छ.ग. कलमकार मंच का वार्षिक अधिवेशन मुंगेली में सम्पन्न

3 पुस्तकों का विमोचन और 131 साहित्यिक हस्तियाँ सम्मानित हुई

 

बेमेतरा (गंगा प्रकाश)। छत्तीसगढ़ कलमकार मंच मस्तूरी- बिलासपुर के तत्वावधान में 2 मार्च 2025 को छत्तीसगढ़ कलमकार मंच का तृतीय वार्षिक अधिवेशन अमरटापू धाम मुंगेली में सम्पन्न हुआ। यह कार्यक्रम श्री एस.एल. रात्रे, आई.ए.एस. पूर्व सचिव छत्तीसगढ़ शासन की अस्वस्थता की वजह से डॉ. एन.डी.आर. चन्द्रा पूर्व कुलपति बस्तर विश्वविद्यालय के मुख्य आतिथ्य, डॉ. गुलाबचंद भारद्वाज कुसुम, प्राचार्य शासकीय महाविद्यालय खरौद जिला-जांजगीर की अध्यक्षता एवं डॉ. प्यारेलाल आदिले प्राचार्य कटघोरा कालेज के विशिष्ट आतिथ्य तथा श्री दुर्गा बघेल संस्थापक अमर टापू धाम, डॉ. किशन टण्डन क्रान्ति, संस्थापक एवं अध्यक्ष छत्तीसगढ़ कलमकार मंच, डॉ. गोवर्धन मार्शल संरक्षक, डॉ. पी. आर. कठौतिया, एस. डी. बघेल पूर्व प्राचार्य, श्रीमती तारा कुलकर्णी प्रख्यात लोक गायिका  की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।  सर्वप्रथम जोड़ा श्वेत जैतखम्ब में दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्प अर्पण कर गुरुवंदना से कार्यक्रम आरम्भ हुआ। तत्पश्चात मंच पर आसीन अतिथियों का पुष्पाहार एवं गुलदस्ता भेंटकर स्वागत किया गया। इस दौरान स्वागत गीत प्रस्तुत किये गए। पश्चात कार्यक्रम को गति देते हुए छत्तीसगढ़ कलमकार मंच के वार्षिक प्रशासनिक प्रतिवेदन का वाचन करते हुए अध्यक्ष डॉ. किशन टण्डन क्रान्ति ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा रत्न सम्मान तथा राष्ट्रीय प्रतिष्ठा पुरस्कार प्राप्त छत्तीसगढ़ कलमकार मंच अपने उद्देश्यों में पूर्णतः सफल रहा है। वर्तमान में मंच में 1 संरक्षक सदस्य तथा 15 आजीवन सदस्य हैं। सवा साल चली नमन् सतनाम धाम यात्रा का उल्लेख करते हुए 11 सतनाम धामों की यात्रा पर आधारित “सत्यपथ पर” यात्रा संस्मरण प्रकाशित होने के अलावा 18 साझा संकलनों का प्रकाशन, 21 स्थानों पर कवि सम्मेलन, 55 पुस्तकों का विमोचन तथा 1107 कलमकारों को सम्मानपत्र प्रदान किया जा चुका है।  इसके पश्चात अतिथियों के कर कमलों से 3 पुस्तकों का विमोचन सम्पन्न हुआ। इन पुस्तकों में 63 साहित्यकारों का राष्ट्रीय साझा काव्य संकलन “सृजन”, डॉ. किशन टण्डन क्रान्ति की 59वीं कृति “कभी-कभी” अभिव्यक्ति संग्रह तथा कृष्णा मानसी की काव्य-कृति – “यादों की लहरें” शामिल रही।

 इस दौरान कुल 15 क्षेत्रों में 131 कलमकारों एवं जानी-मानी हस्तियों को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। ये सम्मान निम्नलिखित क्षेत्रों में प्रदान किए गए- राजा गुरु बालक दास साहित्य सम्राट सम्मान श्री एस.एल. रात्रे को, श्री ई.वी. रामासामी पेरियार साहित्य क्रान्ति सम्मान डॉ. एन.डी.आर. चन्द्रा को, श्री लक्ष्मण मस्तुरिया साहित्य मनीषी सम्मान डॉ स्वामी राम बंजारे सरल को,  दयाराम टंडन ज्ञान रत्न सम्मान डॉ. गुलाबचंद कुसुम प्राचार्य शासकीय कॉलेज खरौद को, प्रथम शिक्षिका सावित्री फुले शिक्षा ज्योति सम्मान श्रीमती गंगा शरण पासी व्याख्याता को, श्री नकुल देव ढीढी साहित्य भास्कर सम्मान श्री राजेंद्र प्रेमी सरस व्याख्याता को, डॉ. भीमराव अम्बेडकर कला प्रतिभा सम्मान  श्याम कुटेलिहा लोक गायक को, ममतामयी मिनी माता कला कौशल सम्मान प्रसिद्ध भजन गायिका श्रीमती तारा कुलकर्णी को, महात्मा ज्योतिबा फुले साहित्य प्रचार सम्मान  दादू मनहर प्रधान संपादक राज्यभूमि तथा  विजय कुमार प्रधान संपादक संवाद समृद्धि पथ को संयुक्त रूप से, श्री देवदास बंजारे पंथी साधक सम्मान जय सतनाम सांस्कृतिक कला एवं सत्य प्रचार समिति बैजीकला कबीरधाम को,  सरहस-जोधाई शौर्य सम्मान श्री खिली प्रसाद मधुकर पुलिस निरीक्षक कांकेर को, सफुरा माता वात्सल्य शक्ति सम्मान श्रीमती सरस्वती लहरे महिला बाल विकास पर्यवेक्षक कोरबा एवं श्रीमती संगीता साहू महिला बाल विकास पर्यवेक्षक महासमुंद को संयुक्त रूप से, सुभद्रा माता चिकित्सा सेवा सम्मान डॉ. राखी कोर्राम गुड़िया स्टाफ नर्स नरहरपुर उत्तर बस्तर कांकेर को प्रदान किए गए। इसके अलावा कलमकार साहित्य-श्री अलंकरण 114 साहित्यकारों को प्रदान किए गए।   इस अवसर पर अपनी अस्वस्थता के कारण उपस्थित नहीं होने को लेकर क्षमा याचना करते हुए श्री एस. एल. रात्रे, पूर्व सचिव छत्तीसगढ़ शासन ने अपने आडियो सन्देश में कार्यक्रम की सफलता की कामना करते हुए कहा कि संसार के समस्त सकारात्मक परिवर्तनों के मूल में साहित्य बीज रूप में विद्यमान रहा है। फ्रांस की राज्य क्रान्ति के संदेश समानता, स्वतंत्रता और बन्धुत्व भी रूसो जैसे साहित्यकारों की देन है। बस्तर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. ननकी दाऊ रामप्रसाद चन्द्रा ने सामाजिक एकीकरण में साहित्य की भूमिका के सम्बन्ध में डॉ. भीमराव अम्बेडकर की कृति “एनिहिलेशन ऑफ कास्ट” का उल्लेख करते हुए दलित चेतना और शोध तथा महान सामाजिक चिन्तक ई. वी. रामास्वामी पेरियार के समतावादी विचारों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।  कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. गुलाबचंद भारद्वाज ‘कुसुम’ ने अपने उद्बोधन में कहा कि डिग्री लेकर नौकरी प्राप्त कर लेना शिक्षा का गौण उद्देश्य है। आज सन्त गुरु घासीदास, रविदास और कबीरदास जैसे महान सन्तों के जीवन दर्शन और शिक्षाओं से शिक्षा लेने की जरूरत है। श्री दयाराम टण्डन भी इसी कड़ी के महामानव थे, जिन्होंने पंचायत पदाधिकारी रहते हुए न केवल मस्तूरी में शिक्षण संस्थाओं की स्थापना में बहुमूल्य योगदान दिया वरन् अपने दिव्य आयुर्वेदिक ज्ञान से हजारों मनुष्यों और मवेशियों की प्राण रक्षा   डॉ. प्यारेलाल आदिले ने विशिष्ट अतिथि के आसन्दी से डॉ. किशन की अगुवाई में छत्तीसगढ़ कलमकार मंच के साहित्यिक अवदानों एवं कलमकारों की सक्रियता पर प्रकाश डालते हुए वर्तमान में छत्तीसगढ़ कलमकार मंच को प्रदेश की अग्रणी संस्था निरूपित किया।

            कार्यक्रम के दौरान पंथी पार्टी बैजीकला कबीरधाम द्वारा मनमोहक गीत एवं नृत्य प्रस्तुत किए गए। प्रख्यात लोक गायिका श्रीमती तारा कुलकर्णी द्वारा मनभावन गीत की प्रस्तुति दी गई। उनके द्वारा प्रस्तुत गीत “जुगुर- जुगुर दीया कस बरत रइबे बाबा” ने जबरदस्त समा बांधा। ततपश्चात कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का संचालन मणिशंकर दिवाकर, चैतराम अपरिचित तथा जुगेश बंजारे धीरज की त्रयी ने किया। आभार प्रदर्शन राजेन्द्र गेंदले परियोजना अधिकारी मुंगेली ने किया।

 कार्यक्रम के दौरान अश्वनी कोसरे प्रेरक, सुखदेव सिंह अहिलेश्वर, नवीन कुमार कुर्रे, सुरजीत क्रान्ति, बुंदराम जांगड़े, कार्तिक पुराण घृतलहरे, कृष्णा मानसी, मोहन दास बंजारे, देव मानिकपुरी, चतुरसिंह चंचल, गणेश महंत नवलपुरिहा, रमेश कुमार रसियार, दयालु दास भारती, संगीता साहू, लक्षवीर बांधे, श्रीमती लक्ष्मी डहरिया, नर्मदा खुटियारे, शिवानी कुर्रे, गायत्री दिवाकर, यमुना भारती, प्रोफेसर राकेश कुर्रे, पंडित कुंवर दास डहरिया, मनोज मनहरे इत्यादि साहित्यकार उपस्थित रहे।


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