रिपोर्टर जीवनलाल ध्रुव
महासमुंद (गंगा प्रकाश)। साईं पीकरी धाम टेका के संबंध मे विस्तार से चर्चा करते हुए साईं पीकरी धाम टेका व साईं सेवा संस्थान राजिम के प्रमुख मोहन ठाकुर ने बताया कि सदियों पहले श्री शिरडी साईं बाबा अपने कुछ शिष्यों के साथ टेका पधारे थे और ग्राम के बाहर अपने ठहरने की व्यवस्था के लिए मालगुजार को खबर भिजवाया , मालगुजार ठाकुर हरदेव सिंह ने गांव के बाहर (गांव की सीमा में) उनके रहने खाने पीने की व्यवस्था कर दी, फकीर साईं बाबा ने उन्हें स्थाई व्यवस्था के लिए कहा जिसे मालगुजार द्वारा अनसुना कर दिया गया तब श्री साईं बाबा और उनके शिष्य अचानक गायब हो गए फिर मालगुजार को जब पता चला तो उन्हें बहुत ढूंढा गया मगर वो कहीं नहीं मिले , फिर बाबा के स्वप्न वाले निर्देश के आधार पर मालगुजार ने उनके जाने के बाद वहां बचे पत्थरों को एकत्र कर चबूतरा बनाया और ग्राम देवता के रुप में सभी पूजने लगे और फकीर के द्वारा लगाए पीपल का पेड़ (छत्तीसगढ़ी में पीकरी) के नाम पर यह स्थान साई पीकरी कहलाने लगा कालांतर में मालगुजार के वंशज मोहन ठाकुर को श्री साईं बाबा ने शिर्डी बुलाकर ( जब साईं पीकरी में पीपल का पेड़ नष्ट होने वाला था तब) उस स्थान का दर्शन कराकर एक मन्दिर बनाने के लिए प्रेरित किया ।

मोहन ठाकुर ने अपने पिता स्व हनुमत सिंह ठाकुर के सहयोग से वहां पर साईं बाबा का छोटा सा मन्दिर बनाकर उनकी पुजा अर्चना और सेवा करने लगे मन्दिर बनते ही पीपल का पेड़ अपने आप नष्ट हो गया और यह स्थान साई मंदिर कहलाने लगा।इसी बीच मोहन ठाकुर का सम्बन्ध अनेकों साईं भक्तो से हुआ जिनके माध्यम से वो देश विदेश तक साईं पीकरी की चर्चा प्रसारित किया इसी क्रम में साईं भक्ति प्रवाह में सारी दुनिया में अग्रणी चन्द्र भानु सतपथी को साईं पीकरी की कहानी विस्तार से बतलाया गया तब डाक्टर सी बी सतपथी द्वारा साईं पीकरी के लिए एक बड़ी सी साईं बाबा की मुर्ति भिजवाई गई जिसे मोहन ठाकुर द्वारा श्री साईं बाबा का आशीर्वाद समझकर स्वीकार कर बड़ा सा मन्दिर बनाकर इनकी पुजा अर्चना और सेवा करने लगे बाद में भक्तों के सहयोग से मन्दिर का और भी विकास किया गया यहां यह बात ध्यान देने योग्य है यहां पहले भी साईं बाबा अपने आप आये और अभी भी श्री साईं बाबा की मुर्ति अपने आप बिना किसी मांग के यहां आयी है अब  यह स्थान साई पीकरी धाम कहलाने लगा।

अमेरिका के शिकागो सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद के बाद {122 वर्ष बाद} पहले भारतीय हैं जिन्हें भारतीय धर्म गुरु के रूप में सम्मानित चन्द्र भानु सतपथी के सम्बंध में बताते हुए मोहन ठाकुर ने कहा कि गुरुदेव सतपथी के बारे में कुछ कहना मतलब सुर्य को दीपक दिखाने जैसा है श्री सतपथी एक महान समाजसेवी, समाज सुधारक साहित्यकार संगीतकार और गायक हैं श्री साईं बाबा के संबंध में उन्होंने अनेक ग्रन्थों की रचना की जिसमें श्री गुरु भागवत, शिरडी साईं बाबा और अन्य सदगुरु, साईं का आध्यात्मिक विचार ,श्री साईं शरण में आदि प्रमुख हैं डाक्टर सी बी सतपथी द्वारा रचित साईं भजन माला जिसे सुनने या पढ़ने के पश्चात निश्चित तौर पर साईं बाबा के प्रति आपकी श्रद्धा भक्ति और प्रेम में उत्तरोत्तर वृद्धि होगी।

श्री साईं बाबा और पूज्य गुरुदेव के बताए मार्ग पर अनुसरण करते हुए श्री शिरडी साईं ग्लोबल फाउंडेशन के सभी सदस्य आज भी देश धर्म और समाज कल्याण और जन कल्याण की दिशा में काम कर रहे हैं श्री साईं पीकरी धाम टेका और श्री साईं सेवा संस्थान राजिम भी इसी दिशा में कार्यरत हैं।तैसे परम साईं भक्त और समाज सुधारक श्री सतपथी ने स्वयं जल्द ही साईं पीकरी पधारने की इच्छा जताई है उनके साथ पुरी दुनिया के साईं भक्त साईं पीकरी टेका आयेंगे।

उड़ीसा के बारीपदा गांव में जन्मे श्री चन्द्र भानु सतपथी ने पुरी दुनिया में लगभग 250 साईं मन्दिरो का निर्माण करवाया गया है। भारतीय पुलिस सेवा में महानिदेशक पद कार्य कर चुके डाक्टर सी बी सतपथी को सेवा निवृत्ती के पश्चात कई राज्यों से शासकीय और राजकीय सेवाओ का प्रस्ताव आया मगर उन्होंने सारे प्रस्ताव ठुकरा कर स्वयमेव श्री साईं सेवा स्वीकार कर लिये , इनके आगमन से छत्तीसगढ़ का गौरव और बढ़ जायेगा।

साईं पीकरी धाम टेका में पूज्य गुरुदेव चन्द्र भानु सतपथी का भव्य स्वागत वन्दन अभिनन्दन किया जायेगा ।


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