“मन की बात“ का नाम बदल कर “मनमानी की बात“ कर देना चाहिए

राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति, छत्तीसगढ़ के उप महा प्रबंधक से नोटबंदी को लेकर आने वाली परेशानी पर की चर्चा

मोदी सरकार, का हर कदम आम लोगों को परेशान करने वाला

2000 के नोट बदली में कई प्रक्रियागत त्रुटि

2016 की तरह न हो जनता को परेशानी, नोट बदली के नाम पर जनता को परेशान न किया जाये- विकास उपाध्याय

रायपुर (गंगा प्रकाश)। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी राष्ट्रीय सचिव एवं विधायक विकास उपाध्याय ने कहा कि कर्नाटक में हुई शर्मनाक हार के बाद मोदी सरकार को अपने ही सारे लिये गए फैसले अब गलत लगने लगे है और इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए कल अचानक मोदी सरकार ने 2000 के नोट को 30 सितम्बर से अमान्य घोषित कर दिया है। मोदी जी आप ने पहले भी जब नोट बंदी की थी तो बड़ी-बड़ी बातें की थीं कि आप के इस फैसले से काला धन वापस आयेगा, आतंकी फंडिंग रूकेगी, कैश कम होगा, नकली नोट बंद होंगे लेकिन इनमें से एक भी चीज में कोई फर्क नहीं आया बल्कि ये सब चीज बढ़ी ही हैं। आप के इस निर्णय से सिर्फ आम जनता को परेशानी हुई थी। आप के इस निर्णय से देश का जीडीपी आधा हो गया, बेरोजगारी बढ़ गयी और आप आँख बंद कर बैठे हैं। आप आज फिर आम जनता पर प्रहार कर रहे हैं और अब जनता आपके निर्णय पर विश्वास खो चुकी है। राहुल जी एक मात्र ऐसे नेता हैं जो आम जनता के लिए सोचते हैं और उनके अन्दर वो दूरदर्शिता है इसलिए वो हमेशा आप को हर गलत फैसले के पहले चेतावनी देते रहे हैं चाहे वो किसान विरोधी काले कानून हो, कोविड के बारे में चेतावनी और जब आप ने 2000 के नोट लाने की बात की थी तब भी। लेकिन आप ने हमेशा उनकी जनहित की सलाह नकार कर स्वहित वाले फैसले लिए। मैं आप से ये गुजारिश करूंगा की आप इस प्रकार के फैसले लेना बंद करें और देश की मूल समस्या जैसे बेरोजगारी, महंगाई और गरीबी हटाने पर ध्यान दें। एक लाइन में अगर कहूँ तो मोदी सरकार ट्यूबलाइट सरकार है जिनको फैसले लेने के बहुत बाद उसके दुष्परिणाम का अह्सास होता है। 2016 में की गई नोटबंदी को काले धन पर प्रहार बताकर पेश करने के बाद 2023 में फिर से नोट बंद करने को विकास उपाध्याय ने मोदी सरकार को अपने ही फैसले को गलत साबित करने वाला कहा। उन्होंने लोगों की परेशानी का जिक्र करते हुए छोटे दुकानदारों और मध्यवर्गीय परिवारों को 2000 नोट बदली करने में हो रही परेशानी को दूर करने की जरूरत बताई है साथ ही इसके लिए बनाए गए नियम प्रक्रिया की विधिवत जानकारी नहीं होने पर मोदी सरकार के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की है लोगों से चर्चा करने के बाद विधायक विकास उपाध्याय आज स्टेट बैंक के जोनल ऑफिस पहुंचकर प्रदेश भर में नोटबंदी के दौरान आ रही दिक्कतों पर बैंक के अधिकारियों से चर्चा की स्टेट बैंक जोनल कार्यालय के साख समिति के उप महाप्रबंधक उपाध्याय से विधायक विकास उपाध्याय के साथ मौजूद प्रतिनिधिमंडल ने चर्चा की, इस चर्चा में सरकारी बैंकों में रुपए की कमी को दूर करने ‘‘अलग से काउंटर बनाए जाने और दस्तावेजी साक्ष्य मांगने जैसी दिक्कतों को दूर करने की मांग रखी’’।

विकास उपाध्याय ने कहा कि आज से एक्सचेंज (2000 के नोटों की अदला-बदली) स्टार्ट हो गया है। बैंकों में डिपोजिट का लिमिट होता है जैसे- एसबीआई में एक माह में मात्र 03 बार ही कर सकते हैं। अगर इससे ज्यादा हुआ तो सर्विस चार्ज प्लस जीएसटी लगेगा। इससे एक बार फिर रुपये की वैल्यू गिरेगी यूएस डॉलर के मुकाबले।

उपाध्याय ने कहा कि काला धन वापस नहीं आने वाला क्योंकि जिनके पास काला धन था उन्होंने अपने दोस्तों के माध्यम से उन पैसों को व्यवस्थित कर दिया है। इससे छोटे बिजनेस एवं एग्रीकल्चर सेक्टर वालों को ही परेशानी होगी। मतलब अब जनता को ही परेशानी होगी।

विकास उपाध्याय ने आगे कहा कि “मन की बात“ का नाम बदल कर “मनमानी की बात“ कर देना चाहिए क्योकि जिस तरह हर तुगलकी फरमान लोगों पे थोपा जा रहा है ऐसा लग नहीं रहा कि कोई जानता के मन की बात सुनना चाहता है। आरबीआई ने कहा है कि आज से लोग बैंकों में जाकर 30 सितंबर तक 2000 रुपये के नोट को जमा कर सकते हैं या बदल सकते हैं। इसी सिलसिले में आज बैंकर्स कम्यूनिटी के उप महा प्रबंधक श्री देवेन्द्र उपाध्याय जी से सौजन्य मुलाकात की और बीजेपी सरकार के स्वहित वाले अपरिपक्व निर्णय के बारे में चर्चा की। मैंने उनसे ये कुछ सवाल पूछे : आम जनता जिन्होंने किसी विशेष कार्य जैसे शादी या बच्चे की पढ़ाई के लिए पैसे जमा किए हैं आज उनको एक बार फिर कड़कती धूप में खड़ा होना पड़ेगा, जो छोटे व्यापारी है उन्हें भी बहुत परेशानी का सामना करना पड़ेगा। अपना काम छोड़ लाइन में खड़ा होना पड़ेगा, बैंक के कर्मचारियों को भी ओवर टाइम काम करना पड़ेगा ताकि समय से लोग नोट बदल पाए, इस फैसले से मुझे तो नहीं लगता कि काला धन वापस आयेगा बल्कि एक बार फिर आम आदमी ही परेशान होगा, एक जनप्रतिनिधि होने के नाते मुझसे कई लोगों ने संपर्क किया कि नोट बदलने के लिए डॉक्युमेंट्स मांगे जा रहे है इसका मतलब अभी भी सरकार के निर्देश बैंक कर्मचारियों तक नहीं पहुंचे हैं, मैंने ये भी पूछा कि एक बार मैं क्यूँ सारे नोट नहीं जमा किए जाते बार बार लाइन में खड़ा करके क्यूँ जनता को परेशान किया जा रहा हैं। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति, छत्तीसगढ़ के उप महा प्रबंधक से नोटबंदी को लेकर आने वाली परेशानी पर विकास उपाध्याय ने चर्चा किया और कहा कि इससे बैंकों के कर्मचारी हो, चाहे वो कैशियर हो या फिर अकाउंटेंट हो वह भी इस परेशानी से गुजरेंगे, क्या वो इस कार्य के लिए ओवरटाईम करेंगे या फिर वो अपने बाकी बैंकिंग काम भी साथ में करेंगे? विकास उपाध्याय ने कहा कि बैंक अब 2000 के नोट नहीं देगी बल्कि 2000 के नोट को अब आम जनता वापस बैंक को सौपेंगी, अब कोई आम आदमी 2000 के नोट को लेकर बाजार में जायेगा तो वह उस नोट को नहीं दे पायेगा, उसे अब नोट को सिर्फ बैंक में ही जाकर जमा करना पड़ेगा और बैंकों में फिर से कई लंबी कतारें होंगी, जिसमें आम जनता को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। कई इसमें छोटे व्यापारी हैं तो कई आम लोग भी हैं जो अपने कामकाज को छोड़कर, अपनी रोजी-रोटी को छोड़कर सिर्फ नोट बदलने के लिए लंबी-लंबी कतारों में खड़े रहेंगे, तभी नोट बदल सकेंगे।

विकास उपाध्याय ने कहा कि बीजेपी सरकार से ये पूछना चाहता हूँ अखिर कब तक बीजेपी बिना कुछ सोचे समझे अपने अपरिपक्व निर्णय जनता पर थोपते रहेगी। जनता “मन की बात“ कर रही है लेकिन उनकी बात अनसुनी हो रही है और बीजेपी ‘‘मनमानी की बात“ कर रही है। अगर एक व्यक्ति एक बार में रू. 2000 के 5 नोट बदलता है तो बैंकों को अगले 4 महीने में 36 करोड़ ट्रांजैक्शन करने होंगे। एक लेन-देन में 4 मिनट भी लगे तो अगले 4 महीने में नोट बदलने में बैंकों के लगभग 2.5 करोड़ घंटे लगेंगे। यानी अगले 4 महीनों में बैंक की शाखाएं सिर्फ एक्सचेंज में व्यस्त रहेंगी।


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