Cgnews: गर रहना है चुस्त-दुरुस्त, निरोग – नियमित करें योग”गु रुकुल महाविद्यालय में आयोजित योग शिविर में छात्र अध्यापकों ने सीखा स्वस्थ जीवन का मंत्र

 

छुरा/गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में इन दिनों योग की लहर दौड़ रही है। पतंजलि योग समिति द्वारा “हर घर योग, हर जन योग” अभियान के अंतर्गत चलाए जा रहे पांच दिवसीय नि:शुल्क योग शिविरों ने गांव-गांव में स्वास्थ्य की अलख जगा दी है। इसी श्रृंखला में गुरुकुल महाविद्यालय, गरियाबंद में बीएड प्रशिक्षार्थियों के लिए एक विशेष योग शिविर का आयोजन किया गया, जो न केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम बना, बल्कि विद्यार्थियों के जीवन की दिशा बदलने वाला अनुभव भी सिद्ध हुआ।

 

शिविर का संचालन एससीईआरटी के राज्य स्तरीय योग प्रशिक्षक शंकर लाल यदु तथा पतंजलि योग समिति के जिला अध्यक्ष योगविद् अर्जुन धनंजय सिन्हा द्वारा किया गया। दोनों योगाचार्यों ने विद्यार्थियों को योग, प्राणायाम, आयुर्वेद, यज्ञ और संयमित दिनचर्या के महत्व को न केवल सैद्धांतिक रूप से समझाया, बल्कि व्यावहारिक रूप से अभ्यास भी कराया।

 

योग केवल व्यायाम नहीं, जीवनशैली है

महाविद्यालय प्रबंधन के प्रमुख धर्मेन्द्र ओझा ने अपने उद्घाटन वक्तव्य में कहा, “योग एक वैज्ञानिक और सनातन विद्या है। यह केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन, आत्मिक अनुशासन और पूर्ण जीवनशैली का नाम है। एक आदर्श शिक्षक बनने के लिए सबसे पहले खुद का तन-मन और विचार शुद्ध होना चाहिए, और यह योग से ही संभव है।”

अष्टांग योग से लेकर जुम्बा-एरोबिक्स तक

योगाचार्य शंकर लाल यदु ने विद्यार्थियों को अष्टांग योग की बारीकियों से अवगत कराया। उन्होंने यौगिक जॉगिंग, जुम्बा, एरोबिक्स, स्थूल और सूक्ष्म व्यायामों के साथ-साथ प्राचीन प्राणायाम विधियों – जैसे शीतली, शीतकारी, भ्रामरी, अनुलोम-विलोम और कपालभाति का अभ्यास कराया। उन्होंने बताया कि “ग्रीष्मकाल में शरीर को हाइड्रेटेड रखना, आंतरिक शीतलता बनाए रखना और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। ऐसे में शीतली और शीतकारी प्राणायाम अत्यधिक लाभकारी सिद्ध होते हैं।”

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तनाव प्रबंधन का अचूक उपाय: योग

छात्र-छात्राओं के मानसिक तनाव, परीक्षा दबाव और पढ़ाई में ध्यान केंद्रित करने की समस्या को लेकर योगाचार्य अर्जुन सिन्हा ने कहा, “दिनभर की व्यस्तता में से सिर्फ 30 मिनट प्राणायाम और ध्यान के लिए निकालें, आपका जीवन बदल जाएगा। सुखासन या पद्मासन में बैठकर सुबह ताजे वातावरण में कपालभाति और अनुलोम-विलोम करें, पेट दुरुस्त होगा, दिमाग तेज चलेगा और आत्मविश्वास बढ़ेगा।”

सूर्य नमस्कार: रोग प्रतिरोधक शक्ति का वरदान

शिविर में सूर्य नमस्कार की विधि को मंत्रोच्चारण के साथ सिखाया गया। योगाचार्यों ने बताया कि सूर्य नमस्कार से न केवल शरीर लचीला बनता है, बल्कि यह सम्पूर्ण शरीर का व्यायाम है, जो मेटाबोलिज़्म को सुधारता है और मनोबल बढ़ाता है।

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षट्कर्म और शरीर शुद्धि की विधियाँ भी सिखाई गईं

शिविर में विद्यार्थियों को ‘षट्कर्म’ जैसे नेती, धौति, कपाल रंध्र, वमन आदि शुद्धिकरण प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई, जो शरीर के अंदरूनी दोषों को बाहर निकालने में सहायक होती हैं। इससे छात्र अध्यापक न केवल अपने लिए, बल्कि भविष्य में अपने विद्यार्थियों के लिए भी स्वास्थ्य रक्षा के सशक्त साधन बन सकेंगे।

शिविर का माहौल रहा प्रेरणादायक और आनंदमय

शिविर के अंतिम दिन ताली वादन, प्रेरक गीतों और सामूहिक योग प्रदर्शन के साथ समापन हुआ। विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह शिविर उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। प्रोफेसर लोकेश मार्कण्डेय, राहुल साहू, कल्पना ध्रुव, टोनी सिन्हा सहित महाविद्यालय के समस्त शिक्षकगण और बड़ी संख्या में छात्र अध्यापक शिविर में उपस्थित रहे।

संस्था द्वारा धन्यवाद ज्ञापन

महाविद्यालय परिवार ने योगाचार्य शंकर लाल यदु एवं अर्जुन धनंजय सिन्हा का आभार प्रकट करते हुए कहा कि इस तरह के शिविर समय-समय पर आयोजित किए जाते रहेंगे ताकि विद्यार्थी न केवल अच्छे शिक्षक बनें, बल्कि समाज को भी स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करें।

निष्कर्ष:

इस योग शिविर ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि युवा पीढ़ी को सही मार्गदर्शन और योग जैसी प्राचीन विद्या का साथ मिले, तो वे न केवल अपने शरीर और मस्तिष्क को नियंत्रित कर सकते हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी अपनी प्रभावशाली भूमिका निभा सकते हैं।


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