जगदलपुर (गंगा प्रकाश)।बस्तर संभाग के जिला मुख्यालय जगदलपुर में दंतेश्वरी मंदिर प्रांगण पर बस्तर जिले के पत्रकारों ने पुलिसिया जुल्म के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की, पत्रकारों ने कहा कि यह आगाज़ है इस प्रकरण को अंजाम तक  लेकर आगे बढ़ेंगे ,धरना प्रदर्शन के बाद एसडीएम को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

आपको बता दें बस्तर संभाग के दन्तेवाड़ा एवं सुकमा जिला के चार पत्रकारों का दल 9 अगस्त को सुकमा जिले के कोन्टा क्षेत्र में रेत तस्करी से सम्बन्धित समाचार संकलन के लिए गए हुए थे , जिसे लेकर रेत माफिया एवं तात्कालीन थाना प्रभारी अजय सोनकर के बीच कहासुनी हुई थी,

टीआई सोनकर की संदिग्ध भूमिका के द्वारा साजिश कर गांजा तस्करी का फर्जी मामला बार्डर आंध्र प्रदेश के चित्तूर थाना में बनवाया और पत्रकारों को गिरफ्तार करवा कर जेल भिजवाया गया था।

विदित हो कि कोन्टा के एक व्यक्ति द्वारा दन्तेवाड़ा सुकमा के पत्रकारों को कोन्टा की सबरी नदी से बड़े पैमाने पर रेत तस्करी कर आंध्रा भेजे जाने सम्बन्धी जानकारी मिली थी,

 सत्यता जानने  पत्रकारों का दल कोंटा गया हुआ था,

 “दन्तेवाड़ा एवं सुकमा जिले के चार पत्रकार दिनांक 9 अगस्त को रेत तस्करी कर ले जाते ट्रकों के वीडियो बना रहे थे। पत्रकारों ने पूछा कि क्या रेत परिवहन की पिटपास परमिट हैं..?

 तब ट्रक ड्राइवर ने परमिट दिखाया जिस पर सुकमा जिले की सीमा में ही रेत परिवहन  पिटपास में उल्लेख था, जबकि रेत भरे ट्रक तेलंगाना के हैदराबाद जा रहे थे।। इस बीच 5 मिनट के अंतराल में ही कोंटा टी आई घटना स्थल पहुंच गए।

 थानेदार जो की सिविल ड्रेस में थे. आते ही थानेदार अजय सोनकर ने पत्रकारों से पूछा की आप ट्रक रुकवाकर क्यों पूछताछ कर रहे हो,पत्रकारों ने थानेदार को बतलाया कि ये रेत बिना परमिट आंध्रा ले जाई जा रही है, मामले की गंभीरता को समझते हुए थानेदार ने बड़े ही प्लान से  रात्रि में ठहरे पत्रकारों की कार के डिक्की मे गांजा प्लांट करवाया, और सुबह  पत्रकारों का दल जब पेट्रोल ‘लेने चिंतूर आंध्र प्रदेश पहुंचे, तब पहले से तैयार आंध्र प्रदेश पुलिस के द्वारा उन्हें गिरफ्तार करवाया गया,पूरी प्लानिंग के तहत फंसाया गया पत्रकारों को..

फिलहाल चारों पत्रकार जमानत पर जेल से बाहर है।

इस मामले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर संभाग के सातों जिलों के पत्रकारों ने 2 घंटे का धरना प्रदर्शन किया, इस विषय पर जिला पत्रकार संघ के अध्यक्ष सुरेश रावल एवं सचिव धर्मेन्द्र महापात्र ने बताया कि पत्रकारों को न्याय मिले इस हेतू सीबीआई जांच की मांग की गई है, यदि सीबीआई जांच ना भी हो तो किसी उच्च स्तरीय जांच कमेटी द्वारा इस मामले की जांच की जानी चाहिए, और निर्दोष पत्रकारों को न्याय मिलना चाहिए।


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