ब्रेकिंग न्यूज़: फिंगेश्वर जनपद पंचायत में गरमाया विवाद: संकाय सदस्य अभय प्रकाश साहू पर गंभीर आरोप, मनरेगा कर्मचारियों ने जताया तीव्र आक्रोश — बहिष्कार की चेतावनी

 

गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। प्रदेश सरकार द्वारा ‘सुशासन तिहार’ जैसे आयोजनों के माध्यम से जनता तक सीधे पहुंचने की पहल भले ही सराहनीय हो, लेकिन जब उन्हीं शिविरों में अधिकारी असंवेदनशील, अपमानजनक और डराने-धमकाने वाली भाषा का उपयोग करें, तो यह प्रशासनिक आचरण पर गहरे सवाल खड़े करता है।

ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला गरियाबंद जिले की जनपद पंचायत फिंगेश्वर में सामने आया है, जहां संकाय सदस्य अभय प्रकाश साहू पर मानव गरिमा, महिला सम्मान और कार्यालयीन शिष्टाचार की गंभीर अवहेलना के आरोप लगे हैं।

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घटना का सिलसिला: पीओ के लिए पानी माँगना बना विवाद का कारण

दिनांक 20 मई 2025 को ग्राम पंचायत भवन में सुशासन तिहार समाधान शिविर का आयोजन किया गया था। शिविर के संचालन में तैनात तकनीकी सहायक अल्लेसदेव प्रसाद ने जब प्रोजेक्ट ऑफिसर (पीओ) के लिए पानी की व्यवस्था करने की बात कही, तो अभय साहू ने अत्यंत अभद्र, अशिष्ट और सार्वजनिक रूप से अपमानजनक टिप्पणी कर दी।

इस व्यवहार को लेकर मौके पर उपस्थित डेटा एंट्री ऑपरेटर हरवेन्द्र साहू और सहायक ग्रेड-03 ईश्वर यदु ने भी पुष्टि की कि संकाय सदस्य की भाषा और व्यवहार व्यावसायिक मर्यादा और सामान्य नैतिकता के हर स्तर को पार कर चुकी थी।

कर्मचारियों की पीड़ा: यह अपवाद नहीं, बल्कि व्यवहार का स्थायी हिस्सा

मनरेगा स्टाफ का कहना है कि यह कोई पहली या आकस्मिक घटना नहीं है, बल्कि अभय साहू की कार्यशैली लगातार आक्रामक, डरावनी और अमर्यादित रही है। उनके अनुसार, वे अक्सर मनरेगा कर्मचारियों को डाँट-फटकार के नाम पर सार्वजनिक रूप से अपमानित करते हैं।

कई कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि साहू स्वयं को ‘जनपद का असली निर्णयकर्ता’ बताते हैं। उन्होंने यह कहते हुए कर्मचारियों को धमकाया —

“जनपद सीईओ मेरे कहे में हैं, जो मैं बोलूंगा वही होगा। तुम लोगों की सीआर (चरित्र प्रतिवेदन) बिगाड़ दूँगा।”

इस प्रकार के कथन न केवल अहंकार का परिचायक हैं, बल्कि यह दर्शाते हैं कि संबंधित अधिकारी शासन-प्रशासन के नियमों को अपने प्रभाव में लेकर मनमानी पर उतारू हैं।

महिला और दलित कर्मचारी विशेष रूप से निशाने पर

इस प्रकरण का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अभय साहू का व्यवहार केवल पुरुष सहयोगियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि महिला कर्मियों, विशेषकर अनुसूचित जाति वर्ग से आने वाली रीना ध्रुवे को निरंतर मानसिक प्रताड़ना और भेदभाव का सामना करना पड़ा है।

रीना ध्रुवे ने कहा —

“मैं अपने काम में कोई कोताही नहीं बरतती, फिर भी मुझे हमेशा अनदेखा किया जाता है। जब मैं अपनी बात रखने की कोशिश करती हूँ, तो ताना मारा जाता है कि ‘तुम्हारी औकात क्या है?’ यह मानसिक उत्पीड़न नहीं तो और क्या है?”

उनकी यह बात बताती है कि कार्यालय में लैंगिक और सामाजिक भेदभाव का एक स्याह पक्ष पल रहा है, जिसे अब तक अनदेखा किया जाता रहा है।

सामूहिक प्रतिक्रिया: बहिष्कार और चेतावनी

अभय साहू के व्यवहार से आहत मनरेगा स्टाफ ने अब खुलकर विरोध का ऐलान कर दिया है। उन्होंने सामूहिक निर्णय लेते हुए कार्यालयीन कार्यों के बहिष्कार की घोषणा की है, और स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जब तक अभय साहू को जनपद पंचायत फिंगेश्वर से हटाया नहीं जाता, तब तक कोई कार्य नहीं किया जाएगा।

कर्मचारियों ने यह भी चेताया कि —

“यदि भविष्य में किसी भी कर्मचारी के साथ कोई अनुचित व्यवहार या दुर्घटना होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी अभय साहू और प्रशासन की होगी।”

प्रशासन पर जनता और कर्मचारियों की निगाहें — क्या होगा अगला कदम?

यह मामला अब केवल एक व्यक्ति के दुर्व्यवहार का नहीं रह गया है, बल्कि शासन की संवेदनशीलता, कर्मचारियों की सुरक्षा और सामाजिक न्याय की कसौटी पर प्रशासन की परीक्षा बन चुका है।

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अब सवाल यह है —

  • क्या प्रशासन साहू के खिलाफ जांच समिति गठित करेगा?
  • क्या पीड़ित महिला और अनुसूचित जाति वर्ग के कर्मचारियों को न्याय मिलेगा?
  • या फिर यह मामला भी फाइलों में दफन होकर, समय की धूल में गुम हो जाएगा?

फिंगेश्वर जनपद पंचायत में उपजे इस विवाद ने साफ कर दिया है कि यदि समय रहते इस पर सख्त और न्यायसंगत कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला राज्यभर में कर्मचारी आंदोलन और सुशासन की छवि को गहरा आघात पहुँचा सकता है।

यह एक उभरता जनसरोकार है। शासन को यह तय करना होगा कि वह अधिकारियों के दंभ के साथ खड़ा है या उन कर्मचारियों के आत्म-सम्मान के साथ जो धरातल पर योजनाओं को क्रियान्वित करते हैं।


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