राज्य शासन को 82 लाख से भी ज्यादा के राजस्व का हुआ नुकसान

अशोक अग्रवाल

दुर्ग (गंगा प्रकाश) जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र दुर्ग के हैरतअंगेज करतूत से राज्य शासन को मिलने वाले राजस्व का बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। इसे भ्रष्टाचार का एक अनूठा उदाहरण माना जा सकता है जिसमें भारी औद्योगिक क्षेत्र में 90 लाख से भी ज्यादा कीमत की लगभग ढाई एकड़ भूमि में स्थित बंद उद्योग को खाली भूखंड करार देकर महज 8 लाख 28566 रुपए में आबंटित किया गया है। इससे राज्य शासन को 82 लाख रुपए से भी ज्यादा के मिलने वाले राजस्व का नुकसान उठाना पड़ा है।

भारी औद्योगिक क्षेत्र हथखोज में नियम कायदे को ताक पर रख भवन के साथ बाउण्डरीवाल से घिरे भूखंड का आबंटन किया गया है। नियमत: बंद हो चुके औद्योगिक भूमि का आबंटन नहीं बल्कि नीलामी होती है। लेकिन भारी औद्योगिक क्षेत्र के ढाई एकड़ क्षेत्रफल की भूखंड क्रमांक 19 सी के मामले में जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र ने छत्तीसगढ़ भू आबंटन अधिनियम 2015 में लागू प्रावधान की धज्जियां उड़ाकर रख दिया है। इससे आबंटन प्रक्रिया संदेह के दायरे में आ गई है। वहीं मामले में भारी लेनदेन होने की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक भूखंड क्रमांक 19 सी को हाल ही में अजय कुमार अग्रवाल के स्वामित्व वाली अजय इंडस्ट्रीज को आबंटित किया गया है। इसके लिए जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र ने अजय इंडस्ट्रीज की ओर से 24 नवंबर 2010 को दिए आवेदन के हवाले से 8 लाख 28 हजार 566 रुपए का आशय पत्र जारी किया था। जिसे अजय इंडस्ट्रीज की ओर से जमा करा दिया गया है। इसी भूखंड के लिए जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र ने 16 जनवरी 2020 को श्री कृष्णा इंडस्ट्रीज के भागीदार के. एस. बेदी को 90 लाख 74 हजार 420 रुपए का आशय पत्र जारी किया था। इसके आधार पर श्री कृष्णा इंडस्ट्रीज के भागीदार के. एस. बेदी ने पूरी रकम जमा करा दिए। लेकिन 23 जून 2020 को उच्च न्यायालय में प्रकरण लंबित होने का हवाला देकर आबंटन प्रक्रिया को रद्द करते हुए के. एस. बेदी को उनकी जमा कराई गई रकम लौटा दी गई।

इस पूरे मामले में खासबात यह है कि जिस भूखंड का आबंटन करने श्री कृष्णा इंडस्ट्रीज से 90 लाख 74 हजार 420 रुपए जमा कराए गए थे। उसी भूखंड को महज 8 लाख 28 हजार 566 रुपए में अजय इंडस्ट्रीज को आबंटित कर दिया गया है। इस तरह से कुल 82 लाख 45 हजार 854 रुपए के राजस्व का नकारात्मक असर राज्य के सरकारी खजाने पर पड़ा है। कथित तौर पर इस आबंटन के लिए जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र के जिम्मेदार अधिकारी उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देकर टाल मटोल कर रहे हैं। जबकि एक अन्य प्रकरण में उच्च न्यायालय के जारी आदेश में ऐसा कोई उल्लेख नहीं है कि भूखंड क्रमांक 19 सी अजय इंडस्ट्रीज को पूर्व के लागू दर पर आबंटित किया जाए। वहीं छत्तीसगढ़ भू आबंटन अधिनियम 2015 में स्पष्ट लिखा है कि पूर्व में प्रचलित नियमों के अंतर्गत उद्योग संचालनालय एवं सीएसआईडीसी में भूमि आबंटन हेतु लंबित समस्त आवेदन नए नियम लागू होने की दिनांक से निरस्त मानी जाएगी। इस आधार पर 24 जनवरी 2010 को दिए गए आवेदन पर अजय इंडस्ट्रीज को वर्तमान प्रचलित दर की अनदेखी कर पुराने दर से भूखंड आबंटित किया जाना भ्रष्टाचार होने की संभावना को सच साबित करता है।

यहां पर यह बताना भी लाजिमी होगा कि भूखंड क्रमांक 19 सी पूर्व में स्वास्तिक स्टील नामक उद्योग को आबंटित किया गया था। लिहाजा भूखंड में बाउण्ड्रीवाल के साथ एक भवन भी निर्मित है। नियमों के अनुसार जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र खाली पड़ी भूखंड का आबंटन करती है। वहीं पूर्व में किसी उद्योग को आबंटित भूखंड का आबंटन किसी कारणवश निरस्त होता है तो उसका पुनः आबंटन नहीं होता बल्कि नीलामी प्रक्रिया अपनाई जाती है। लेकिन अजय इंडस्ट्रीज को भूखंड क्रमांक 19 सी देने में आबंटन प्रक्रिया अपनाकर जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र ने नियमों से खिलवाड़ किया है।


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