अनजान बने आरटीओ बोले शिकायते मिली तो दो-तीन दिनों में करेंगे कार्यवाही।

पुलिस कार्यवाही होते देख आधा दर्जन गाड़िया कम्पनी के यार्ड में हो गई खड़ी 

गरियाबंद(गंगा प्रकाश):-गरियाबंद जिले भर में अनेक यात्री बसें बिना फिटनेस के बेखौफ सड़को पर दौड़ रही हैं लेकिन जिम्मेदार इन बसों पर कार्रवाई करने की बजाए अपनी जांच को सिर्फ हेलमेट या तीन सवारी चेकिंग तक ही सीमित रखे हैं। वहीं आरटीओ की सक्रियता भी किसी हादसे के बाद ही होती है। बाकी दिनों में गतिविधियां शून्य ही दिखाई देती है।कभी कभार आरटीओ हाईवे पर चल रही बसों की जांच कर कर्तव्यों की इतिश्री कर लेते हैं। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही बसों की हालत सबसे ज्यादा खराब रहती है। कंडम बसें, फिटनेस, बीमा वगैरह का तो पता ही नहीं रहता।

यात्रियों की जान को खतरे में डालकर खटारा बसें सड़कों पर बेख़ौफ दौड़ रही हैं। परिवहन विभाग द्वारा हादसों को रोकने व दुर्घटनाओं के दौरान यात्रियों को सुरक्षित बचाने कई इंतजाम यात्री बसों में करने के निर्देश संचालकों को दे रखे हैं।इसके बावजूद जमीनी स्तर पर इनका पालन नहीं हो रहा है।बता दें कि आरटीओ दफ्तर में रजिस्ट्रेशन, ट्रांसफर व फिटनेस इत्यादि दस्तावेज जारी करते समय वाहनों में औपचारिकताएं पूरी कर दी जाती है लेकिन सड़क में यात्रियों की जान की परवाह किए बिना यात्री बसों को सड़क पर दौड़ाया जा रहा है।सरकारी व प्रायवेट स्टैंड में नियमों को ताक में रखकर बसों का संचालन किया जा रहा है। इनमें अधिकतर बसों में ना तो डबल डोर (दो दरवाजे) मौजूद हैं, न ही आग को काबू में करने अनिशमन यंत्र लगाया गया है।हादसे के दौरान प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराने फर्स्टएड बाक्स भी ज्यादातर वाहनों में मौजूद नहीं रहता।  परिवहन विभाग को सभी यात्री बसों में यात्रियों की सुरक्षा इंतजाम करने के निर्देश दिए थे। इन निर्देशों के तहत हादसे के वक्त वाहन से बाहर निकलने यात्रियों के लिए बसों में दो डोर (दो दरवाजे) लगाने के अलावा बस की पिछली कांच को आपातकालीन दरवाजे की तरह लगाने के निर्देश दिए गए थे।लेकिन इन निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है।किराए के मुताबिक यात्रियों को जरूरी सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं।किसी बस में खिड़कियों के कांच फूटे है तो कई काँच खुलते तक नही हैं। बसों में फस्टएंड बाक्स के नाम पर खाली डिब्बा लटका दिया जाता है।अभिशमन यंत्र भी नाममात्र के लिए इक्का दुक्का बसों में लगाए गए हैं।कमियों को दूर करने की बजाए पकड़े जाने पर बस संचालक तरह तरह के बहाने बताकर जिम्मेदारियों से बच निकलते हैं।इसका खामियाजा हादसों के दौरान मुसाफिरों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ता है।गौरतलब हो कि गरियाबंद से राजिम,छुरा व महासमुंद के लिए रोजाना 20 से भी ज्यादा मिनी बसें सवारी ढोने का काम  कर  रही है,पर इनमें से ज्यादातर बसों का परमिट एक साल से दो साल पुराना है,ताज्जुब की बात है कि ऑनलाइन परमिट सिस्टम की मोनिटरिंग होती है बावजुद इसके परिवहन विभाग ने बगैर परमिट के दौड़ रही गाड़ियों को कभी रोकना भी जरूरी नही समझा।शिकायत के आधार पर आज गरियाबन्द सिटी कोतवाली व यतायात विभाग ने दो बसों की रैंडम जांच किया तो दोनों के पास परमिट नही थे।एक बस राजिम जाने के लिए तो दूसरा महासमुंद के लिए सवारी भर रही थी।सवारी उतार कर यातायात विभाग दोनों बसों को थाना केम्पस में खड़े करवा दी है ।कोतवाली प्रभारी राकेश मिश्रा ने कहा कि लाइसेंस व अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच चल रही है।यातायात प्रभारी अजय सिंह को लगा कि बसों के परमिट नही है,इसलिए दोनो को खड़े करवा दिया गया है।परमीट नही दिखाने पर आवश्यक कार्यवाही होगी।

आरटीओ अनजान बना,बोले दो तीन दिनों में शुरू करेंगे जांच

 इन सड़को पर 5 से भी ज्यादा कम्पनियों के मिनी बस चल रही है।रुट पर चलने वाली बसों के नम्बर पर आन लाइन पड़ताल किया गया तो 10 बस ऐसे मिली जिनके परमिट 1 से 2 साल पहले एक्सपायर हो गया है।आरटीओ के पोर्टल में लेप्स हो चुके परमिट स्पष्ठ दिखाई दे रहा है,पर आरटीओ मृत्यंजय पटेल ने कहा कि इसकी जानकारी नही है,शिकायत मिली हुई है,दो तीन दिनों में वाहनों को रोक कर जांच करेंगे।

कम्पीटिशन में जान की जोखिम

 बसें सवारी भरने के चक्कर मे जान जोखिम में डाल कर कम्पीटिशन करते देखे जा सकते है।बगैर परमिट के दौडने वाली बसों के फिटनेश व अन्य आवश्यक दस्तावेज भी सही नही है,ऐसे में कोई अनहोनी हुई तो यात्रियों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है ।बताया जाता है कि विभाग के मिलीभगत से टैक्स की चोरी कर यह खेल लगातार जारी है।इसलिए दफ्तर में बैठे ऑनलाइन मोनिटरिंग वाले तथ्यो को भी विभाग नकार रही है।

राजिम का दलाल का दबदबा है विभाग में

आरटीओ में सारा उलट फेर का गेम राजीम बैठे एक दलाल करता है।लाइसेंस में गड़बड़ झाला हो या फिर परमिट में सेटलमेंट सब कुछ राजीम के एक अड्डे से होता है।आज जब पुलिस कार्यवाही कर रही थी दलाल आरटीओ दफ़्तर में पहूच गया।खबर है कि उसी जगह से बस ऑपरेटरों को दलाल दिलासा दे कर कह रहा था कि 4,5 दिनो मे सब कुछ ठाक कर लूंगा।बड़ा सवाल यह है कि नियम को ठेंगा दिखाने वाले इन दलालों के इशारे पर विभाग कब तक चलेगा।

बिना परमिट की कंडम बसों में जोखिम भरा सफर,जिम्मेदारों को ग्रामीणों की जान की परवाह नहीं

गरियाबंद जिला के ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाली निजी बसों में यात्री धक्के खाकर सफर करने हमेशा रहे हैं। बस संचालक नियमों की अवहेलना करते हुए सीटों से अधिक यात्री बैठाकर धड़ल्ले से बसें दौड़ा रहे हैं। उन्हें रोकने वाले जिम्मेदार जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं। ऐसे में यात्रियों को परेशान होकर यात्रा करनी पड़ रही है।

जानकारी के अनुसार यहां निजी बस स्टैण्ड से संचालित होने वाली अधिकांश बसों में संख्या से अधिक यात्री बैठा लिए जाते हैं। ऐसे में कई बार तो पूरा किराया देने के बावजूद यात्रियों को खड़े-खड़़े गंतव्य तक यात्रा करने की मजबूरी बन जाती है। इसके अलावा बस संचालक सामान भी भारी मात्रा में यात्री बसों में ही ले जा रहे हैं। इससे उन्हें दुगुना किराया मिलता है। जबकि यात्रियों को परेशान होना पड़ रहा है। निजी बसों के संचालक यात्रियों के बारे में नहीं सोच कर टैक्स बचाने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। यह सब कुछ संबंधित विभाग के अधिकारियों की अनदेखी के चलते हो रहा है।

ग्रामीण क्षेत्र सहित विभिन्न मार्गों पर प्रतिदिन दर्जनों बसों का संचालन हो रहा है। इनमें से अधिकांश बसें एक ही अनुज्ञा पत्र पर कई मार्ग पर चल रही हैं। नियमित जांच व सख्त कार्रवाई नहीं होने से संचालकों के हौंसले बुलंद हैं। इतना ही नहीं जिम्मेदारों की अनदेखी का खामियाजा यात्रियों को भी भुगतना पड़ रहा है।


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