शिकायत पर कार्यवाही करने में नाकाम नजर आ रहे कलेक्टर व अन्य अधिकारी

कोण्डागांव (गंगा प्रकाश)। मिल बंद रखने के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कोण्डागांव न्यायालय से 26 मई 2022 को जारी अंतरिम आदेष व उसी दिनांक को सील किए गए राईस मिल का अगले ही कुछ दिनों बाद से मिल संचालक के द्वारा दबंगई से राईस मिल का संचालन किए जा रहे होने तथा उक्त मामले में बस्तीवासियों के द्वारा किए जा रहे निरंतर शिकायत पर कार्यवाही करने में कलेक्टर व अन्य अधिकारियों के नाकाम रहने का मामला सामने आया है।

प्रकाष में आया उक्त मामला कहीं दूर-दराज का नहीं बल्कि जिला मुख्यालय कोण्डागांव नगर का, बल्कि कलेक्टर कार्यालय से महज एक किलो मीटर के भीतर का है।

ज्ञात हो कि जिला मुख्यालय कोण्डागांव नगर के वार्ड क्रमांक 01 महात्मा गांधी वार्ड की बस्ती से लगी और इंडस्ट्रियल एरीया घोशित जमीन में मंजिसा राईस मिल का संचालन, नियमों को ताक में रखकर किए जाने से बस्तीवासियों को स्वास्थ्यगत परेषानियां होने पर बस्तीवासियों के द्वारा वर्श 2014 से ही कलेक्टर कोण्डागांव के समक्ष लिखित में षिकायत करने के साथ ही सक्षम न्यायालयों में विधिसम्मत कार्यवाही करने हेतु निवेदन किया जा रहा है। जिसपर सक्षम न्यायालयों के द्वारा जांच पड़ताल करके पहले तो मंजिसा राईस मिल को बंद करने का आदेष पारित कर दिया जाता है, लेकिन राईस मिल निरंतर संचालित होता नजर आता है।

ऐसे ही अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कोण्डागांव न्यायालय से 26 मई 2022 को मिल बंद रखने हेतु जारी अंतरिम आदेष व उसी दिनांक को सील किए गए मंजिसा राईस मिल को निरंतर संचालित किया जाता देखकर स्वास्थ्यगत समस्याओं से परेषान बस्तीवासियों के द्वारा पुनः 23 मई 2023 को कलेक्टर जन चैपाल में लिखित में शिकायत करते हुए तत्काल कार्यवाही करने की मांग की गई। सप्ताह भर बित जाने के बाद भी मिल बंद नहीं होने पर बस्तीवासियों ने पुनः 30 मई 2023 को कलेक्टर जन चैपाल में षिकायत पत्र देते हुए साफ चेतावनी दी कि प्रषासन द्वारा न्यायोचित कार्यवाही नहीं किए जाने पर पीड़ित बस्तीवासी स्वतः ही मिल में जाकर तालाबंदी करने को बाध्य होंगे और बस्तीवासियों को विद्रोह के लिए उकसाने के लिए स्वयं कलेक्टर सहित षासन-प्रषासन जिम्मेदार होंगे। 30 मई को जन चैपाल में पुनः किए गए षिकायत का परिणाम यह देखने को मिला कि अधिकारियों की संयुक्त जांच टीम 1 जून को मंजिसा राईस मिल में जांच के लिए पहुंची और जांच टीम ने अपनी जांच में पाया कि न्यायालय से 26 मई 2022 को मिल बंद रखने हेतु जारी अंतरिम आदेष एवं उसी दिनांक को सील किए गए मंजिसा राईस मिल को निरंतर संचालित किया जा रहा है, जो कि अवैधानिक है। इसके साथ ही मिल संचालक के द्वारा अन्य कई नियमों की अनदेखी भी की जा रही है। जांच टीम के द्वारा पंचनामा एवं जांच प्रतिवेदन तैयार कर उच्चाधिकारियों को सौंपा जाएगा। कब तक ? और वहीं उच्चाधिकारियों को उक्त जांच रिपोर्ट को पढ़ने और उस पर कार्यवाही कराने की फुर्सत कब मिलेगी ? यह देखने वाली बात होगी।

लेकिन वहीं कन्हैयादास मानिकपुरी, नफीसा बेगम, शिव देवांगन, मुकेश मारकंडेय, गजेंद्र कुर्रे व अन्य पीड़ित बस्तीवासियों ने कहा है कि वे 2 जून को कलेक्टर/अनुविभागीय अधिकारी राजस्व से मुलाकात करके 2 जून को ही मिल में तालाबंदी करने की मांग करेंगे, उनकी मांग पर घ्यान नहीं दिए जाने पर बस्तीवासी स्वतः ही मिल में तालाबंदी करने को स्वतंत्र होंगे। क्योंकि उन्होंने उक्ताषय का लेख अपने द्वारा 30 मई को जन चैपाल में दिए गए लिखित षिकायत पत्र में कर दिया है।


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