रायपुर(गंगा प्रकाश)। भाजयुमो कार्यकर्ताओं अपने हाथों में पोस्टर लिए हुए थे जिस पर लिखा था ‘अंकिता हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं’ झारखंड के दुमका जिले में पिछले महीने एक व्यक्ति ने अंकिता को आग के हवाले कर दिया था।झारखंड में सरकार के उलटफेर के डर से सत्तारूढ़ दल ने अपने विधायक छत्तीसगढ़ के रायपुर में भेज दिए हैं। यहां सभी विधायक एक रिजॉर्ट में ठहरे हुए हैं। वहीं शुक्रवार को रिजॉर्ट के बाहर काफी हांगामा देखने को मिला, यहां भारतीय जनता पार्टी की युवा शाखा के 40 से अधिक कार्यकर्ता रिसॉर्ट के सामने विरोध प्रदर्शन करने पहुंच गए जिनको हिरासत में ले लिया गया।

अंकिता हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं

भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ता दोपहर करीब तीन बजे नवा रायपुर में मेफेयर गोल्फ रिसॉर्ट के प्रवेश द्वार पर पहुंचे। यहां भाजयुमो कार्यकर्ताओं अपने हाथों में पोस्टर लिए हुए थे जिस पर लिखा था ‘अंकिता हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं’ झारखंड के दुमका जिले में पिछले महीने एक व्यक्ति ने अंकिता को आग के हवाले कर दिया था।

झारखंड के विधायकों के लिए शराब परोस रही सरकार

भाजयुमो राज्य इकाई के अध्यक्ष अमित साहू ने आरोप लगाया कि झारखंड में अराजकता है और कानून-व्यवस्था की स्थिति चरमरा गई है। लड़कियां अब सुरक्षित नहीं हैं। सत्तारूढ़ यूपीए गठबंधन के विधायक रायपुर में पिकनिक मना रहे हैं। छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार जिसने राज्य में शराबबंदी लागू करने का वादा किया था, वह झारखंड के विधायकों के लिए शराब परोस रही है। 

भाजयुमो के 41 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया

एक अधिकारी ने कहा कि भाजयुमो के 41 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है और उन्हें एक बस में राखी पुलिस थाने ले जाया गया जहां से उन्हें बिना शर्त रिहा कर दिया गया। झारखंड मुक्ति मोर्चा कांग्रेस-राष्ट्रीय जनता दल गठबंधन ने पड़ोसी राज्य झारखंड में 30 अगस्त को अपने 32 विधायकों को राज्य में चल रहे राजनीतिक संकट के बीच भाजपा के संभावित प्रयास को विफल करने के लिए रायपुर शिफ्ट कर दिया था।बुधवार को चार विधायक जो मंत्री भी हैं, गुरुवार की कैबिनेट बैठक में भाग लेने के लिए रांची वापस चले गए, जबकि रांची के एक अन्य विधायक रिसॉर्ट में अपने सहयोगियों के साथ यहां पहुंचे।

हेमंत सोरेन की कुर्सी पर लटकी तलवार

लाभ के पद के मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को विधानसभा से अयोग्य ठहराने की भाजपा की याचिका के बाद, चुनाव आयोग ने 25 अगस्त को राज्य के राज्यपाल रमेश बैस को अपना फैसला भेजा। हालांकि चुनाव आयोग के फैसले को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन ऐसी अटकलें हैं कि चुनाव आयोग ने एक विधायक के रूप में मुख्यमंत्री की अयोग्यता की सिफारिश की थी।


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