Cgnews: गरियाबंद में बड़ा प्रशासनिक धमाका: पेट्रोल घोटाले में सहायक ग्रेड-2 विजेंद्र कुमार ध्रुव निलंबित, 25 लाख की अनियमितता का खुलासा

 

गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में सरकारी कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार और वित्तीय लापरवाही के खिलाफ जिला प्रशासन ने एक सख्त और ऐतिहासिक कदम उठाया है। कलेक्टर  बी.एस. उइके ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय गरियाबंद में पदस्थ सहायक ग्रेड-2 अधिकारी विजेंद्र कुमार ध्रुव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन पर सरकारी पेट्रोल-तेल मद में भारी अनियमितता और लगभग 25 लाख रुपये के अवैध भुगतान का आरोप सिद्ध हुआ है।

क्या है पूरा मामला?

विजेंद्र कुमार ध्रुव पर आरोप है कि उन्होंने वाहन क्रमांक CG 02-6140 (महिंद्रा सुमो) के नाम पर जय लक्ष्मी पेट्रोल पंप से लगातार फर्जी या अनुपयुक्त बिलों के आधार पर पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति दिखाकर लगभग 25 लाख रुपये की राशि सरकारी खजाने से पार करवा दी। शिकायतें लंबे समय से उठ रही थीं, लेकिन हाल ही में जब यह मामला कलेक्टर के संज्ञान में आया तो उन्होंने स्वयं संज्ञान लेते हुए जांच के निर्देश दिए।

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जांच के दौरान जब दस्तावेजों, भुगतान रसीदों और वाहन उपयोग की जानकारी का मिलान किया गया, तो कई विसंगतियाँ सामने आईं। न सिर्फ बिलों की संख्या अत्यधिक पाई गई, बल्कि वाहन की वास्तविक आवश्यकता और उसके ईंधन खपत की तुलना में यह भुगतान बहुत अधिक था। प्रारंभिक जांच में ही यह स्पष्ट हो गया कि इस पूरे प्रकरण में जानबूझकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है।

कथनों और जवाब से बढ़ा शक

प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विजेंद्र कुमार ध्रुव से 17 जनवरी 2025 को औपचारिक कथन लिया तथा उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, जिसका जवाब 20 मार्च 2025 को प्राप्त हुआ। लेकिन उनके जवाब ने संदेह दूर करने के बजाय गहराया। उनका उत्तर असंतोषजनक और तथ्यों से परे पाया गया। उन्होंने इस गंभीर वित्तीय लापरवाही को स्वीकार नहीं किया और न ही स्पष्ट उत्तर प्रस्तुत किया कि भुगतान किस आधार पर और किसकी स्वीकृति से किया गया।

सिविल सेवा नियमों का घोर उल्लंघन

कलेक्टर उइके द्वारा जारी निलंबन आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि विजेंद्र कुमार ध्रुव ने न केवल अपने पदीय कर्तव्यों की घोर उपेक्षा की है, बल्कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 का भी खुला उल्लंघन किया है। यह कृत्य ‘गंभीर कदाचार’ की श्रेणी में आता है, जो सरकारी सेवा की गरिमा और पारदर्शिता के विपरीत है।

निलंबन आदेश के प्रमुख बिंदु:

  • श्री ध्रुव को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
  • उनकी निलंबन अवधि के दौरान मुख्यालय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, छुरा में नियत किया गया है।
  • निलंबन के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता (subsistence allowance) मिलेगा।
  • उनके विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

कलेक्टर का सख्त संदेश: “भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं”

इस कार्रवाई के बाद गरियाबंद जिले में प्रशासनिक हलकों में खलबली मच गई है। वर्षों से दबे हुए फाइलों में सड़ रही शिकायतें अब सिर उठाने लगी हैं। कलेक्टर बी.एस. उइके की इस सख्ती को आमजन से लेकर अधिकारी तक एक साफ संदेश के रूप में देख रहे हैं — “सरकारी धन का दुरुपयोग अब नहीं चलेगा। भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

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जनता की प्रतिक्रिया: “देर आए, दुरुस्त आए”

स्थानीय नागरिकों और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कुछ ईमानदार कर्मचारियों ने इस कार्रवाई का स्वागत किया है। एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “यह घोटाला लंबे समय से चल रहा था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही थी। अब लग रहा है कि सिस्टम में फिर से विश्वास जगा है।”

एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, “यह केवल शुरुआत है। जांच की आंच ऊपर तक जानी चाहिए क्योंकि अकेला सहायक ग्रेड-2 इतने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार नहीं कर सकता। जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और सभी दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।”

यह मामला गरियाबंद प्रशासन की कार्यशैली में एक निर्णायक मोड़ की तरह देखा जा रहा है। यदि इसी तरह पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दी गई, तो यह जिला आने वाले वर्षों में भ्रष्टाचार मुक्त शासन की एक मिसाल बन सकता है।


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