विजयादशमी पर शस्त्र पूजन का धार्मिक महत्व,पुलिस विभाग क्यों करता है शस्त्र पूजन?

मैनपुर/गरियाबंद(गंगा प्रकाश):-असत्‍य पर सत्‍य की जीत और अधर्म पर धर्म की जीत का पर्व दशहरा आज पूरे देश में मनाया जा रहा है। इस दिन आज कई वर्षों से शस्‍त्रों की पूजा की परंपरा चली आ रही है।आश्विन मास की नवमी अर्थात नवरात्रि समाप्त होने के बाद विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है। दरअसल यह पर्व भगवान श्री राम की लंकापित रावण पर जीत का उत्सव है तो दूसरी ओर यह हमारी एतिहासिक परंपराओं के निर्वहन का त्यौहार भी है।हर साल विजयादशमी का पर्व बड़ी धूमधाम से बनाया जाता है। इस दिन शस्त्र पूजन का विधान है ये प्रथा कोई आज की नहीं है। बल्कि सनातन धर्म से ही इस परंपरा का पालन किया जाता है। इस दिन शस्त्रों के पूजन का खास विधान है।विजयादशमी पर्व यानि बुराई पर अच्छाई की जीत का त्यौहार,अधर्म पर धर्म की जीत का त्यौहार, इस त्यौहार पर शस्त्र पूजा का खास विधान है यहां तक कि हमारी भारतीय सेना व समाज के प्रखर पहरेदार(पुलिस)विभाग में विजयादशमी के पर्व पर शस्त्र पूजन किया जाता है।मान्यता अनुसार विजयादशमी के दिन जो भी कार्य शुरु किया जाए उसमें सफलता निश्चित रूप से मिलती है। आज भी शस्त्र पूजन की ये परंपरा प्राचीन काल से जारी है। उस वक्त भी योद्धा युद्ध पर जाने के लिए दशहरे के दिन का चयन करते थे।इस दिन पूजन कार्य करते है 9 दिनों की शक्ति उपासना के बाद 10 वें दिन जीवन के हर क्षेत्र में विजय की कामना के साथ चंद्रिका का स्मरण करते हुए शस्त्रों का पूजन किया जाता है विजयादशमी के शुभ अवसर पर शक्तिरूपा दुर्गा, काली की आराधना के साथ-साथ शस्त्र पूजा की परंपरा सदियों से चली आ रही है। पुलिस विभाग द्वारा भी अपने शस्त्रों का पूजन किया जाता है।हमारे देश में विजयादशमी के शुभ अवसर पर देवी पूजा के साथ-साथ शस्त्र पूजा की परंपरा भी कायम हैं। यह शस्त्र पूजा दशहरा के दिन ही क्यों की जाती है, इस संबंध में अनेक कथाएँ प्रचलित हैं। एक कथा के अनुसार राम ने रावण पर विजय प्राप्त करने हेतु नवरात्र व्रत किया था, ताकि उनमें शक्ति की देवी दुर्गा जैसी शक्ति आ जाए अथवा दुर्गा उनकी विजय में सहायक बनें। चूँकि दुर्गा शक्ति की देवी हैं और शक्ति प्राप्त करने हेतु शस्त्र भी आवश्यक है, अतऱ राम ने दुर्गा सहित शस्त्र पूजा कर शक्ति संपन्न होकर दशहरे के दिन ही रावण पर विजय प्राप्त की थी। तभी से नवरात्र में शक्ति एवं शस्त्र पूजा की परंपरा कायम हो गई।  ऐसी मान्यता है कि इंद्र भगवान ने दशहरे के दिन ही असुरों पर विजय प्राप्त की थी। महाभारत का युद्ध भी इसी दिन प्रारंभ हुआ था तथा पांडव अपने अज्ञातवास के पश्चात इसी दिन पांचाल आए थे, वहाँ पर अर्जुन ने धनुर्विद्या की निपुणता के आधार पर, द्रौपदी को स्वयंवर में जीता था। ये सभी घटनाएँ शस्त्र पूजा की परंपरा से जुड़ी हैं।राजा विक्रमादित्य ने दशहरा के दिन ही देवी हरसिद्धि की आराधना, पूजा की थी। छत्रपति शिवाजी ने भी इसी दिन देवी दुर्गा को प्रसन्न करके तलवार प्राप्त की थी, ऐसी मान्यता है। तभी से मराठा अपने शत्रु पर आमण की शुरुआत दशहरे से ही करते थे।महाराष्ट में शस्त्र पूजा आज भी अत्यंत धूमधाम से होती हैं।विजयादशमी पर हमारी पुलिस  ‘शस्त्र पूजन’ करती हैं।इस दौरान पुलिस हवन में आहुति देकर विधि-विधान से शस्त्रों का पूजन करती है। हर साल ‘शस्त्र पूजन’ खास रहता है पुलिस की तरफ ‘शस्त्र पूजन’ हर साल पूरे विधि विधान से किया जाता है। आज के दिन पुलिस विभाग के सभी अधिकारी व कर्मचारी‘शस्त्र पूजन’ में भगवान के चित्रों से सामने ‘शस्त्र’ रखते हैं। दर्शन करने वाले बारी-बारी भगवान के आगे फूल चढ़ाने के साथ ‘शस्त्रों’ पर भी फूल चढ़ाते हैं।इस दौरान शस्त्रों पर जल छिड़क पवित्र किया जाता है।महाकाली स्तोत्र का पाठ कर शस्त्रों पर कुंकुम, हल्दी का तिलक लगाते हैं। फूल चढ़ाकर धूप-दीप और मीठे का भोग लगाया जाता है।विजयादशमी का पर्व जगजननी माता भवानी का की दो सखियों के नाम जया-विजया पर मनाया जाता है। यह त्यौहार देश, कानून या अन्य किसी काम में शस्त्रों का इस्तेमाल करने वालों के लिए खास है।शस्त्रों का पूजन इस विश्वास के साथ किया जाता है कि शस्त्र प्राणों की रक्षा करते है। विश्वास है कि शस्त्रों में विजया देवी का वास है।इसलिए विजयादशमी के दिन पूजन का महत्व बढ़ जाता।दशहरे के दिन देवी दुर्गा के जया और विजया स्वरूप की पूजा का विधान है, जो साधक को जीवन से जुड़ी चुनौतियों पर विजय दिलाने का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। मान्यता है कि जया और विजया के आशीर्वाद से साधक को प्रत्येक क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है।बता दे कि प्रति वर्ष अनुसार इस वर्ष भी आज दशहरा के दिन गरियाबंद  जिले के सभी थानों के अलावा पुलिस लाइन में बुधवार के दिन को शस्त्र की पूजा की गई। सभी थाना के प्रभारियों ने शस्त्र पूजा के लिए विशेष इंतजाम किए थे। मैनपुर थाना सहित जिले के सभी थानों में पूजा पाठ के बाद पुलिस ने दशहरा के दिन काम की शुरूआत की।विश्वकर्मा जयंती के दिन जिस तरह मशीनरी सामान की पूजा पाठ की जाती है। हरियाली के दिन हल व अन्य औजारों की पूजा की जाती है। ठीक उसी तरह दशहरा के दिन पुलिस विभाग भी अपने थानों के शस्त्रों की पूजा पाठ करती है। बुराई पर अच्छाई की जीत के पर्व दशहरा के दिन पुलिस विभाग में शस्त्र पूजा की परंपरा है। परंपरा का निर्वहन करते हुए हर थानों में आज बुधवार को विधि विधान से शस्त्रों की पूजा पाठ कराई गई।गरियाबंद जिला के मैनपुर थाना में जंग खाते शस्त्रों की साफ-सफाई कराकर पूजा स्थल बनाकर उसमें रखा गया।विधि विधान से मंत्रोचार कर पूजा पाठ की गई। पूजा पाठ का दौर तकरीबन एक घंटे तक चला। शस्त्र पूजा के बाद अनुप कुमार गुप्ता एसडीओपी व सूर्यकांत भारद्वाज थाना प्रभारी  ने विजयादशमी के मौके पर सुख शांति और समृद्धि की कामना के साथ ही थाना क्षेत्र की जनता को विजयदशमी पर्व की शुभकामनाएं दी।मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस कर्मियों की भीड़ रही। ज्ञात हो कि कानून व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस को शस्त्र प्रदान कराई जाती है। अमूमन थानों में इंसास प्रदान किया जाता है। मैदानी क्षेत्र के थाने में रखे शस्त्र का उपयोग बहुत कम होता है। ये शस्त्र थानों में केवल शो.पीस बनकर रह जाते हैं। वहीं नक्सल क्षेत्र के शस्त्रों का उपयोग नियमित होता है। मैदानी क्षेत्र में सालों में कभी-कभार शस्त्र का उपयोग होता होगा। दशहरा के दिन इसी बहाने शस्त्रों की साफ-सफाई हो जाती है।अनूप कुमार गुप्ता एसडीओपी,सूर्यकांत भारद्वाज थाना प्रभारी मैनपुर,विनोद सिंह,संतोष ठाकुर,संजय सूर्यवंशी, दीपक साहू,कोमल सोनकर,रविकांत सिंह,डिकेस्वर यादव,तिजऊ राम मोर्य,मिथलेश नागेश,भूपेंद्र साहू,अजित खुटे सहित समस्त पुलिस कर्मीयों पूजा अर्चना कर देवी का आशीर्वाद लिया।

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