कागजों में खरीद रहे थे समिति गोबर,जब किसान को खाद देने की बारी आई तो खुलने लगी कलई

पंचायत एवं कृषि विभाग के रिपोर्ट में दावा किया गया की 337 गौठानों ने इस सीजन 20 हजार क्विंटल वर्मी कंपोस्ट तैयार किया,जिसमे 90 फीसदी का वितरण किया गया

सहकारी समिति की रिपोर्ट बता रही आधी भी नहीं पहूंची खाद,विलंब से मिलने के कारण वितरण में देरी

देवभोग(गंगा प्रकाश):- जून माह तक ऋण वितरण के साथ ही प्रत्येक किसानों को एकड़ प्रति एक बोरी यानी 30 किलो वर्मी खाद 10 रु प्रति किलो के दर पर उपलब्ध कराया जाना था,लेकिन गौठानो द्वारा समय पर पर्याप्त खाद उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण यह वर्तमान में 20 फीसदी किसानों तक भी खाद नहीं पहुंच सका है। जानकार बताते हैं कि प्रत्येक गौठान को रोजाना 2 क्विंटल गोबर की खरीदी करना अनिवार्य था, लेकिन मैदानी इलाके वाले विकास खंड फिंगेश्वर, देवभोग,मैनपुर के गोहरापदर जैसे इलाके में गोधन की संख्या कम है,जिससे गोबर की आवक भी कम है।लिहाजा कागजों में गोबर खरीदी कर लिया गया। कूल मात्रा का 30 से 40 फीसदी मात्रा में गोबर खाद बनाने की अनिवार्यता थी। जून माह में जब जिले के कलेक्टर बदले तो गोधन योजना क्रियान्वयन की प्राथमिकता में आ गया। गोबर की तरह खाद को भी कागजों में तैयार करने की मंशा पर पानी फिर गया।हालाकि गोबर खरीदी के समय ही इस गड़बड़ी की नीव रख चुके मैदानी कर्मी अब भी अफ़सरो को बोगस रिपोर्ट देकर मामले में पर्दा डालने में कोई कसर नहीं छोड़ा है। पंचायत व कृषि विभाग के रिपोर्ट में दावा किया गया है की जिले के 337 गौठानो से अब तक 20 हजार क्विंटल खाद तैयार कर लिया गया है। रिपोर्ट की पुष्टि करते हुए कृषि उप संचालक संदीप भोई ने बताया की तैयार मात्रा का 90 फीसदी यानी 18 हजार क्विंटल खाद सहकारी समितियों तक पहुंच चुका है,बचत मात्रा टंकी व गौठान में स्टॉक रखा हुआ होगा जिसे जल्द पहुंचा दिया जाएगा।

आधा भी नही मिला खाद,सहकारी समिति

सरकारी दावों की सच्चाई जानने हम देवभोग व गोहरापदर जिला सहकारी बैंक के अधीन आने वाले 17 पंजीकृत समिति तक पहूचे,दो दिनो के पड़ताल में चौकाने वाले मामले सामने आए। गोहरापदर के 9 समिति में 63 गोठानो ने 20 जून को बता दिया था की वे 1188 क्विटंल वर्मी कम्पोस्ट देंगे,लेकिन 15 जुलाई तक वे महज 287 क्विटंल खाद ही दे पाए थे,जबकि सरकारी रिपोर्ट में 5 जुलाई तक 520.35 क्विटंल वितरण बताया जा चुका था। ऐसे ही हाल देवभोग बैंक के आधीन आने वाले 8 सहकारी समिति के थे। क्यू आर जनरेट कराए गए मात्रा के अनुपात में 54 गौठान द्वारा केवल 1100 क्विटंल खाद उपलब्ध कराया गया था।

विलंब के चलते समिति में जाम हो रहा खाद

जिस खाद को जून माह तक उपलब्ध कराया जाना था,उसकी आधी मात्रा की पूर्ति जुलाई के दूसरे सप्ताह तक भी नही हो सका। जबकि खाद के उपयोग का समय भी निकल गया है। देवभोग के समीतियो में भंडारित मात्रा में अब तक केवल 709 क्विटंल खाद वितरण किया जा सका है। क्योंकि जून अंतिम तक 5 हजार किसानों ने ऋण ले चुका था,ऐसे हालत जिले भर में बन चुके हैं। अफसरो के दबाव से अब खाद भी तैयार हो जाएंगे तो किसानी कार्य में मस्त किसान इसे लेने दोबारा समिति नहीं आएंगे।

रेत व मिट्टी मिला रहे,वापस करेंगे किसान

कमपोस्ट खाद तैयार करने में 90 दिन का समय लगता है,ऐसे में गड़बड़ी पर पर्दा डालने के लिए गोबर में मिट्टी व रेत मिला कर खपाने की कोशिश हो रही है। देवभोग ब्लॉक के नवागांव गौठान ने लाटापारा समिति में सप्ताह भर पहले 90 पैकैट खाद सप्ताह भर पहले भेजा था,समिति प्रबंधक चरण यदु ने बताया की इसमें से 80 पैकेट वितरण कर दिया गया। लेकिन गिरसुल के चंदन अग्रवाल समेत कुछ किसानों ने क्वालिटी खराब होने की शिकायत किया,जिसके बाद खाद को वापस मंगाया गया है। जांच के लिए कृषि अधिकारी सैंपल ले गए है,गौठान का भुगतान रोक दिया गया है। देवभोग जनपद सीईओ प्रतीक प्रधान ने कहा की गुणवत्ता की जिम्मेदारी कृषि विभाग की है।

छत्तीसगढ़ में दो बैल 1800 किलो गोबर करते हैं

पूर्व सीएम ने डॉक्टर रमन सिंह ने दो वर्ष पूर्व आरोप लगाया था कि कांग्रेस सरकार में सिर्फ भ्रष्टाचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा था कि राज्य में 2 बैल एक दिन में 1800 किलो गोबर दे देते हैं।भूपेश सरकार ने छत्तीसगढ़ को लूट का बाजार बना दिया है।इस सरकार में वादे खूब किए जा रहे हैं, लेकिन गरीबों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

क्या था 2 बैलों का 1800 किलो गोबर करने का मामला?

दरअसल मामला 26 नवंबर 2020 का  है।कोटा जनपद पंचायत के खैरा ग्राम के दो बैल वाले एक किसान ने गोठान में एक हफ्ते में 12800 रुपए का गोबर बेच दिया था,भूपेश सरकार गौ पालकों से 1.5 रुपए प्रति किलों के हिसाब से गोबर खरीदती थी।अगर इस हिसाब से अंदाजा लगाएं तो उस किसान के एक बैल ने रोजाना साढ़े 4 क्विंटल गोबर किया है। इस मामले में जांच की बात की जा रही थी।

9790 गौठान के दावे को बताया हवाहवाई:भाजपा

जब से प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आई है।तब से प्रदेश के संसाधनों को लूट रही है।छत्तीसगढ़ में रोज घोटालों की खबर सामने आ रही हैं,जिससे प्रदेश शर्मसार हुआ है।सबसे शर्मनाक घोटाला सरकार ने गौ माता के नाम पर किया है।गौठान के नाम पर विभिन्न मदों में 1300 करोड़ रुपए खर्च किए गए।इसमें राशि का दुरुपयोग कर भारी घोटाला किया गया है। गौठान में न गाय है, ना गोबर बेचा जा रहा है और ना ही गायों के रखरखाव की कोई व्यवस्था है।भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव ने प्रदेश में 9790 गौठान को लेकर भी सवाल उठाए।कुछ ही आदर्श गौठान हैं, बाकी में कोई व्यवस्था ही नहीं है।भारतीय जनता पार्टी का आरोप है कि गौठान में भ्रष्टाचार करने के लिए सरकार ने नियम के अनुसार गौठान समिति का चुनाव नहीं कराया,सत्ता के करीबियों ने बिना चुनाव के ही गौठान समिति पर कब्जा कर लिया है।वहीं भारत सरकार से मिली 14वें और 15वें वित्त की राशि, मनरेगा, डीएमएफ फंड की जो राशि भेजी थी, उन्हें डाइवर्ट कर गौठान के नाम पर भ्रष्टाचार किया है।

कागजों में खर्च किए गए पैसे

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव ने कहा कि “विधानसभा के दौरान सदन में सरकार ने बताया है कि गौठान के नाम पर अभी तक 1019 करोड़ रुपए खर्च किए गए।वर्मी कंपोस्ट के लिए टंकी बनाने के नाम पर 233 करोड़ खर्च हुए। इसके अलावा फरवरी 2023 तक 105 करोड़ रुपए खर्च करने की बात कही गई है।इन सब के बावजूद प्रदेश में गौठानों की हालत किसी से छुपी नहीं।अधिकांश पैसे कागजों में खर्च किए दिखते हैं।

क्या हैं गोठांन योजना

छत्तीसगढ़ सरकार ने जुलाई 2020 में महत्वकांक्षी सुराजी गांव योजना के तहत गौठान और गोधन योजना की शुरुआत की थी।इस योजना के तहत गांव में गौठान विकसित करके मवेशियों को एक स्थान पर रख कर उनके चारा, पानी की व्यवस्था करने के साथ ही बाउंड्री वॉल और शेड बनाया गया है।सरकार ने गौठान के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए वर्मी कंपोस्ट का उत्पादन और अन्य आर्थिक गतिविधियों की शुरुआत की।गौठान का संचालन गौठान समिति और महिला स्व सहायता समूह की ओर से किया जा रहा है।

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