“रीपा योजना” की होगी जांच भूपेश बघेल ने शुरू की थी स्कीम

रायपुर(गंगा प्रकाश)। छत्तीसगढ़ की रीपा योजना की कांग्रेस सरकार ने जमकर तारीफ की थी। जब तक कांग्रेस सरकार राज्य में रही इस योजना की खूब चर्चा हुई। अब इस योजना को लेकर घोटाला और भ्रष्टाचार जैसे शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है। मौजूदा बीजेपी सरकार ने रीपा योजना में जांच कराने की घोषणा की है। इस योजना को करोड़ों का गबन का आरोप लगा है। रीपा योजना का फुलफार्म रूरल इंडस्ट्रियल पार्क है। यह योजना तत्कालीन भूपेश सरकार ने 2 अक्टूबर 2022 में शुरू की थी।

रीपा में गड़बड़ी का मामला सदन में गरमाया

छत्‍तीसगढ़ विधानसभा में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान चलाई गई ग्रामीण औद्योगिक पार्क ( रीपा ) योजना को लेकर सवाल पर सवाल दागे गए। प्रश्‍नकाल के दौरान सत्‍तापक्ष के सदस्‍यों की मांग पर मंत्री विजय शर्मा ने रीपा योजना पर हुए खर्च की ऑडिटर जनरल से ऑडिट कराने और मुख्य सचिव की अध्‍यक्षता में भौतिक सत्‍यापन कराने की घोषणा की है। कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री उमेश पटेल के एक प्रश्‍न के जवाब में मंत्री शर्मा ने कहा कि, इस योजना में सरकार का पैसा लगा है। इस वजह से इसे बंद करने की कोई योजना नहीं है। इससे पहले भाजपा धरमलाल कौशिक के प्रश्‍न के जवाब में मंत्री शर्मा ने बताया कि, प्रदेश में 300 रीपा केंद्रों की स्‍थापना का लक्ष्‍य रखा गया था और 300 केंद्र स्‍थापित कर लिए गए हैं। उन्‍होंने बताया कि इस योजना के लिए डीएमएफ सहित अन्‍य विभागों से बज लिया गया है।

डीएमएफ मद से खर्च कर किया भ्रष्टाचार

विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूर्व नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने रीपा योजना में हुई गड़बड़ी का मामला सदन में उठाया। वहीं पंचायत मंत्री विजय शर्मा ने रीपा में हुए घोटालों की जांच एडवोकेट जनरल के जरिए ऑडिट कराने और चीफ सेक्रेटी की अध्यक्षता में समिति बनाकर जांच कराने की बात कहीं। वहीं श्री शर्मा ने कहा कि इसकी जांच 3 महीने में पूरी होगी।पूर्व नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने पिछली सरकार के दौरान रीपा निर्माण का मामला प्रश्नकाल में सदन में उठाया। जिसके जवाब में मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि 300 रीपा बनाये जाने थे, सभी बन गए। पिछली बार 441 करोड़ का बजट स्वीकृत था जिसमें 260 करोड़ का भुगतान हुआ है बाकी भुगतान अभी शेष है।

धरमलाल कौशिक ने पूछा- किस-किस मद से राशि गई है?
मंत्री विजय शर्मा ने कहा- विभिन्न मदों से गई है, डीएमएफ सहित अन्य कई मदों की राशि है।

धरमलाल कौशिक ने कहा- योजना शुरू हुई तब से करीब 600 करोड़ रुपये की राशि है। डीएमएफ मद से खर्च कर भ्रष्टाचार किया गया है। खरीदी में लीपापोती की गई है और मंत्री-अधिकारी बताने की स्थिति में नहीं है, मनमानी खरीदी हुई है। क्या चीफ सेक्रेटरी की अध्यक्षता में जांच कराएंगे?

बीजेपी विधायक अजय चंद्राकर ने पूछा-

कई मदों से भुगतान हुआ है। रीपा का क्या भौतिक सत्यापन हुआ है?
मंत्री विजय शर्मा ने कहा- रीपा में स्ट्रक्चर बना है, कई जगहों पर सामान है, कुछ नहीं है। जो अपेक्षा थी वो पूर्ण नहीं हुआ है।

मंत्री विजय शर्मा की बड़ी घोषणा- रीपा का एडवोकेट जनरल के जरिए ऑडिट होगा। चीफ सेक्रेटी की अध्यक्षता में समिति बनाकर जांच कराएंगे।

धरमलाल कौशिक ने कहा- रीपा में ऐसा भी हुआ है कि 2 करोड़ का काम है। पूरा 80 लाख का प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाया गया है, ये हाल है।
अजय चंद्राकर ने कहा- किसी और मद का पैसा किसी और मद में बांट दिया गया है। जांच की घोषणा हुई है लेकिन टाइम लिमिट बताया जाए।

बीजेपी विधायक धरमजीत सिंह ने कहा– कई सरपंचों का भुगतान नहीं हुआ है, उनके लिए आत्महत्या की स्थिति है। उन्हें आत्महत्या से बचाया जाए और भुगतान किया जाए। बाद में मत कहिएगा जब आत्महत्या करने लगे।

गृहमंत्री ने दिया जवाब – विधायक धरम लाल कौशिक के सवाल पर गृहमंत्री विजय शर्मा ने लिखित जवाब में बताया कि 300 का लक्ष्य था और 300 रीपा स्थापित किए गए हैं। कुल बजट 44175.39 लाख का था जिसमें 26001.70 लाख का भुगतानों चुका है जबकि 13503 लाख का भुगतान शेष हैं। इधर कांग्रेस बीजेपी सरकार पर आरोप लगा रही है कि पुरानी सरकार को बदनाम करने के लिए सभी जांच कराई जा रही है।

कहां हुआ है घोटाला

रीपा योजना को लेकर करोड़ों के भ्रष्टाचार का आरोप लगा। डीएमएफ के मद से भ्रष्टाचार किया गया है यह भी आरोपों की लिस्ट में शामिल है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि रीपा की मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति जांच करेगी और इसका एडवोकेट जनरल के जरिए ऑडिट भी होगा।

क्या आगे चलती रहेगी योजना?

अब जांच में क्या निकाल कर आता है यह तो वक्त के साथ ही पता चलेगा। लेकिन सवाल उठ रहा है कि क्या इस योजना को लेकर सच में घोटाला या भ्रष्टाचार हुआ है? यदि नहीं हुआ तो क्या बीजेपी की सरकार इस योजना को आगे चलाएगी?

महादेव बेटिंग एप घोटाला, शराब घोटाला, ट्रांसफर घोटाला, गोबर घोटाला, ग्राम सभा सदस्य घोटाला, चावल घोटाला, खदान घोटाला… छत्तीसगढ़ में पूर्ववर्ती कांग्रेस में मची रही लूट

छत्तीसगढ़ राज्य की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर घोटालों पर घोटालों को अंजाम देने के आरोप हैं,पूर्ववर्ती भूपेश सरकार पर शराब घोटाला, ट्रांसफर घोटाला, गोबर घोटाला, ग्राम सभा सदस्य बनाने के नाम पर घोटाला, चावल घोटाला, खदान से जुड़े माल ढुलाई के काम में घोटाला के साथ ही महादेव बेटिंग ऐप जैसे घोटालों की लंबी फेहरिस्त है।
भूपेश बघेल को छत्तीसगढ़ का मुख्यमंंत्री बनाया गया था, तो ऐसी रिपोर्ट्स थी कि उन्हें 2.5 साल के लिए मुख्यमंत्री बनाया जा रहा है, अगले ढाई साल टीएस सिंहदेव मुख्यमंत्री होंगे। हालाँकि ऐसा नहीं हुआ। भूपेश बघेल तमाम गतिरोधों के बावजूद पूरे 5 साल मुख्यमंत्री बने रहे। टीएस सिंहदेव को आखिरी कुछ महीनों के लिए उपमुख्यमंत्री बनाकर चुप करा दिया गया। ऐसा टीएस सिंहदेव ने क्यों होने दिया? ये तो वही लोग जानें, उन पर वर्तमान सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी आरोप लगाती है कि उन्होंने छत्तीसगढ़ को कांग्रेस पार्टी के लिए तिजोरी के तौर पर इस्तेमाल कराया। जिन चीजों का वादा करके वो सत्ता में आए थे, किया उसके ठीक विपरीत काम और घोटालों पर घोटालों को अंजाम दिया। कांग्रेस पार्टी के लिए फंडिंग की और खुद को सत्ता में बनाए रखा। हम इस लेख में भूपेश बघेल सरकार पर लग रहे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की लंबी सूची प्रकाशित कर रहे हैं, जिसके बाद सारी बातें दूध और पानी की तरह स्पष्ट हो जाएंगी।

महादेव सट्टेबाजी घोटाला

भारतीय जनता पार्टी आरोप लगा रही है कि छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सीधे तौर पर इस घोटाले में शामिल हैं। इस कथित घोटाले के मास्टरमाइंड और एप के मालिक ने अपना एक वीडियो जारी कर कहा कि उसने भूपेश बघेल को 508 करोड़ रुपए नकद पहुँचाए हैं। ये पैसे चुनाव में इस्तेमाल किए गए हैं। उसने बताया कि एक-एक पैसों का हिसाब उसके पास है। बता दें कि महादेव सट्टेबाजी एप मामला 15000 करोड़ का अभी तो ज्ञात है, जाँच जारी है। इतने पैसों की ती मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है, जिसपर ईडी ने केस दर्ज किया है। अभी ये कितना बड़ा घोटाला है, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। इस मामले में भूपेश बघेल के करीबी लोग जेल में बंद हैं।इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाकायदा चुनावी सभा में भूपेश बघेल से सवाल पूछा है कि वो बताएँ कि इन पैसों को उन्होंने कहाँ इस्तेमाल किया। पीएम मोदी ने पूछा था कि “मैं कांग्रेस से कुछ सवाल पूछना चाहता हूँ। महादेव सट्टेबाजी ऐप घोटाला 508 करोड़ रुपए का है और जाँच एजेंसियों ने इस मामले में बड़ी मात्रा में नकदी बरामद की है। छत्तीसगढ़ के सीएम का एक करीबी सहयोगी भी जेल में है। कांग्रेस को खुलासा करना चाहिए इसमें सीएम को कितना पैसा मिला? दिल्ली दरबार कितना पैसा पहुँचा?”

छत्तीसगढ़ पीसीएस घोटाला

इस घोटाले से जुड़ी हैरान करने वाली जानकारियाँ सामने आई है। छत्तीसगढ़ पब्लिक सर्विस कमीशन में नेताओं और अधिकारियों को बच्चों को सीधे एंट्री मिली, और उन्हें बड़े-बड़े पद भी दिए गए। प्रधानमंत्री ने भी इस घोटाले पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि कॉन्ग्रेस के गणितबाजों से सवाल PSC घोटाले को लेकर छत्तीसगढ़ के युवाओं का भी है… जिन हजारों युवाओं ने दिन-रात पढ़ाई करके, परीक्षा पास की थी, उनको किस फॉर्मूले से बाहर निकाला गया? कांग्रेस नेताओं के बच्चों को गणित के किस फॉर्मूले से भर्ती किया गया?

शराब घोटाला

भूपेश बघेल ने वादा किया था कि कांग्रेस सत्ता में आएगी तो छत्तीसगढ़ में शराबबंदी करेगी। उल्टा भूपेश बघेल और उनके बेटे पर आरोप है कि उन्होंने कमीशनखोरी करके 2161 करोड़ रुपए का घोटाला किया जबकि अभी इसकी पूरी डिटेल भी सामने नहीं आई है। जो पकड़ा गया और जिसकी रिकवरी हुई है, यह उसकी जानकारी है। सच्चाई यह है कि छत्तीसगढ़ में हजारों करोड़ रुपए का शराब घोटाला हुआ है। इस मामले में ईडी चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है और बताया है कि एजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर के आपराधिक सिंडिकेट के जरिए आबकारी विभाग में बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ।

चावल घोटाला

छत्तीसगढ़ की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर सरकारी राशन के बँटवारे में भी घोटाले का आरोप लगा है। पीडीएस व्यवस्था के तहत प्रति व्यक्ति 5 किलो धान देने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन कैग रिपोर्ट में आया है कि इसमें 600 करोड़ रुपए की गड़बड़ी की गई है। वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो भूपेश बघेल ने लगभग 5000 करोड़ रुपये का चावल घोटाला किया है। मई माह में भाजपा ने भूपेश बघेल पर 5000 करोड़ के चावल घोटाले का आरोप लगाते हुए इस्तीफा भी माँगा था। इस मामले में भूपेश बघेल और उनसे जुड़े लोगों ने चुप्पी साधे रखी है।

खदान ढुलाई घोटाला

पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार ने खदानों से निकलने वाले माल पर भी घोटाला किया है। माल ढुलाई से जुड़ा 2000 करोड़ से अधिक के घोटाले का आरोप उस पर है। बताया जा रहा है कि 25 रुपए प्रति टन की वसूली की गई है। पिछले साल ईडी ने इस मामले में जाँच शुरू की थी और कई लोग इस मामले में भी गिरफ्तार हुए हैं। ईडी ने एक बयान में कहा कि यह मामला एक बड़े घोटाले से संबंधित है, जिसमें छत्तीसगढ़ में वरिष्ठ नौकरशाहों, व्यापारियों, राजनेताओं और बिचौलियों से जुड़ा एक समूह ढुलाई किये जाने वाले प्रति टन कोयले पर अवैध रूप से 25 रुपये का कर वसूल रहा है। अनुमान है कि इससे प्रतिदिन लगभग 2-3 करोड़ रुपये अर्जित किए जाते हैं।

गोबर और गोईंठा घोटाला

छत्तीसगढ़ की पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार ने घोटाला करने मे गोईंठा और गोबर को भी नहीं छोड़ा। 1300 करोड़ रुपये का गोईंठा एवं गोबर घोटाला किया। इस मामले में भाजपा ने भी काफी हमला बोला है, खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस मामले को उठा चुके हैं। गोबर धन के नाम पर इतना बड़ा घोटाला छत्तीसगढ़ में अंजाम दे दिया गया।छत्तीसगढ़ में चना सरकारी राशन के वितरण में घोटाला, केंद्र सरकार के पैसों का सही से उपयोग न करने के आरोप, भाई भतीजावाद के आरोप तो लगते ही रहे हैं, साथ ही आदिवासी इलाकों के साथ सौतेला व्यवहार करने के भी आरोप लगे हैं। भूपेश बघेल पर आरोप हैं कि वो छत्तीसगढ़ से मिले घोटालों के पैसों को कांग्रेस की टॉप लीडरशिप तक पहुँचाते हैं और अन्य राज्यों के चुनावी अभियान में भी खर्च करने में मदद करते हैं। यही वजह है कि वो पूरे 5 साल तक अपनी सत्ता बचाने में सफल रहे हैं।

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