ग्रामीणों का रोजगार, पुनर्वास बसाहट, मुआवजा सिर्फ कागजी पन्नों पर सिमट रही

SECL को सताने लगी कोयला उत्पादन की समस्या, जबरिया नापी सर्वे व मूल्यांकन पड़ेगा भारी

कोरबा (गंगा प्रकाश)। एसईसीएल की गेवरा परियोजना में समाहित हो रहे ग्राम पंचायत अमगांव के स्थानीय भूविस्थापित ग्रामीणों ने नापी सर्वे करने आए secl अधिकारियों का काम रोक दिया। ग्रामीणों ने कहा कि आधा दर्जन ग्रामों के बसाहट, मुआवजा व रोजगार समेत अन्य प्रकरण लंबित हैं और ग्रामीण लगातार अपनी मांगों को लेकर ठोकरें खा रहे हैं। ऐसे में वर्षा के समय जमीनों का नापी करना अनुचित है।

ग्रामीणों ने कहा कि अमगांव पंचायत का बसाहट, मुआवजा रोजगार सहित अन्य सुविधाएँ मसले आज भी एसईसीएल के कागजी पन्नों में सिमट कर रह गई है। गेवरा प्रबंधन के द्वारा लंबे अरसे से मामले का निराकरण नहीं किया गया है। बसाहट को लेकर विस्थापन स्थल पर ना तो समतलीकरण किया गया और नहीं पेड़ पौधों की कटाई। उन्होंने कहा कि अमगांव की मुआवजा न्यायालय में विचाराधीन है।

रोजगार से संबंधित लंबित मामले का समाधान नहीं हुआ है। बेरोजगार दर-दर भटक रहे हैं। स्थानीय भूमि विस्थापित ग्रामीणों ने कहा कि पहले बसाहट, मुआवजा व रोजगार समेत अन्य मामलों का निपटारा प्रबंधन करें, उसके बाद नापी सर्वे कराया जाए। ग्रामीणों के विरोध की वजह से एसईसीएल के अधिकारी नापी सर्वे नहीं कर सकें। 

ऊर्जा धानी संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि नापी सर्वे करने के बजाए पहले लंबित मामले का निराकरण होना चाहिए। उसके बाद ही नापी सर्वे करने के लिए पंचायत के साथ बैठक कर सहमति बना कर आगे कार्रवाई की जानी चाहिए। यदि जबरिया नापी, सर्वे व मूल्यांकन किया जाएगा, तो ग्रामीण विरोध प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।

एसईसीएल की मनमानी, ग्रामीणों की लंबित मांगों को दरकिनार

बता दें कि एसईसीएल के द्वारा लंबे अरसे से स्थानीय भूविस्थापित ग्रामीणों की मांगों को दरकिनार करते हुए उनके जमीनों को बिना सहमति के हड़प लिया जा रहा है। उन्हें रोजगार, पुनर्वास, बसाहट, मुआवजा देने के नाम पर छल पूर्वक धोखाधड़ी करते हुए ग्रामीणों की जमीनों का खनन करते मिट्टी,कोयला उत्खनन किया जा रहा है। ग्रामीणों की पूर्व के लंबित प्रकरणों का निराकरण नहीं किया जा रहा है जिससे कि नाराज ग्रामीणों ने विरोध जताते हुए 1 इंच भूमि एसईसीएल को देना नहीं चाहती। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि ग्रामीणों में आक्रोश का माहौल है एवं एसईसीएल उतारू है कि ग्रामीणों की जमीनों को कैसे अपने कब्जे में किया जाए। जिससे कि कोयला उत्पादन में बढ़ोतरी हो सके। एक प्रकार का एसईसीएल के द्वारा गरीब ग्रामीणों को धोखे में रखकर रोजगार,बसाहट, पुनर्वास, मुआवजा एवम् अन्य लंबित प्रकरण को दरकिनार करते हुए उनका शोषण किया जा रहा है।

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