गरियाबंद/फिंगेश्वर (गंगा प्रकाश)।नगर में चल रहे भागवत पुराण कथा में आज रूखमणी विवाह प्रसंग आते ही पूरे भागवत पंडाल में विवाह जैसा माहौल हो गया। श्रद्धालुओं के मध्य एक दूसरे को विवाह की बधाई के साथ वैवाहिक रस्मों में टिकावन की परंपरा के चलते भागवत प्रेमियों ने अनेकानेक प्रकार के उपहार देकर पूरे भागवत मंच का माहौल उत्साह जनक कर दिया। आज पंडाल सहित मंच की सजावट भी वैवाहिक समारोह जैसी चकाचौध कर रही थी। प्रवचनकर्ता पं. सुरेन्द्र बिहारी गोस्वामी ने अपने प्रवचन में कहा कि काम, कोध्र, मद, लोभ अथवा मत्सर यह पांच विकार मनुष्य के सबसे बड़े शत्रु है। मनुष्य के जीवन में न धर्म अमर होता है ना रूप, बल्कि अच्छे कर्म करने से नाम जरूर अमर हो जाता है। भक्तों ने भजनों की धुनो पर मगन होकर थिरकते हुए रूखमणी विवाह का आनंद उजागर किया। श्रद्धालुओं का उत्साह देखते हुए भगवताचार्य ने कहा कि भगवान अपने भक्तों के भाव और प्रेम बंधे है। उनमें भक्तों की दुविधा कभी देखी ही नहीं जाती। वे अपने भक्तों की कामना की पूर्ति तो करते ही है साथ ही भक्तों के साथ अपने स्नेह बंधन निभाने स्वयं इस धरा पर आते है। भगवान अपने भक्तों के साथ सदा हर पल खड़े रहते है। भगवान भक्तों द्वारा प्रेम एवं भाव के साथ दी गई वस्तु उसी प्रकार ग्रहण करते है जिस तरह से उन्होंने द्रोपती की पुकार और गजेन्द्र का पुष्प ग्रहण किया था। भगवान ने काल रूपी मकर से भक्त गजराज की रक्षा की तो द्रोपती के पुकार पर उसका संकट मिटाने स्वयं दौड़े चले आए। यह सारी कथाएं से प्रमाणित करती है कि भक्तों के भाव से हमेशा बंधे रहने वाले भगवान भक्तों के साथ अपना स्नेह निभाने स्वयं आते है। ठाकुर जी यह कभी नहीं चाहते कि उसके भक्त के पास अहंकार रहे। वे तो अपने भक्तों से कहते है कि मुझे तुम वह अर्पित करो जो मैने तुझे कभी दिया ही नहीं और वह है अहंकार यह मैने तुझे कभी नहीं दिया। बल्कि भक्त ने इसे खुद अपने में तैयार किया है। कथा प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से प्रारंभ हो जाती है। काफी संख्या में परिजन एवं आसपास के श्रद्धालुजन भागवत कथा में सम्मिलित होकर कथा का रसपान कर रहे है। आज शुक्रवार को कथा के छटवें दिन महारासलीला एवं रूखमणी विवाह का आनंद लेने हजारों की संख्या में विशेषकर महिलाएं की जबरदस्त भीड़ रही। तिवारी परिवार द्वारा राकेश जालपा प्रसाद तिवारी के वार्षिक श्राद्ध के अवसर पर कराए जा रहे भागवत में आज शनिवार 13 जनवरी को भगवताचार्य द्वारा सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष, व्यासपूजन पर प्रवचन दिया जावेगा।
भक्तों ने भजन की धुन पर मगन होकर थिरकते हुए रूखमणी विवाह का आनंद उजागर किया
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