लेकिन कलेक्टरों के निर्देश और आदेश का पालन नहीं हो रहा है। छत्तीसगढ़ के अधिकांश जिलों में  में जगह जगह अवैध खनन से जंहा शासन को राजस्व की क्षति हो रही है तो वहीं पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है।दूसरी ओर  खनिज विभाग खनन माफियाओं और रेत के अवैध कारोबार में जुड़े नेताओं के दबाव का दंश भी झेल रहा है।ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि इन खनन माफियाओं को आखिर सरंक्षण कौन दे रहा है ?क्या इस अवैध कारोबारियों पर कोई कानून लागू नहीं?ये सवाल भी अब छत्तीसगढ़ कि जनता पूछ रही है।

बिरकोनी,घोड़ारी,तुमगांव, पिथौरा क्षेत्र से हो रहा अवैध खनन
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिला अंतर्गत के ग्राम बिरकोनी,घोड़ारी,तुमगांव, पिथौरा क्षेत्र में रेत चोर रातों में सक्रिय हो जाते है और रात भर  नदियों से पुकलेण्ड मशीन से लोडिंग कर  रेत चोरी करते हैं और सुबह होते ही नदी से मशीन निकाल ली जाती हैं।एन जी टी द्वारा जारी मानसून सत्र में15जून से रेत खनन बंद होने की सूचना के बाद भी नदियों से रेत निकाला जा रहा है और रेत को जमाकर मनमाने दाम पर बेचकर भारी अवैध मुनाफा लिया जा रहा है।रेत माफियाओं की इन हरकतों से खनिज विभाग को इन दिनों रेत की रायल्टी का जबरदस्त नुकसान हो रहा है,और ऐसा भी नही की प्रशासनिक अमला को इसकी जानकारी ना हो सारा खेल जिम्मेदारों की जानकारी में होने के बाबजूद भी रेत चोरी का खेल धड़ल्ले से जारी हैं जिससे रोजाना सरकार को लाखों रुपये का चूना लग रहें है।मिली जानकारी के अनुसार महासमुंद क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली नदियों के किनारे बसे रेत माफियाओं की नजर अब हर वर्ष की तरह रेत का नियमों को धता बताकर अवैध खनन कर डंपिंग कर भारी मूल्य में बेचकर चांदी नहीं बल्कि सोना काटने पर उतारू है। हर वर्ष की तरह खनिज विभाग भी इन रेत चोरों पर लगाम लगाने की तैयारी में उडनदस्ता तैयार किया है उसके बाबजूद भी रेत चोरों द्वारा भी तु डाल-डाल तो मैं पांत -पांत कहते हुए भारी मात्रा में अवैध खनन लगातार किया जा रहा है।जिला प्रशासन द्वारा रेत की खुदाई बंद करने का आदेश खनिज विभाग के लोग मानने को तैयार नहीं है। यही वजह है कि रेत चोरों के साथ सांठगांठ कर अनेक गांव में अभी भी धड़ल्ले के साथ नदी से रेत की खुदाई और अर्वध परिवहन दोनों ही चल रहा है।ग्रामों में तो और भी हद हो गई है।वहां गांव के सरपंच और पंचों द्वारा मना करने के बावजूद रेत चोर तथा उनके छूट भैये नेता पूरी तरह से दादागिरी करते हुए नदी से रेत निकालने का काम खुलेआम कर रहे हैं।खनिज विभाग के अधिकारियों को अवैध रेत उत्खनन तथा अवैध परिवहन दोनों की ही पूरी जानकारी रहती है।लेकिन किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं की जा रही है।इससे  स्पस्ट होता है कि रेत चोरी का सारा खेल में खनिज विभाग के अधिकारी की सांठगांठ से सारा खेल खेला जा रहा हैं वंही राजस्व विभाग का भी अपना शेयर तय हैं  जानकारी होने के बाबजूद राजस्व विभाग भी मूकदर्शक बना हुआ हैं।वहीं दूसरी ओर रेत चोरों द्वारा अवैध उत्खनन रोकने वालों के खिलाफ ही थाने में फर्जी शिकायतें दर्ज कराने की धमकी दी जा रही है।तो कंही पत्रकारों को भी धमकी दी जा रही है। खनिज विभाग की छत्रछाया में चल रहे इस धंधे के कारण जिला प्रशासन कि न केवल छवि खराब हो रही है।वरन उसकी बदनामी भी हो रही है।
छत्तीसगढ़ विधानसभा में रेत के अवैध खनन पर बीजेपी का स्थगन।


 रेत के अवैध खनन का मामला सदन में उठा था बीजेपी ने इस पर स्थगन प्रस्ताव दिया और चर्चा कराये जाने की मांग की थीं।गौरतलब हो कि नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा था कि पूरे प्रदेश में रेत माफिया सक्रिय है,रेत का अवैध खनन चल रहा है। अवैध रेत का भंडारण किया जा रहा है।बारिश में प्रतिबंध के बावजूद अवैध खनन धड़ल्ले से जारी है,नदी किनारे रेत मफ़ियाओ ने टीले बनाकर रख दिया है,अधिकारियों की हिम्मत नहीं है की कार्रवाई कर सके,सूरजपुर में कार्रवाई करने गए ज़िला खनिज अधिकारी के साथ मारपीट की गई थी अधिकारी दबे कुचले नज़र आ रहे हैं,सरकार के संरक्षण में रेत का अवैध खनन हो रहा है।शिवरतन शर्मा ने कहा कि अब तक शराब माफिया,भू मफ़ियाओं की चर्चा होती थी अब राज्य में रेत माफिया भी आ गये हैं,शराब माफिया रेत के अवैध खनन में भी आ गये हैं।


सदन में 3मार्च को भी अवैध खनन का मुद्दा गूंजा था जिसमें बीजेपी (भाजपा) ने शून्यकाल में स्थगन प्रस्ताव लाया।


छत्तीसगढ़ विधानसभा (छत्तीसगढ़ विधानसभा) सदन में 3मार्च बुधवार को अवैध खनन का मुद्दा गूंजा था जिसमें बीजेपी  ने शून्यकाल में स्थगन प्रस्ताव लाया था स्थगन प्रस्ताव स्वीकार किया जाए या नहीं इस पर चर्चा के दौरान बीजेपी विधायक शिवरतन शर्मा ने कहा था कि प्रदेश में रेत का अवैध उत्खनन किया जाएगा। लोगों के पास एक्सपैंड्स खरीदने के सिवाय कोई विकल्प नहीं है।मामले में बीजेपी विधायक अजय चंद्राकर ने कहा था कि एनजीटी के नियमों का पालन नहीं हो रहा है। सरकारी रेत माफिया को निर्देशित कर रही है या रेत माफिया सरकार को निर्देशित कर रहे हैं। सरकारी संरक्षण में रेत का अवैध उत्खनन हो रहा है।अधिकारी झूठ नहीं बोलते हैं।जेसीसीजे विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा था कि सरकारी संरक्षण में सत्ता पक्ष के लोगों के लोग अवैध उत्खनन कर रहे हैं। रेत के नाम पर जंगलराज कायम हो गया है। शराब माफिया पहले से सक्रिय हैं।अधिकारी ट्रांसफर के डर से उन्हें कुछ नहीं बोलते।पूर्व सीएम रमन सिंह ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा था कि- नियम कायदों को ताक पर रखा जा रहा है।हाल ये है कि अवैध रेत उत्खनन की वजह से शिवनाथ नदी की दिशा बदल रही है। पुलिस-प्रशासन के संरक्षण में रेत का अवैध उत्खनन हो रहा है। सभी शराब के गुंडेन्ड पर उतर चुके हैं। इस विषय पर चर्चा होनी चाहिए।


नेता प्रतिपक्ष ने भी सवाल उठाया था
नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा था कि अवैध उत्खनन को प्रोत्साहित करने के लिए टेंडर की प्रक्रिया की गई है। पूरे प्रदेश में रेत का अवैध उत्खनन हो रहा है। अधिकारी की हिम्मत नहीं है कि घाट पर जाकर कार्रवाई करें।गांव वालों के खिलाफ माफिया बर्बरता पूर्वक व्यवहार कर रहे हैं।इस चर्चा के बाद आसंदी ने स्थगन की सूचना को विचाराधीन रखा और फिर असंतुष्ट विधायकों ने सदन में जमकर नारेबाजी की।नरेड़ी के बीच आसंदी ने व्यवस्था देते हुए कहा था कि- किसी न किसी माध्यम से इस विषय पर चर्चा की जाएगी।किन्तु बार बार सदन मुद्दे गूंजते तो है किंतु अबैध रेत खनन और परिवहन करने बालो पर कोई ठोस कार्यवाही नही होती हैं जो लोकतंत्र में दुर्भाग्यपूर्ण हैं।

धमतरी विधायक श्रीमती रंजना साहू ने भी विधानसभा में उठाया था महानदी में हो रहे अवैध उत्खनन का मुद्दा,भूपेश बघेल ने कहा था हो रही है जांच
 छत्तीसगढ़ इनदिनों रेत चोरों का मानो राज चल रहा हो छत्तीसगढ़ में अबैध रेत खनन एक दो जिलों की नही बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में रेत चोरों का राज चल रहा हैं गौरतलब हो कि धमतरी विधायक श्रीमती रंजना साहू ने भी विधानसभा मानसून सत्र के प्रथम दिवस सदन में तारांकित प्रश्न के माध्यम से वर्षा काल में प्रतिबंधित अवधि पर महानदी में हो रहे अवैध उत्खनन का मुद्दा उठाया था उन्होंने बताया था कि निर्धारित मात्रा व क्षेत्र  से अधिक रेत का भंडारण कर शासन प्रशासन को इस कारोबार से संबंधित लोग आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उत्तर देते हुए कहा था कि रायपुर संभाग में सस्टेनेबल सैड माइनिंग मैनेजमेंट की गाइड लाइन (केन्द्र सरकार) के अनुसार 10 जून से 15 अक्टूबर तक नदी में रेत खनन पर लगाया प्रतिबंध का पालन किया जा रहा हैं। जांच समिति बनाकर औचक निरीक्षण पश्चात जांच करते हुए अवैध उत्खनन,जहां भी पाया जाता है वहां कार्रवाई की जा रही है तथा आगे भी जारी रहेगी। मुख्यमंत्री ने बताया था कि रायपुर संभाग में 15 जून की स्थिति मे 114 चिन्हाअंकित जगह पर भंडारण की अनुमति दी गई है,जिसका क्षेत्र एवं मात्रा भी निर्धारित की गई है।उन्होंने बताया था कि अवैध भंडारण के 4 प्रकरण बनाए गए हैं, जिसमें 43,000 रुपए का अर्थदंड आरोपित किया गया है।

रेत चोरो के आगे नतमस्तक हुआ है छत्तीसगढ़ का पूरा प्रशासन

 चौकानों वाली बात तो यह है कि एनजीटी के नियमों के विपरीत यहां नदी के भीतर चेंनमोंटेन (पोकलेन)मशीन लगाकर सीधे रेत की बिक्री कर परिवहन किया जा रहा है जबकि अनुबंध की शर्तों के अनुसार नदी से रेत निकालकर भंडारण करने के बाद विक्रय करना है।वहीं सब कुछ जानते हुए भी छत्तीसगढ़ के कई जिलों में स्थानीय प्रशासन रेत चोरो के आगे नतमस्तक है।गौरतलब हो कि भारत सरकार पर्यावरण, वन एवं जलवायु मंत्रालय ने 15 जून 2020 को एक आदेश जारी किए है,इस आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि 15 जून से 1 अक्टूबर तक मानसून सत्र का निर्धारण किया गया है।रेत खदानों,नदियों एवं नालों से रेत उत्खनन पर प्रतिबंध लगाया जाता है पंरतु छत्तीसगढ़ राज्य में इसका पालन नहीं किया जाता हैं।  प्रशासन केन्द्र सरकार के एक जिम्मेदार विभाग के आदेश का उल्लघंन करते हुए रेत चोरो को संरक्षण देता है। इस पूरे मामले में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधी भी उदासीन रवैया अपनाएं हुए है,ऐसा प्रतीत होता है कि जनप्रतिनिधि और अधिकारी रेत चोरो के हाथों की कठपुतली बन बैठे है,छत्तीसगढ के अधिकांश जिलों में एनजीटी के नियम विपरीत रेत खनन को रोकने की कोई अधिकारी हिम्मत तक नहीं दिखाता है।  रेत चोर सत्ताधारी नेताओं की करीबी रिश्तों एवं प्रशासनिक संरक्षण का भरपुर फायदा उठाकर नदियों का सीना छलनी करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते है और अधिकारी मूकदर्शक बनाकर तमाशा देखते रहते है।
एनजीटी का रेत खनन के लिए जारी पर्यावरण मंजूरी में कुछ अनिवार्य शर्ते
माइनिंग करने वाले को कम से कम संख्या में पोकलेन का उपयोग करना चाहिए और यह एक परियोजना स्थल में दो से अधिक नहीं होनी चाहिए।

जिला प्रशासन को पहले वर्ष के अंत में माइनिंग पर जाकर उसके पर्यावरण पर पड़ रहे असर का आंकलन करना चाहिए। जिसके आधार पर काम जारी रखना है या नहीं उसकी अनुमति देनी चाहिए। 

खनन क्षेत्र को ठीक से भर दिया गया है इस पर अधिकृत एजेंसी द्वारा हर साल रिपोर्ट तैयार करके निर्धारित प्राधिकारी को दी जानी चाहिए। यदि ऐसा नहीं हो रहा है तो उसके अनुसार खनन के काम को रोका या कम किया जा सकता है।

वर्तमान प्राकृतिक नदी तल स्तर से अंतिम कार्य की गहराई कम से कम 1 मीटर होनी चाहिए और जिस जगह रेत खनन करना है वहां रेत की मोटाई 3 मीटर से अधिक होनी चाहिए।

किसी भी हालत में ग्राउंडवाटर लेबल से नीचे रेत खनन नहीं किया जाना चाहिए। यदि भूजल का स्तर 1 मीटर के अंदर है तो खनन को तुरंत रोका जाना चाहिए।

रेत खनन से किसी भी तरह नदी के पानी की गुणवत्ता में गिरावट और वेग पर असर नहीं होना चाहिए। साथ ही इससे नदी के प्रवाह और उसके पैटर्न पर भी असर नहीं पड़ना चाहिए।

महीने में एक बार तालुक स्तर के अधिकारियों द्वारा खनन कार्य की स्वयं जाकर जांच की जानी चाहिए। 

खनन बंद करने के बाद जिसे माइनिंग का लाइसेंस दिया गया है उसके द्वारा खदान पर डाले गए सभी शेड को तुरंत हटा देना चाहिए। साथ ही खनन के संचालन के लिए उपयोग किए जाने वाले सभी उपकरणों, सड़कों और रास्तों को समतल किया जाना चाहिए ताकि नदी बिना किसी कृत्रिम अवरोध के अपने सामान्य मार्ग पर फिर से बह सके सके।

जहां खनन किया गया है वहां बने गड्ढों को तुरंत भर देना चाहिए। साथ ही उस जगह को जितना हो सके पुरानी स्थिति में लाना चाहिए, जिससे पर्यावरण को होने वाले नुकसान को सीमित किया जा सके।

पर्यावरण के लिए तबाही बन सकता है बेतहाशा रेत खनन

निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाली रेत की मांग बढ़ती ही जा रही है लेकिन अंधाधुंध रेत-खनन पर्यावरण पर भारी पड़ रहा है।रेत का उपयोग हर तरफ है,घर से लेकर मोबाइल फोन तक,घरों की कंक्रीट में रेत लगती है,सड़कों के डामर में,खिड़कियों के कांच में और फोन की सिलिकॉन चिपों में भी रेत है। लेकिन आधुनिक जीवन के निर्माण की जरूरत ये रेत विनाशकारी और बाजदफा गैरकानूनी उद्योग की धुरी भी बनती जा रही हैं। हालांकि मुहावरों में बेकार लेकिन वैसे बेशकीमती रेत हैं।रेत दुनिया में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाली खनिज संपदा है दूसरे बहुत से उत्पादों से अलग नीति निर्माताओं के पास रेत की सालाना खपत का कोई ठोस अनुमान भी नहीं है। 2019 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की एक महत्त्वपूर्ण रिपोर्ट में सीमेंट के डाटा की मदद से रेत की खपत का अंदाजा लगाया गया है क्योंकि सीमेंट में रेत और बजरी इस्तेमाल होती है और इस आधार पर सालाना 50 अरब टन रेत की अनुमानित मात्रा निकाली गई हैं।शोधकर्ताओं का कहना है कि यह मात्रा हर साल जिम्मेदारी से उपयोग की जाने वाली रेत से ज्यादा है,जबकि चट्टानों को कूटकर और रेत बनाई जा सकती है।कुछ इलाकों में रेत की कमी से जो लूट और झपटमारी शुरू हुई है,उसका निशाना पर्यावरण और वन्यजीव बन रहे हैं।उनकी रिहाइशें तबाह हो रही हैं।इस रिपोर्ट की सह लेखक और जेनेवा में ग्लोबल सैंड ऑब्जरवेटरी से जुडीं लुईस गालाघेर कहती हैं कि”संकट कुछ ऐसा है कि हमें ठीक से इस सामग्री के बारे में पता भी नहीं है। हमें उस असर का भी अंदाजा नहीं है जहां से इसे निकाला जा रहा है। हम तो यह भी नहीं जानते हैं यह आती कहां से हैं।नदियों से कितनी रेत आती है, हमे नहीं पता है।


बेतहाशा रेत खनन का मतलब बेतहाशा बर्बादी
विशेषज्ञ यह जरूर जानते हैं कि बेतहाशा मात्रा में रेत निकाली जाती है तो इसकी कीमत लोग ही चुकाते रहेंगे और यह धरती चुकाएगी,रेत खनन से हैबिटैट बर्बाद हो जाते हैं,नदियां गंदली और तटों में दरार आ जाती हैं,इनमें से कई तट तो समुद्र के जलस्तर में बढ़ोत्तरी से पहले ही गुम होने लगे हैं।जब रेत की परतें खोदी जाती हैं तो नदी के तट अस्थिर होने लगते हैं।प्रदूषण और पानी में अम्लता यानी एसिडिटी आ जाने से मछलियां मारी जा सकती हैं और लोगों और फसलों को पानी नहीं मिल पाता है।यह समस्या तब और सघन हो जाती है,जब बांध के नीचे गाद भरने लगती हैं। रेत संकट के समाधानों पर किताब लिख चुकीं स्वतंत्र शोधकर्ता किरन परेरा का कहना है कि”और भी बहुत सारे प्रभावों को नहीं देखा जाता है।रेत की कीमत दिखती है लेकिन ये असर बिल्कुल नहीं दिखते हैं।इंटरनेशनल यूनियन फॉर द कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) में खनन उद्योगों पर शोध की अगुवाई कर रहे स्टीफन एडवर्ड्स के मुताबिक सबसे खराब यह है कि बहुत सारा असर तो तत्काल नहीं दिखता है,जिसके चलते यह जानना कठिन है कि वह असर कितना है।यह मामला इतना अधिक चिंताजनक रूप से बढ़ रहा है कि हमें इस पर और करीब से ध्यान देने की जरूरत है।


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