अरविन्द तिवारी 

नई दिल्ली (गंगा प्रकाश)- भारत अब से तीन दिन बाद यानि एक दिसंबर से इतने बड़े समूह , इतने सामर्थ्यवान समूह की अध्यक्षता करने जा रहा है। जी -20 की अध्यक्षता हमारे लिये एक बड़ा मौका बनकर आई है। भारत के लिये , हर भारतवासी के लिये ये इसलिये भी विशेष हो जाता है , क्योंकि ये जिम्मेदारी भारत को आजादी के अमृत काल में मिली है।हमें इस मौके का पूरा उपयोग करते हुये विश्व कल्याण पर ध्यान केंद्रित करना है , देश की उभरती शक्ति की ओर पूरा विश्व उम्मीदों से देख रहा है।चाहे शांति हो या एकता , पर्यावरण से लेकर संवेदनशीलता की बात हो या फिर सतत विकास की , भारत के पास इनसे जुड़ी चुनौतियों का समाधान है। हमने एक दुनियां , एक एक परिवार ओर एक भविष्य की जो थीम दी है , उससे वसुधैव कुटुम्बकम के लिये हमारी प्रतिबद्धता जाहिर होती है। 

              उक्त बातें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 95 वें संस्करण में देशवासियों को संबोधित करते हुये कही। उन्होंने कहा कि हम बहुत तेजी से मन की बात के शतक की तरफ बढ़ रहे हैं। ये कार्यक्रम मेरे लिये 130 करोड़ देशवासियों से जुड़ने का माध्यम है। आज के कार्यक्रम की शुरुआत मैं एक अनूठे उपहार की चर्चा के साथ करना चाहता हूं। तेलंगाना के राजन्ना सिर्सिल्ला जिले में एक बुनकर भाई हैं – येल्धी हरिप्रसाद गारू। उन्होंने मुझे अपने हाथों से जी -20 का यह लोगो बुन करके भेजा है , ये शानदार उपहार देखकर मैं हैरान रह गया। मोदी ने कहा कि हरिप्रसाद जी ने जी-20 के लोगो के साथ ही मुझे चिट्ठी भेजी है। इसमें उन्होंने लिखा है कि अगले साल इस सम्मेलन की मेजबानी करना भारत के लिये गौरव की बात है। देश की इस उपलब्धि की खुशी में उन्होंने लोगो अपने हाथों से तैयार किया है। बुनाई की ये प्रतिभा उन्हें अपने पिता से विरासत में मिली है। पीएम ने देश के युवाओं से जी-20  सम्मेलन से जुड़ने की अपील करते हुये कहा कि युवा अपने टी -शर्ट पर जी -20 का लोगो बनाकर इससे जुड़ें। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में जी -20 से जुड़े अनेक कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। इस दौरान दुनियां के अलग-अलग हिस्सों से लोगों को आपके राज्यों में आने का मौका मिलेगा। मुझे भरोसा है कि आप अपने यहां की संस्कृति के विविध और विशिष्ट रंगों को दुनियां के सामने लायेंगे। स्पेस सेक्टर के बारे में बात करते हुये पीएम मोदी ने कहा कि इस सेक्टर में भारत अपनी सफलता पड़ोसी देशों से भी साझा कर रहा है। कल ही भारत ने एक सैटेलाइट लॉन्च किया , इसे भारत और भूटान ने मिलकर बनाया था। ये सैटेलाइट बहुत ही अच्छे रिजॉल्यूशन वाले फोटो भेजेगा और इससे भूटान को अपने प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन में मदद मिलेगी। ड्रोन्स पर बात करते हुये पीएम मोदी ने कहा कि जब हम टेक्नोलॉजी से जुड़े इनोवेशन की बात कर रहे हैं तो ड्रोन को कैसे भूल सकते हैं , इस क्षेत्र में भी भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। कुछ दिनों पहले हमने देखा कि कैसे हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में ड्रोन के जरिये सेब ट्रांसपोर्ट किये गये। प्रधानमंत्री ने कहा हाल ही में स्वदेशी स्पेस स्टार्ट-अप के विक्रम-एस रॉकेट ने जैसे ही ऐतिहासिक उड़ान भरी , हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो गया। यह भारत में प्राइवेट स्पेस सेक्टर के लिये एक युग के उदय का प्रतीक है। ये देश में आत्मविश्वास से भरे एक नये युग का आरंभ है। आप कल्पना कर सकते हैं, जो बच्चे कभी हाथ से कागज का हवाई जहाज बनाकर उड़ाया करते थे , उन्हें अब भारत में ही हवाई जहाज बनाने का मौका मिल रहा है। उन्होंने कहा कि कला , संगीत और साहित्य से हमारा लगाव ही मानवता की असली पहचान है। हम भारतीय हर चीज में संगीत तलाश ही लेते हैं। चाहे वह नदी की कलकल हो , बारिश की बूंदें हों , पक्षियों का कलरव हो या फिर हवा का गूंजता स्वर , हमारी सभ्यता में संगीत हर तरफ समाया हुआ है। हमारी सभ्यता में संगीत हर तरफ समाया हुआ है। संगीत हमारे समाज को भी जोड़ता है। संगीत की हमारी विधाओं ने ना केवल हमारी संस्कृति को समृद्ध किया है , बल्कि दुनियाभर के संगीत पर अपनी अमिट छाप भी छोड़ी है। भारतीय संगीत की ख्याति विश्व के कोने-कोने में फैल चुकी है।नागा संस्कृति के बारे में बात करते हुये पीएम ने कहा कि जो खूबसूरत आयाम धीरे-धीरे खोने लगे थे उन्हें लिडी क्राउ संस्था ने पुनर्जीवित करने का काम किया है। उदाहरण के लिये इस संस्था ने नागा संगीत की एल्बम लॉन्च करने का काम शुरू किया है। पीएम मोदी ने आगे कहा कि झारखंड के संजय कश्यप को अच्छी पुस्तकों की कमी का सामना करना पड़ा था ,वो अब झारखंड के कई जिलों में बच्चों के लिए लाइब्रेरी मैन बन गये हैं। उन्होंने झारखंड के कई जिलों के बच्चों के लिये लाइब्रेरी खोल दी है।


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