गरियाबंद(गंगा प्रकाश)- सिविल लाइन स्थित मैदान में बच्चों कें लिए नगरपालिका द्वारा लगाया गया प्ले किड्स ज़ोन बच्चों को खूब भा रहा है रोज़ सुबह और शाम बच्चे इसका आनंद उठाते नज़र आ रहे ,वही आज रोज़ के दिनचर्या की तरह नगर भ्रमण पर निकले नपा अध्यक्ष गफ़्फ़ू मेमन बच्चों को खेलता देख ख़ुद को रोक ना पाये और वो भी बच्चों के साथ किड्स ज़ोन में खेलते नज़र आये साथ ही बच्चों को चोट ना आय इसके लिए उन्होंने ने तत्काल रेत की व्यवस्था करवाई, श्री मेमन ने कहा आज बच्चों को देख मैं ख़ुद का रोक नहीं पाया अपने शहर की पुरानी बस्तियों में बचपन के दिन याद करते हुए कहा बचपन में गरियाबंद गांधी मैदान के पास एक बालवाड़ी हुआ करती थी उसी बालवाड़ी केंद्र में फिसल पट्टी था जहां मैं दोस्तों के साथ फिसल पट्टी का बहुत मज़ा लिया करता था, , नपा अध्यक्ष ने बच्चों के साथ फिसल पट्टी का आनंद उठाया और बच्चों को नियमित पढ़ाई के साथ-साथ खेलने-कूदने की भी दी सलाह।

मोबाइल के क़ैद से बचपन को दूर रखे परिजन –

मोबाइल आज जिंदगी का अहम हिस्सा हो गया है. सुबह से शाम तक हम मोबाइल और लैपटॉप के बिना चाहे अनचाहे नहीं रह पाते हैं. बड़े तो बड़े बच्चों में भी इसका प्रचलन काफी बढ़ गया है. ऐसे में बच्चों का बढ़ता मोबाइल की लत हमें कई चीजें सोचने पर मजबूर करता है. नपा अध्यक्ष ने खेल ग्राउंड में आए बच्चों के परिजनों बात करते हुए कहा श्री मेमन ने कहा ,हमारा आपका बच्चा, सब मोबाइल की दुनिया में कैद है. वो सुबह उठता है और स्कूल जाने की तैयारी करता है. लेकिन घर से निकलने से पहले किसी भी हालत में मोबाइल पर नजर मारने से बचना नहीं चाहता. मां जूते का फीता बांध रही होती है और कहती है बेटा-लेट हो रहा है जल्दी करो. लेकिन वह छोटा बच्चा घड़ी का समय देखता है और कहता है- अभी 5 मिनट बचे हैं. इस दौरान वह मोबाइल में सिर गड़ाकर कुछ देख रहा होता है. जी हां, आज घर-घर में यही हो रहा है. छीन रहा है बच्चों का बचपन,उन्होंने कहा कि पहले कहावत थी कि “पढ़ोगे लिखोगे तो बनोगे नबाब और खेलोगे कूदोगे तो होगे खराब”, लेकिन वर्तमान समय में यह कहावत पूरी तरह से गलत साबित हुई है। हमारे देश के युवाओं ने खेल से न केवल अपना बल्कि अपने देश का नाम भी रोशन किया है।

बच्‍चे के विकास के लिए घर के अंदर और घर के बाहर, दोनों खेल अनुभव महत्‍वपूर्ण है। लघर के बाहर खेल में भाग लेने वाले बच्‍चों की संख्‍या में कमी आना दर्शाते हैं, घर के बाहर खेल आपके बच्‍चे स्‍वस्‍थ विकास के लिए महत्‍वपूर्ण है।खुले मैदान बच्‍चे को सक्रिय खेल में भाग लेने के अधिक अवसर प्रदान करते हैं,

कहां गए वो दिन जब हम…

याद कीजिए वो दौर… हमारा बचपन. जब हम आप स्कूल से आते थे. बस्ता घर पर पटक कर बैट और बॉल हाथ में थामकर मोहल्ले के मैदान की ओर भागते थे. मां चिल्लाती थी- बेटा खाना खा लो. हम जवाब देते थे- आकर खाऊंगा मां. तब हम घंटों क्रिकेट, फुटबॉल जैसा मैदान में खेले जाने वाला गेम खेलते थे. लेकिन अब दौर बदल गया है. आज बच्चा स्कूल से आता है तो बिना यूनिफॉर्म खोले हाथ में मोबाइल उठाता है और घंटों उसी में सिर गड़ाकर उलझा रहता है.आप सभी अपने बच्चों को खेल के साथ दादा-दादी, नाना-नानी से के साथ भावनात्मक जुड़ाव लाये

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