रायपुर(गंगा प्रकाश )। छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव के ऐन पहले राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भू-पे बघेल पर EOW और ED का शिकंजा कसते जा रहा है। बघेल के खिलाफ भारी भरकम भ्रष्टाचार की कई शिकायतें एजेंसियों के पास है। इस पर कार्यवाही शुरू होने से भू-पे और कांग्रेस दोनों पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनके खिलाफ F.I.R. दर्ज होने के बाद भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर कांग्रेस नेताओ को जवाब देना मुश्किल हो गया है। उधर भू-पे सरकार के घोटालों को लेकर जनता मे अभी भी आक्रोश बना हुआ है। पार्टी आलाकमान मुश्किल में हैं। अंदेशा जाहिर किया जा रहा है कि बघेल का टिकट कटने के आसार लगातार बढ़ते जा रहे हैं। भू-पे के भ्रष्टाचारों से पार्टी ने खुद को अलग कर लिया है, दिल्ली और रायपुर के कई नेता इस मामले में टिप्पणी करने से इंकार कर रहे हैं।पुरानी कहावत है कि “नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली” ये कहावत नए अंदाज में छत्तीसगढ़ में नजर आ रही है। यहां लोकतंत्र के हिमायती होने का दावा कर एक बिल्ले ने सरकारी तिजोरी पर ही अपना मुंह साफ़ कर लिया है, पकड़े जाने पर यह बिल्ला राज्य सरकार पर ही गरिया रहा है। बताते हैं कि इस भ्रष्टाचारी बिल्ले ने सरकारी तिजोरी से हजारों करोड़ हजम कर लिए हैं।पोल खुली तो बिल्ला बिलबिला रहा है, पार्टी के कई निष्ठावान कार्यकर्त्ता उसके साथ खड़े होकर कभी घोटालों की फेहरिस्त देख रहे हैं तो कभी लुटी सरकारी तिजोरी देख कर अपना माथा पीट रहे हैं। दरअसल भ्रष्टाचार की भूख मिटाने के लिए, इस बिल्ले ने गरीबों के कल्याण की रकम तक भी हजम कर डाली, लेकिन डकार तक नही लिया। अब जांच एजेंसियों का शिकंजा कसते ही बिल्ले ने चीख-पुकार मचाना शुरू कर दिया है।अब वो जनता के साथ धोखाधड़ी करने के बाद खुद के लिए न्याय की गुहार लगा रहा है।छत्तीसगढ़ में सरकारी तिजोरी में हजारों करोड़ों का चूना लगाकर एक नेताजी सुर्खियों मे है। इन दिनों वे जनता का हिमायती होने का दंभ भर रहे है।बताते हैं कि नेताजी अपने गुनाहों के हिसाब किताब की जिम्मेदारी उन अधिकारियों के सिर मढ रहे है, जो कभी उनके रणनीतिकार हुआ करते थे। मामला EOW में दर्ज उस F.I.R. से जुड़ा है, जिसके तहत महादेव ऐप बैटिंग घोटाले की जांच की जा रही है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भू-पे बघेल के खिलाफ EOW में दूसरी बार 420सी और जालसाजी समेत अन्य धाराओं में अपराध दर्ज किया गया है। इसके पूर्व भू-पे के खिलाफ भिलाई में जमीन आबंटन मामले में 420सी समेत अन्य धाराओं में अपराध पंजीबद्ध किया गया था। यह मामला भिलाई बीडीए के प्लॉटों की खरीदी बिक्री से जुड़ा था। बताते हैं कि नियमों को धत्ता बताकर बघेल ने हाऊसिंग बोर्ड के एक साथ कई प्लॉट अपने परिजनों के नाम आबंटित करा लिए थे।


इस मामले में भी तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह के कार्यकाल में EOW ने एक F.I.R.दर्ज की थी। इसमें भू-पे बघेल और उसके परिजनों के खिलाफ विवेचना भी की गई थी। लेकिन वर्ष 2018 में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठते ही भू-पे ने अपने पद और प्रभाव का दुरूपयोग करते हुए सबसे पहले उस प्रकरण का खात्मा करवा दिया था। अबकी बार बीजेपी सरकार के आने के बाद भू-पे के धोखाधड़ी मामलों में F.I.R. दर्ज करने का सिलसिला शुरू हो गया है। ताजा मामला महादेव ऐप घोटाले का है। इसमें भू-पे बघेल के खिलाफ नामजद F.I.R.दर्ज होने से राजनीति गरमा गई है। बताते हैं कि छत्तीसगढ़ महतारी को दोनों हाथ और दोनों पैर से लूटने वाले पूर्व मुख्यमंत्री भू-पे बघेल इन दिनों कांग्रेस दफ्तर से बिलबिला रहे है।उन्हें उम्मीद थी कि महादेव ऐप बैटिंग घोटाले में वो बच निकलेंगे, उनके विश्वास पात्र संगी साथी नौकरशाह उन पर आंच तक नही आने देंगे,लेकिन ऐसा हो ना सका है। बताया जाता है कि महादेव ऐप संचालन के कारोबार में जुटे IPS अधिकारियों ने खुद को बचाते हुए घोटाले का ठीकरा बघेल पर ही फोड़ दिया है। FIR में घोटाले की जिम्मेदारी पूर्व सीएम भू-पे पर मढ दी गई है। यह भी बताया जाता है कि आखरी वक्त जूनियर IPS अधिकारियों की लॉबी भारी पड़ी, और दांव उल्टा बघेल पर ही पड़ गया।EOW में अज्ञात पुलिस कर्मियों के साथ साथ बघेल के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कर दी गई है। इसके चलते भू-पे बघेल को राजनांदगांव संसदीय सीट से उम्मीदवारी से ही बाहर होने का डर सताने लगा है। सूत्र बताते हैं कि कई नेताओं ने ताजा घटनाक्रम के बाद उन्हें उम्मीदवारी से हटने की भी सलाह दी है।सूत्रों के मुताबिक EOW में मामला दर्ज होने के बाद सियासी गलियारों में भू-पे की गिरफ्तारी की चर्चा जोरों पर है। कई राजनेताओं की निगाहें EOW के रुख पर टिकीं हुई है। राजनीति के जानकार बताते हैं कि भू-पे की गिरफ्तारी कांग्रेस के लिए तगड़ा झटका साबित हो सकती है। लिहाजा पार्टी को सोच समझ के फैसला लेने की जरूरत है। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के तहत चुनाव के दौरान प्रत्याशी को उनके खिलाफ दर्ज प्रकरणों का हवाला भी नामांकन पत्र के साथ आयोग को सौंपना होता है। बताते हैं कि भू-पे के खिलाफ अभी तक भिलाई जमीन घोटाला,अश्लील सेक्स सीडी कांड और उससे जुड़ा रिंकू खनूजा हत्याकांड के मामले का हवाला आयोग को दिया जाता था।लेकिन अब 420सी का एक नया मामला और दर्ज हो गया है। इससे भू-पे के पीछे 420सी का डबल इंजन लगने से कांग्रेस भी हैरत में है।भू-पे कार्यकाल में अंजाम दिए गए भ्रष्टाचार के कई सबूत रोजाना जनता की आंखो के सामने आ रहे हैं। पार्टी के कई राजनेता बताते हैं कि दागदार छवि होने के बावजूद राजनांदगांव लोकसभा सीट से बघेल को उतारे जाने के कारणों पर अब कांग्रेस आलाकमान को भी जवाब देना होगा? इसी के साथ ही पार्टी को बताना होगा कि आपराधिक रिकॉर्ड और घोटालों में नामजद होने के बावजूद बघेल को आखिर क्यों टिकट दी गईं हैं?महादेव ऐप बैटिंग घोटाले में भू-पे बघेल और उसके गिरोह के खिलाफ IPC की धारा 120B,34, 406,420,467,468,471, और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7/11 के तहत EOW में F.I.R.दर्ज की गई है।


दर्ज F.I.R.के मुताबिक बघेल पर आरोप है कि ऐप प्रमोटर रवि उप्पल और सौरभ चंद्राकर के जरिए वे महादेव बैटिंग ऐप को प्रोटेक्शन देने के एवज में हर माह करोड़ो रूपए वसूला करते थे। इसी कड़ी में हाल ही के विधान सभा चुनाव के दौरान 508 करोड़ उन्हें प्राप्त हुए थे।F.I.R.में बताया गया है कि ED ने बघेल के करीबी असीम दास उर्फ बप्पा के पास से 8 करोड़ रूपए नगद जब्त किए थे। जबकि 500 करोड़ की अफरा तफरी के कई सबूत एजेंसियों के पास है।कांग्रेस पार्टी के कई नेताओं को अंदेशा है कि भू-पे बघेल की दागदार कार्यप्रणाली का खामियाजा लोकसभा चुनाव में पार्टी को उठाना पड़ेगा। फिलहाल EOW में दर्ज F.I.R.से पूर्व मुख्यमंत्री भू-पे के सामने नया राजनैतिक संकट खड़ा हो गया है। राज्य की जनता उनकी गिरफ्तारी की मांग कर रही है। उधर भू-पे ने आरोप लगाया है कि राज्य में बीजेपी के सामने पराजय का संकट है, हार के डर से बीजेपी सरकार ने उनके खिलाफ EOW में F.I.R.दर्ज कराई है।(साभार न्यूज़ टुडे छत्तीसगढ़)

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