राज्य सरकार द्वारा विशेष पिछड़ी जनजाति के रूप में घोषित है भुंजिया जनजाति

गरियाबंद जिले में है संकेंद्रण, भगवान शिव और माता पार्वती से अपनी उत्पत्ति मानते हैं भुंजिया

राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में भुंजिया जनजाति नृत्य ने सभी को किया प्रभावित

रायपुर (गंगा प्रकाश)। छत्तीसगढ़ का गरियाबंद जिला विशेष पिछड़ी जनजातियों का जिला है. इस जिले में राज्य सरकार द्वारा घोषित विशेष पिछड़ी जनजाति भुंजिया का प्रमुख रहवास क्षेत्र है. भुंजिया जनजाति भगवान शिव और माता पार्वती से अपनी उत्पत्ति मानते हैं।

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भुंजिया जनजाति समूह के रूप में रहना पसंद करते है ये महुआ के लड़की का विशेष रूप से घर बनाने के लिए जाने जाते है।

 भुंजिया जनजाति में घर बनाने के दौरान आवश्यक रूप से एक बात का ध्यान दिया जाता है की रसोई का कमरा घर के अंदर नहीं बनाते है. इनके घर एक से तीन कमरे के होते है. इसमें माई कुटिया यानी मुख्य कमरा होता और यहां बांगर मिट्टी और पितर को विशेष रूप से रखते है. इसके अलावा डूमा देव और बुधा राजा की बांगर माटी के साथ स्थापना करते है।

भुंजिया जनजाति अपने घर के बाहर एक रसोई घर बनाते है. इसे जनजाति लाल बंगला के नाम से पुकारते है. रसोई घर का बाहरी हिस्सा गाढ़ा लाल होता है. इसे स्थानीय बोलचाल में बगलाल कहा जाता है. इसी से ही लाल बंगला का शब्द आया है. रसोई घर को अंदर गेरू और बाहर को लाल रंग से पुताई करते है।

लाल बंगला में कोई बाहरी व्यक्ति प्रवेश नहीं कर सकते. केवल परिवार के सदस्य और उसी गोत्र जाति के लोग लाल बंगला में जा सकते हैं. ये अपने लाल बंगले में कोई खिड़की नहीं बनाते है केवल एक प्रवेश द्वार ही बनाए जाता है।

भुंजिया जनजाति की एक अनोखी प्रथा है. इसके अनुसार इस जनजाति की महिला सिंदूर और बिंदी नहीं लगाते है. भुंजिया जनजाति में कांड विवाह प्रचलित है. जिसमें जब बच्ची की उम्र 12 साल हो जाती है. तब धनुष के तीर से विवाह कराया जाता है. इसके पीछे मान्यता है कि जीवन बेहतर हो जाता है. ये केवल सफेद वस्त्र का पहनते है।

गरियाबंद जिल के लगभग 138 गांव में भुंजिया जनजाति के लोग रहते है. इन गावों में तकरीबन 2 हजार 130 भुंजिया जनजाति परिवार निवासरत है. सर्वाधिक बहुलता जिले के गरियाबंद और मैनपुर ब्लॉक में दिखता है. इनका विस्तार  बागबाहरा से छुरा ,फिंगेश्वर और धमतरी जिले तक है।

राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में अपनी इन्हीं विशेषताओं को भुंजिया जनजाति के सदस्यों ने नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया. इन्होने अपने लाल बंगले और तीर धनुष के साथ विवाह और अन्य परंपराओं का भी नृत्य में समावेश कर प्रदर्शित किया।


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