कलेक्टर श्री अग्रवाल ने जल शक्ति अभियान अंतर्गत जल संरक्षण एवं संवर्धन की समीक्षा की

जल संरक्षण की दिशा में जल स्रोत बचाव एवं जल जागरूकता अभियान चलाने के दिए निर्देश

 

गरियाबंद(गंगा प्रकाश)। कलेक्टर दीपक अग्रवाल ने आज कलेक्ट्रेट सभा कक्ष में जल शक्ति अभियान के तहत जिले में जल संरक्षण, संवर्धन एवं वृक्षारोपण के लिए कार्य योजना की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने बैठक में जल संरक्षण के लिए विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे प्रयास एवं कार्य योजनाओं की जानकारी ली। साथ ही केन्द्र सरकार द्वारा जल संरक्षण के लिए चलाए जा रहे जल शक्ति अभियान के अंतर्गत किए जा रहे गतिविधियों की भी जानकारी ली। कार्यपालन अभियंता जल संसाधन विभाग श्री एस के बर्मन ने बैठक में बताया कि जल संरक्षण के लिए जिले में विभिन्न प्रकार की गतिविधियां आयोजित की जा रही है। इसमें महिलाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित की जा रही है। गतिविधियों के माध्यम से लोगों को जल बचाने जागरूक किया जा रहा है। कलेक्टर श्री अग्रवाल ने जल स्रोतों के बचाव एवं वाटर लेवल बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश अधिकारियों को दिए। साथ ही वर्षा जल बचाव के लिए रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी शासकीय भवनों में लगाने के निर्देश दिए। इसके अलावा आमजनों को भी अपने घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिए प्रेरित करने को कहा। उन्होंने जल स्रोतों के नियमित रखरखाव एवं जल बचाव के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिए। इस दौरान बैठक में जिला पंचायत सीईओ जी.आर. मरकाम, जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता एस.के बर्मन, पीएचई के कार्यपालन अभियंता विप्लव घृतलहरे, पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन अभियंता रामेश्वर सिंह, कृषि विभाग के उप संचालक श्री चंदन रॉय एवं अन्य विभाग के अधिकारीगण मौजूद रहे।

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि जिले के महात्मा गांधी नरेगा योजनान्तर्गत जिले में विगत 02 वर्षाे में 75 अमृत सरोवर, 326 तालाब निर्माण (सामुदायिक एवं व्यक्तिगत), तालाब गहरीकरण के कुल 327 कार्य डबरी निर्माण के कुल 77 कार्य, चेकडेम 38 कार्य, कूप निर्माण 94 कार्य, तथा सोकपिट के 3448 कार्य एवं वाटर शेड के साथ – साथ सिंचाई नाली निर्माण कार्य किया गया है। इसके अलावा जल संवर्धन के लिए तालाब निर्माण कार्य से सिंचाई, मछली पालन एवं जल संवर्धन का कार्य किया जा रहा है। चेकडेम निर्माण के तहत लिफ्ट इरिगेशन के माध्यम से कृषि भूमि का सिंचाई किया जा रहा है। जिससे पानी के रुकने से भूमिगत जलस्तर पर भी सुधार हो रहा है। हैंडपंप एवं अन्य जल निकास के अंतिम बिन्दु पर स्वच्छ भारत मिशन एवं नरेगा के माध्यम से जिले में सोकपिट का निर्माण किया गया है।

कलेक्टर ने कहा की पहले जल स्रोत के रूप में उपयोग होने वाले ऐसे संरचनाएं जिसमें अब पानी कम हो गया हो, ऐसे जल संरचनाओं की पहचान कर वाटर रिचार्ज एक्टिविटी संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कम पानी वाले क्षेत्रों खासकर देवभोग क्षेत्र में विशेष कार्य करने के निर्देश दिए। जिससे पानी की कमी वाले इलाकों में राहत मिल सके जी। उन्होंने सभी अधिकारियों को जल संरक्षण के कार्यों को गंभीरता पूर्वक संचालित करने तथा जल जागरुकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। केंद्र सरकार एवं राज्य शासन द्वारा चलाए जा रहे जल संचय एक जनभागीदारी अभियान के तहत जिले के सभी जल स्त्रोतों के संरचनाओं के लिए संबंधित विभाग समन्वय के साथ कार्य योजना बनाकर कार्य करें। उन्होंने इस कार्य को गंभीरता पूर्वक करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कृषि एवं कृषि विज्ञान केन्द्र के अधिकारियों को कहा कि गांवों में जा-जाकर धान के बदले अन्य फसल जैसे दलहल, तिलहन सहित अन्य फसल लेने के बारे में उन्हें जानकारी देते हुए उन्हें समझाईश दे। पीएचई के कार्यपालन अभियंता ने जल स्त्रोत स्थिति के बारे में बताया कि जिले के 666 ग्राम पंचायतों में 10 हजार 143 हेंडपम्प स्थापित है। 874 नल जल योजना, 342 सिंगल फेस पावर पंप एवं 460 सोलर पंप स्थापित है। वन विभाग द्वारा बताया गया कि वर्षा ऋतु के दौरान विभिन्न विभागों के समन्वय से 13 लाख 62 हजार पौधों का रोपण किया जाएगा। कृषि विभाग द्वारा बताया कि जल संर्वधन संचालित योजना के तहत डब्ल्यू डी सी- पीएमकेएसवाय 2.0 के तहत देवभोग विकासखण्ड के 31 ग्रामों तथा गरियाबंद विकासखण्ड के 11 ग्रामों में कार्य किये जायेंगे। इसके अलावा पौध रोपण, कूप निर्माण, भूमि सुधार, मेंढ़ निर्माण, चेक डेम तथा डबरी निर्माण, तालाब जीर्णोद्धार, नाला निर्माण एवं सिंचाई नाली निर्माण करायें जायेंगे। जल संसाधन विभाग द्वारा मई माह तक पानी से गाद निकालना सफाई कार्य, जीर्णोद्धार एवं मरम्मत कार्य, छोटी नदी-नालों सहित अन्य कार्य कराये जायेंगे। इसके अलावा शासकीय कार्यालय भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग का कार्य कराये जायेंगे।


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