नई दिल्ली ।  भारत के पास एक मजबूत राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान (अनुसंधान एनआरएफ) होगा,  जिसके एक बार पूरी तरह से परिचालन में आ जाने के बाद अनुसंधान, विकास के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आयेगा और यह संस्थान सार्वजनिक और उद्योग एवं अकादमिक सहित निजी क्षेत्र के एकीकरण में पुल का काम करेगा, केन्द्रीय मंत्री डा. जितेन्द्र सिंह ने आज यहां यह कहा।

मंत्री ने यह टिप्पणी उस समय की जब अमेरिका के राष्ट्रीय विज्ञान संस्थान के निदेशक डा. सेतुरमन पंचनाथन, जो कि इस समय भारत यात्रा पर हैं, ने राष्ट्रीय राजधानी में उनसे मुलाकात की।



केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), राज्य मंत्री प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु उर्जा, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन डा. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि भारत में वैज्ञानिक कौशल की कोई कमी नहीं है, यहां विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास को समर्थन देने और लोगों को अनुसंधान और विकास के लिये प्रेरित करने के उपयुक्त परिवेश की कमी रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और दूरदर्शिता ने यह अनुकूल परिवेश उपलब्ध कराया है जिससे परिदृश्य में क्रांतिकारी बदलाव आया है और भारत आज आगे पहुंचा है।



विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री ने राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति बनाने और निजी क्षेत्र के उद्यमियों की सुविधा के लिये ड्रोन नीति के नियमों में ढील देने संबंधी सरकार के प्रयासों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने अनंसुधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन के माध्यम से भारत में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के सरकार के दृष्टिकोण और योजना पर प्रकार डाला, जो कि किये जा रहे प्रयासों में सहयोग के लिये सेतू का काम करेगा और सार्वजनिक के साथ साथ निजी क्षेत्र इन दोनों दुनिया से सर्वश्रेष्ठ को लायेगा और विश्वस्तरीय प्रौद्योगिकीय नवाचार के विकास के लिये बहुराष्ट्रीय सहयोग करने की दिशा में काम करेगा।

डा. जितेन्द्र सिंह ने निजी क्षेत्र के लिये अंतरिक्ष क्षेत्र को खोलने और उन्हें नवाचार के लिये समर्थन देने पर भी प्रकाश डाला। अंतरिक्ष स्टार्टअप का उदय इसका प्रमाण है और उनके योगदान उल्लेखनीय है। उन्होंने एआर/एमएल, क्वांटम टैक्नालाजी जैसी नई पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों में भारत की प्रगति पर भी प्रकाश डाला और कहा ‘‘नई पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों के मामले में भारत शेष दुनिया के बराबर है।’’

डा. जितेन्द्र सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में वर्तमान में भारत में जिस पैमाने पर अनुसंधान कार्य हो रहे हैं वह भारत को 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से आगे चैथी सबसे बड़ी और उसके बाद दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था और आने वाले दिनों में इससे भी बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में मदद करेगा।  उन्होंने वैज्ञानिक सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों पर भी चर्चा की।

डा. सेतुरमन पंचनाथन ने अनुसंधान और विकास तथा भविष्य की परियोजनाओं और प्रौद्योगिकियों में परिवर्तनकारी बदलाव लाने के भारत के प्रयासों में विश्वास व्यक्त किया।  उन्होंने वैज्ञानिक क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग में निरंतर समर्थन के लिये डा. जितेन्द्र सिंह को बधाई दी। उन्होंने भारत को उसके भविष्य के प्रयासों के लिये शुभकामनायें भी दी।


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