रिपोर्ट:मनोज सिंह ठाकुर
रायपुर(गंगा प्रकाश)।
छत्तीसगढ़ में ऐसा शराब घोटाला जो इसके पहले देश में कहीं नहीं हुआ… छत्तीसगढ़ में पैसों की लूट की ये योजना पूरे देश में आज तक किसी ने नहीं बनाई … पैसों को लूटने के लिए छत्तीसगढ़ में गज़ब का घोटाला किया गया और ये पूरा पैसा छत्तीसगढ़िया लोगों से ही लूटा गया है।दिल्ली में शराब घोटाला आपको देश के सभी चैनल में दिखेगा पर छत्तीसगढ़ में हुए शराब घोटाले की खबरें नहीं दिखेंगी? जो सरकार के दाग को मिटाने के लिए और अपने आकाओं को बचाने के लिए दिल्ली में बैठे बड़े-बड़े मीडिया हाउसों को मैनेज करने का काम करती है।घोटालों पर पर्दा डालने के लिए बड़े मीडिया हाउस के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के खबरों को दिखाने वाले उनके प्रभारी ओबलाइज होकर लाल हो गए हैं।किसको कितना और किस तरह का लाभ दिया गया, ये सबको पता है।बहरहाल अब बात करते हैं देश के सबसे बड़े शराब घोटाले की …कैसे लूटा छत्तीसगढ़िया को उनकी ही चुनी हुई ईमानदारी का दावा करने वाली सरकार, नेताओं और छत्तीसगढ़ के अधिकारियों ने … जब छत्तीसगढ़ में शराबियों के साथ हुए इस महाघोटाला को सुनेंगे तो इसके सामने दिल्ली के शराब घोटाले के भ्रष्टाचारी नेता और अधिकारी बहुत छोटे नज़र आएंगे कैसे जनता के पैसों को लूट कर चुनावी प्रचार और नेताओं अधिकारियों की जेब भरने में लगाया गया हैं।छत्तीसगढ़ में शराब का सारा कारोबार राज्य सरकार ही चलाती हैं।यहां 800 शराब की दुकानें हैं।यहां प्राइवेट शराब की दुकानें खोलने की इजाजत नहीं है।यहां बिकने वाली शराब का स्टॉक छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) करता है।साथ ही शराब दुकान चलाने, बोतल बनाने और कैश कलेक्शन जैसे काम में लगने वाले लोगों के लिए भी टेंडर जारी करता है..खेल यहीं से शुरू हुआ।ED ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में 2 हज़ार करोड़ से अधिक का भ्रष्टाचार किया गया।एक सिंडीकेट बनाया गया जो इस पूरे नेक्सस को संचालित कर रहा था।छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले में वो तरीके क्या हैं जिससे इतना बड़ा भ्रष्टाचार किया गया।कैसे इन भ्रष्ट लोगों ने अपने ही राज्य के लोगों को लूटा है।बताते चलें कि छत्‍तीसगढ़ की सियासत में भूचाल लाने वाले शराब घोटले को लेकर दर्ज हुए FIR में बड़े खुलासे हुए हैं। FIR से यह भी पता चलता है कि, यह घोटला हुआ कैसे। ईडी की सूचना पर जिन लोगों के नाम पर एफआईआर दर्ज की गई है शराब घोटाले में उनकी भूमिका क्‍या रही, यह भी पता चला है। इस काली कमाई का कितना हिस्सा किस नेता, मंत्री और अफसरों को किस तरह से मिले इस बात का खुलासा भी FIR से होता है। इतना ही नहीं बल्कि FIR में यह भी दर्ज है कि, इस पैसे को नेताओं, अफसरों ने कहां-कैसे और किसके नाम पर निवेश किया, इन सभी प्रश्‍नों के जवाब एफआईआर में मौजूद हैं।बताते चले कि शराब की बिक्री के लिए भाजपा सरकार द्वारा बनाई गई नई आबकारी नीति में संशोधन कर कांग्रेस सरकार ने छत्‍तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले को अंजाम दिया। पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने नियम बनाया था कि सभी एजेंसियों से शराब की खरीदी शासन द्वारा की जाएगी और इसे ही दुकानों में बेचा जाएगा, लेकिन कांग्रेस सरकार के इशारे पर अफसरों ने इसमें संशोधन करते हुए एफएल 10 लाइसेंस का नियम बनाया और अपनी चहेती तीन फर्मों को इसकी सप्लाई का जिम्मा दे दिया।साथ ही नकली होलोग्राम की भी सप्लाई करवाई गई और इन्हें बाटलों में चिपकाया गया और इसके जरिए बिना स्कैनिंग के बिकने वाली शराब तैयार की गई। प्रतिमाह दो सौ गाड़ियां शराब की सप्लाई इन एजेंसियों के माध्यम से करती हैं और इसमें 800 केस प्रति गाड़ी में अवैध शराब के रखे जाते थे। 560 रुपये प्रति प्रकरण के हिसाब से शराब मंगवाई जाती थी, जिसे 2,880 रुपये एमआरपी पर बेचा जाता था। इसी तरीके से 2019 से लेकर 2022 तक सरकार ने 2,161 करोड़ रुपये के शराब घोटाले को अंजाम दिया।

25 रुपये प्रति टन के हिसाब से 540 करोड़ का कोयला घोटाला

राज्य के कोयला क्षेत्रों रायगढ़, कोरबा, सूरजपुर के खनिज अधिकारियों द्वारा जारी मैनुअल डीओ और परमिट से संबंधित आदेश को आधार बनाकर 25 कोयला ट्रांसपोर्टरों से 25 रुपये प्रति टन के हिसाब से अवैध वसूली की गई, जिसमें नेता सूर्यकांत तिवारी से लेकर आइएएस समीर बिश्नोई, सौम्या चौरसिया के साथ जिलों के खनिज अधिकारियों से लेकर कांग्रेस के नेताओं, मंत्री और विधायकों की भूमिका की पूरी जानकारी दी है। एफआइआर के अनुसार इसमें सबसे ज्यादा 52 करोड़ रुपये रामगोपाल अग्रवाल को, 36 करोड़ रुपये मुख्यमंत्री सचिवालय की तत्कालीन उप सचिव सौम्या चौरसिया को, बिश्नोई को 10 करोड़ और रानू साहू को साढ़े पांच करोड़ से ज्यादा दिए जाने का उल्लेख है।

शराब घोटाला का मास्टर माइंड

इस पूरे प्रकरण में अनिल टुटेजा, अरुणपति त्रिपाठी और अनवर ढेबर को ही मास्टर माइंड बताया गया है, क्योंकि इनके जरिए ही सिंडीकेट बनाया गया और पूरे घोटाले को अंजाम दिया गया। एफआइआर में शामिल बाकी आइएएस और अन्य सरकारी अफसर और लोग सहयोगी की भूमिका में थे। शराब घोटाला से होने वाली आमदनी का बड़ा हिस्सा इन्हीं तीनों को जाता था।

परिवार के सदस्यों के नाम पर भी निवेश

एफआइआर के अनुसार अनिल टुटेजा, अरुणपति त्रिपाठी और अनवर ढेबर ने शराब घोटाला से प्राप्त रकम को अपने परिवार वालों के नाम पर निवेश किया। टुटेजा ने अपने बेटे यश टुटेजा के नाम पर निवेश किया। वहीं त्रिपाठी ने अपनी पत्नी मंजुला त्रिपाठी के नाम पर फर्म बनाई, जिसका नाम रतनप्रिया मीडिया प्राइवेट लिमिटेड था। वहीं ढेबर ने अपने बेटे और भतीजों की फर्म में पैसे का निवेश किया।

मंत्री कवासी लखमा और सचिव को 50 लाख महीना

एफआइआर में पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड पर टुटेजा, त्रिपाठी और ढेबर के शराब सिंडीकेट को संरक्षण देने का आरोप है। इसके लिए ढांड को सिंडीकेट की तरफ से राशि भी दी जाती थी। वहीं तत्कालीन विभागीय मंत्री कवासी लखमा को हर माह 50 लाख रुपये, विभागीय सचिव आइएएस निरंजन दास को भी सिंडीकेट की ओर से 50 लाख रुपये महीने दिए जा रहे थे।

शराब घोटाले में इनके खिलाफ मामला

अनिल टूटेजा, यश टूटेजा, विवेक ढांड, अनवर ढेबर, पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लकमा, अरुणपति त्रिपाठी, आइएएस निरजंन दास, आबकारी आयुक्त, जनार्दन कौरव, अनिमेश नेताम, विजय सेन शर्मा, अरविंद कुमार पटले, प्रमोद कुमार नेताम, रामकृष्ण मिश्रा, विकास कुमार गोस्वामी, इकबाल खान, नितिन खंडुजा, नवीन प्रताप सिंह तोमर, मंजुश्री कसेर, सौरभ बख्शी, दिनकर वासनिक, आशीष श्रीवास्तव, अशोक कुमार सिंह, मोहित कुमार जायसवाल, नीतू नोतानी, रविश तिवारी, गरीबपाल दर्दी, नोहर सिंह ठाकुर, सोनल नेताम, अरविंद सिंह, अनुराग द्विवेदी, अमित सिंह, नवनीत गुप्ता, पिंकी सिंह, विकास अग्रवाल उर्फ सुब्बू, त्रिलोक सिंह ढिल्लन, नितेश पुरोहित, यश पुरोहित, अभिषेक सिंह, मनीष मिश्रा, संजय कुमार मिश्रा, अतुल कुमार सिंह, मुकेश मनचंदा, विजय भाटिया, आशीष सौरभ, सिद्धार्थ सिंघानिया, बच्चा राज लोहिया, अमित मित्तल, उदयराव, लक्ष्मीनारायण बंसल उर्फ पप्पू बंसल, विधू गुप्ता, दीपक दुआरी, दीपेन चावडा, उमेर ढेबर, जुनैद ढेबर, अख्तर ढेबर, अशोक सिंह, सुमीत मलो, रवि बजाज, अज्ञात कांग्रेस के पदाधिकारी, अन्य आबकारी अधिकारी, विकास अग्रवाल के साथीगण और अन्य के खिलाफ षड्यंत्र रचकर धोखाधड़ी करने की धाराओं में मामला दर्ज किया है।

कोयला घोटाले में ये हैं आरोपित

सौम्या चौरसिया, आइएएस समीर विश्नोई, आइएएस रानू साहू, संदीप कुमार नायक, शिवशंकर नाग, सूर्यकांत तिवारी, मनीष उपाध्याय, रौशन कुमार सिंह, निखिल चंद्राकर, राहुल सिंह, पारख कुर्रे, मुइउद्दीन कुरैशी, विरेंद्र जायसवाल, रजनीकांत तिवारी, हेमंत जायसवाल, जोगेंदर सिंह, नवनीत तिवारी, दीपेश टांक, देवेंद्र डड़सेना, राहुल मिश्रा, रामगोपाल अग्रवाल, देवेंद्र सिंह यादव, शिशुपाल सोरी, रामप्रताप सिंह, विनोद तिवारी, पूर्व मंत्री अमरजीत भगत, चंद्रदेव प्रसाद राय, बृस्पत सिंह, इंदरीस गांधी, गुलाब कमरो, यूडी मिंज, सुनील कुमार अग्रवाल, चंद्रप्रकाश जायसवाल, लक्ष्मीकांत तिवारी नाम हैं। कोयला घोटाला मामले में 11 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका हैं।

छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला कैसे हुआ उजागर… जानें इस मामले की पूरी जानकारी


देश में इन दिनों दो कथित शराब घोटालों की बड़ी चर्चा है। एक देश की राजधानी AAP-शासित दिल्ली के शराब घोटाले की, तो दूसरे कांग्रेस-शासित छतीसगढ़ में 2161 करोड़ के शराब घोटाले की दोनों जगह के शराब घोटाले सियासी मुद्दा बन चुके हैं। दिल्ली और छत्तीसगढ़, दोनों जगह की दोनो राजनैतिक पार्टियां केंद्र सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगा रही हैं। दोनों घोटाले में समानताएं भी हैं, लेकिन असल में दोनों शराब घोटालों में काफी अंतर है।

छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला कैसे हुआ उजागर…?

छत्तीसगढ़ सरकार के करीबी अफसर IAS अनिल टुटेजा, उनके बेटे यश टुटेजा और CM सचिवालय की तत्कालीन उपसचिव सौम्या चौरसिया के खिलाफ आयकर विभाग ने दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में 11 मई, 2022 को याचिका दायर की, जिसमें कहा गया कि छत्तीसगढ़ में रिश्वत, अवैध दलाली के बेहिसाब पैसे का खेल चल रहा है, जिसमें रायपुर महापौर एजाज ढेबर का भाई अनवर धेनर अवैध वसूली करता है।दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में दायर याचिका के आधार पर ED ने 18 नवंबर, 2022 को PMLA Act के तहत मामला दर्ज किया. आयकर विभाग से मिले दस्तावेज के आधार पर ED ने अब तक की जांच, गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के बाद 2161 करोड़ के घोटाले की बात का कोर्ट में पेश चार्जशीट में जिक्र किया है।

कैसे हुआ शराब घोटाला – क्या हैं आरोप…?

ED ने अपनी चार्जशीट में बताया, किस तरह एजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर के आपराधिक सिंडिकेट के ज़रिये आबकारी विभाग में बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ। ED ने चार्जशीट में कहा है कि साल 2017 में अच्छे मकसद से आबकारी नीति में संशोधन कर CSMCL के ज़रिये शराब बेचने का प्रावधान किया गया, लेकिन 2019 के बाद शराब घोटाले के किंगपिन अनवर ढेबर ने अरुणपति त्रिपाठी को CSMCL का MD नियुक्त कराया, उसके बाद अधिकारी, कारोबारी, राजनैतिक रसूख वाले लोगों के सिंडिकेट के ज़रिये भ्रष्टाचार किया गया, जिससे 2161 करोड़ का घोटाला हुआ। ED ने अपनी चार्जशीट में 3 स्तर का घोटाला बताते हुए इसे भाग A, B, C में बांटा है।भाग A के तहत CSMCL के MD अरुणपति त्रिपाठी को अपने पसंद के डिस्टिलर की शराब को परमिट करना था, जो रिश्वत-कमीशन को लेकर सिंडिकेट का हिस्सा हो गए थे। देशी शराब के एक केस पर 75 रुपये कमीशन दिया जाना था, जिसे त्रिपाठी डिस्टिलर और सप्लायर से कमीशन लेकर एक्सेलशीट तैयार करते, किससे कितना कमीशन आया, उसे अनवर ढेबर को दिया जाता था।
भाग B के तहत अनवर ढेबर और अरुणपति त्रिपाठी के सिंडिकेट ने देशी शराब और अंग्रेजी शराब ब्रांड के होलोग्राम बनाकर बेहिसाब शराब CSMCL की दुकानों में बेचीं, जिससे सीधे तौर से राजस्व की राज्य को हानि हुई।
भाग C में डिस्टिलर और ट्रांसपोर्टर से एनुअल कमीशन शामिल है।आपराधिक सिंडिकेट के ज़रिये CSMCL की दुकानों में सिर्फ तीन ग्रुप की शराब बेची जाती थीं, जिनमें केडिया ग्रुप की शराब 52 प्रतिशत, भाटिया ग्रुप की 30 प्रतिशत और वेलकम ग्रुप की 18 प्रतिशत हिस्सा शामिल है।..आइए ये विस्तार से समझते हैं …

शराब घोटाले का पहला तरीका …

हर बोतल पर छत्तीसगढ़ियों से 75 रुपये से लेकर 150 रुपये तक की अवैध वसूली की गई, मल्टीनेश्नल लिकर कंपनियों की दारू महँगे दामों में बेंच कर … असल में मल्टीनेश्नल कंपनियाँ कमीशन नहीं देतीं,भ्रष्टाचार करने के लिए तरीका निकाला गया,इसके लिए सिंडिकेट के जो सप्लायर होते हैं, वो सबसे पहले इन कंपनियों से दारू ख़रीदते हैं और फिर उसी सप्लायर से CSMCL (छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड) ने खरीद की … सप्लायर से पहले कमीशन तय किया जा चुका था, इसलिए CSMCL ने इसी गैंग के निर्देशों के अनुसार सप्लायर से महंगे दामों पर इस मदिरा की आपूर्ति के लिए स्वीकृति दे दी .. इसके बाद इस मदिरा को वास्तविक दाम से अधिक मूल्य पर सरकारी दारू की दुकानों पर पहुंचाया गया … यहां अधिक मूल्य पर ये दारू छत्तीसगढ़ के लोगों को बेंची गई… इस तरह भुक्तभोगी हुआ आम छत्तीसगढ़िया,लूटा गया आम आदमी, जेब कटी आम जनता की।

ED के मुताबिक, CSMCL जो शराब खरीद रही थी, उसके सप्लायर्स वही सिंडिकेट था जो पहले ही हर बोतल पर 75 से 150 रुपये का कमीशन वसूल रहा था…ये कमीशन शराब के ब्रांड के हिसाब से तय किया जाता था…विदेशी शराब की सप्लाई करने वालों से भी कमीशन लिया जाता था जो इनकी काली कमाई में योगदान देती थी.. विदेशी शराब बेचने का लाइसेंस अनवर ढेबर के करीबियों के पास था।

शराब घोटाले का दूसरा तरीका

कच्ची शराब से जबरदस्त उगाही की गई… इसका हिसाब तक नहीं रखा गया कि कितनी देशी शराब छत्तीसगढ़ के लोग गटक गए… ED के अनुसार अनवर ढेबर ने अपने लोगों के साथ मिलकर बेहिसाब तरीके से कच्ची शराब बनाई और उन्हें सरकारी दुकानों के जरिए बेचा… ये पूरा अवैध कारोबार था ..इसलिए इस बेहिसाब पैसा , कच्ची शराब की इस बिक्री का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा गया…ये सारी बिक्री नकद में हुई… इसका एक रुपये भी सरकारी खजाने में जमा नहीं किया गया और सारी रकम सिंडिकेट की जेब में गई…ED की जांच में पता चला है कि 2019 से 2022 के बीच राज्य में 30 से 40 फीसदी अवैध शराब की बिक्री की गई..

शराब घोटाले का तीसरा तरीका…

अब आइए बताते हैं छत्तीसगढ़ में बनने वाली शराब में वहां के डिस्टलरी कारोबारियों से कैसे वसूली की गई … इस मामले में ED ने छत्तीसगढ़ के डिस्टलरी वालों के बयान भी दर्ज किए हैं ..असल में छत्तीसगढ़ में अमूमन देशी शराब और लोकल ब्रांड की दारू चावल के एक प्रोडक्ट किनगी से बनाई जाती है जिसका मूल्य 1000 रुपए प्रति कुंतल होता है ..अब इसमें कमीशन का खेल कैसे खेला जाए तो उसके लिए बनाई गईं शेल कंपनियां … इस काली कमाई को दूध जैसा सफेद करने के लिए ही शेल कंपनियाँ बनाई गईं जिसकी कमान ढिल्लन के हाथ में था… पहले इन कंपनियों ने 1000 रुपये कुंतल के हिसाब से चावल किनगी की खरीद की और फिर उसको छत्तीसगढ़ के डिस्टलरी को 1500 रुपए कुंतल के हिसाब से बेचा… इसमें हर कुंतल में अवैध 500 रुपये के हिसाब से अकूत काली कमाई की गई …ये किसका कमीशन है ? इसी कमीशन का 27 करोड़ रुपये का फिक्स डिपॉजिट का ड्राफ़्ट भी ED के हाथ लगा है …

शराब घोटाले का चौथा तरीका….

एक सालाना कमीशन डिस्टिलर्स से वसूला जाता था .. डिस्टिलरी लाइसेंस हासिल करने और CSMCL की बाजार खरीद में एक तय हिस्सेदारी वसूल की जाती थी ..डिस्टिलर्स उन्हें आवंटित मार्केट शेयर के हिसाब से रिश्वत देते थे.. इसी अनुपात में CSMCL खरीदारी करती थी.. इतना पैसा आखिरकार छत्तीसगढ़ से जा कहां रहा था ..?

ED का कहना है कि चार साल में पूरे दो हजार करोड़ रुपये का घोटाला किया गया…ये पैसा सिर्फ अनवर ढेबर के पास नहीं गया था…तो इस रैकेट का मुखिया कौन था… क्या अपनी कुर्सी बचाने के लिए और देश भर में अपने पार्टी के मूवमेंट को जिंदा रखने के लिए अवैध तरह से ये कमाई की जा रही थी ..? क्या इतने बड़े नेटवर्क का संचालन बिना सरकार की जानकारी के हो रहा था?

ED का कहना है कि अपनी राजनीतिक पहुंच का इस्तेमाल कर आरोपी अनवर ढेबर CSMCL के कमिश्नर और एमडी को भ्रष्टाचार में हमसफ़र बना कर उनकी मदद से CSMCL में विकास अग्रवाल और अरविंद सिंह जैसों को नौकरी दिलवाई… इस तरह से उसने छत्तीसगढ़ के शराब कारोबार की पूरी प्रक्रिया पर कब्जा कर लिया..

ED के अनुसार अभी तक कुल 180 करोड़ की चल-अचल संपत्ति जब्त हो चुकी है.. जिन संपत्तियों को जब्त किया गया है कि उनमें अनिल टुटेजा (ये वही अधिकारी है जिसको भूपेश बघेल ने रमन सरकार के दौरान नान घोटाले का मास्टर माइंड बताया था और भ्रष्टाचारी बता कर खूब राजनीति की थी, आज वही इनका सबसे विशेष अवैध वसूली का चेहरा है) की 12 संपत्तियां हैं, जिनका मूल्य 8.83 करोड़ है।
अनवर ढेबर (शराब घोटाले का मास्टरमाइंड और कांग्रेसी नेता व रायपुर के मेयर एजाज़ ढेबर का भाई) की 98.78 करोड़ रुपये की 69 संपत्तियों को जब्त किया गया है..विकास अग्रवाल की 1.54 करोड़ की तीन संपत्तियां, अरविंद सिंह की 11.35 करोड़ की 32 संपत्तियां, अरुणपति त्रिपाठी की 1.35 करोड़ रुपये की एक संपत्ति को जब्त किया गया है..ईडी का दावा है की बीते चार सालों में 2000 करोड़ रुपये की काली कमाई की गई है ..ईडी ने 2019 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ में शराब की खरीद और बिक्री में 2000 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया है..
घोटाले के आरोप में ईडी अनवर ढेबर, नीतेश पुरोहित, त्रिलोक सिंह ढल्लन और अरुणपति त्रिपाठी को गिरफ्तार कर चुकी है..


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