शराबी मिनी बस ड्राइवर ने दुर्गा पंडाल पर चढ़ाई मिनी बस बाल बाल बचे ग्रामीण दुर्गा पंडाल हुआ ध्वस्त,ग्रामीणों ने किया चक्का जाम

गरियाबंद(गंगा प्रकाश):-गरियाबंद जिले में दिन प्रतिदिन वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है। इन वाहनों में बड़ी संख्या में पुराने वाहन भी शामिल हैं, जो कंडम हो चुके हैं। ऐसे वाहनों की फिटनेस की पड़ताल के लिए ना तो ट्रैफिक पुलिस गंभीर है और ना ही परिवहन विभाग की ओर से कोई कार्रवाई की जा रही है। ट्रैफिक पुलिस का ध्यान सिर्फ कामर्शियल वाहनों पर होता है जबकि शहर की सड़कों पर चलने वाले सैकड़ों आटो, कार, बस, बाइक, स्कूटर कंडम हो चुकें है। ऐसे वाहनों के कारण लोगों का जीवन हमेशा जोखिम में रहता है। जिले में वाहनों की फिटनेस जांचने के लिए कोई इंतजाम ही नहीं है। मशीनों का काम अफसरों की आंखें कर रही हैं। एक सरसरी निगाह दौड़ाने में भी अफसरों को संकोच है तभी तो बिना बैक लाइट और इंडीकेटर के वाहन सड़क पर फर्राटा भरते नजर आते फाग लाइट और रिफलेक्टर तो अभी काफी दूर की कड़ी हैं। कंडम वाहन जब सड़क पर दौड़ते हैं, तो यह यमराज से कम साबित नहीं होते।जिले भर में अनेक यात्री बसें बिना फिटनेस के बेखौफ दौड़ रही हैं लेकिन जिम्मेदार इन बसों पर कार्रवाई करने की बजाए अपनी कभी कभार की जांच को अब तक सिर्फ हेलमेट और तीन सवारी और ड्राइवरिंग लाइसेंस चेकिंग तक ही सीमित रखे हैं। वहीं आरटीओ की सक्रियता भी किसी हादसे के बाद ही होती है। बाकी दिनों में गतिविधियां शून्य ही दिखाई देती है। सामान्यतः आरटीओ नेशनल हाईवे130 पर चल रही बसों की जांच कर कर्तव्यों की इतिश्री कर लेते हैं। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही बसों की हालत सबसे ज्यादा खराब रहती है। कंडम बसें, फिटनेस, बीमा वगैरह का तो पता ही नहीं रहता। बताना लाजमी होगा कि शुक्रवार दिनांक 23-09-2022 को रात्रि 08 बजे (लगभग)विकास छुरा के ग्राम सोरिद खुर्द से फिंगेश्वरी मार्ग पर मनोकामना दुर्गा समिति सोरिद द्वारा दुर्गा स्थापना की तैयारी करते हुए रंग मच पर पंडाल लगाया औऱ अन्य तैयारी में जुटे हुए थे उसी बीच कंडम मिनी बस क्रमांक सी.जी.07 ई.8912 जिसका मालिक सरद कुमार सोनी हैं मिनी बस का रजिस्टेशन 5 दिसंबर 2009 हैं जो कि पूरी तरह से कंडम हो चुकी जो कि चलता फिरता कबाड़ हैं जो धक्का छाप होने के साथ ही जिसका बीमा व फिटनेस फरवरी माह में ही समाप्त हो चुका हैं।जिसका शराबी ड्राइवर देवकुमार ध्रुव निवासी नागझर द्वारा सोरिद खुर्द के बस स्टैंड चौक पर ढलान देख फिंगेश्वरी मार्ग पर खड़ा कर शराब पीने चला गया बापस आने पर मिनी बस को चालू करने ढलान की जैसे ही वाहन को आगे बढ़ाया उसका ब्रेक फेल हो गया और दुर्गा पंडाल उखाड़कर अपने साँथ 20 से 30 फिट दूर ले गया।इस घटना में पंडाल बना रहे ग्रामीण बाल बाल बचे। लेकिन पंडाल पूरी तरह तहस नहस हो गया। घटना से आक्रोशित गामीणो का गुस्सा बस ड्राइवर पर फुट पड़ा। ग्रामीणों ने बस मालिक से पुरे नुकसान की भरपाई करने को कहा तो उल्टा बस मालिक उनसे बहस करने लगा।बस मालिक के रवैये के चलते सभी ग्रामीण आकर्षित हो उठे और उन्होंने चक्काजाम कर विरोध करने शुरू कर दिया। घटना की सुचना मिलने पर स्थनीय पुलिस मौके पर पहुंच कर अब मामला शांत करवाने में लगी रही।बता दें कि बस बिना परमिट, बिना फिटनेस और बिना बीमे के चल रही थी। छुरा से राजिम व छुरा से गरियाबंद, रसेला से गरियाबंद और ग्रामीण अंचल में चलने वाली कई बसें खस्ताहाल हो चुकी है। इन बसों में क्षमता से अधिक सवारियों को बैठाया जा रहा है। जिसके कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। बिना फिटनेस के सड़कों पर दौड़ लगा रही बसों पर गरियाबंद का यातायात विभाग के अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने से इनके हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। कई बसों के अंदर फर्स्ट-एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र और इमरजेंसी विंडो नहीं है।यातायात विभाग के अधिकारी किसी भी बस को परमिट तभी देते हैं जब उसके अंदर परिवहन विभाग से संबंधित जारी निर्देशों को बस संचालक पूरा करें लेकिन यातायात विभाग के सौजन्य के चलते सड़कों पर सरपट दौड़ लगा रहे वाहन कब और किस समय लोगों की जिंदगी के लिए काल बनकर सामने आए जाए यह कहना बहुत मुश्किल है। क्योंकि दुर्घटना के बाद ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिससे यह साबित हो रहा है कि जिले की सड़कों पर कुछ गाड़ियां बगैर फिटनेस प्रमाण पत्र के दौड़ लगा रही है तो कुछ गाड़ी को पुरानी और जर्जर हालत में भी विभाग की ओर से प्रमाण पत्र दे दिया जाता है। दरअसल, सड़क पर चल रहे वाहनों को फिटनेस देने का काम परिवहन विभाग है। विभाग के अफसर न तो सड़क पर दौड़ लगा रही गाड़ियों की जांच करते हैं और न ही जर्जर पुराने वाहनों को फिटनेस का सर्टिफिकेट देने में सख्ती बरतता है। दरअसल, यह सब पैसों का कमाल है। इसलिए विभाग आंख मूंदकर तमाशबीन बना रहता है।

क्षमता से अधिक बैठाते हैं सवारियां

यात्री बसों के कंडक्टर और क्लीनर यातायात विभाग के आदेशों पर भारी दिखाई देते हैं। परिवहन विभाग सीटों के अनुसार बस मालिक को सड़क पर बस चलाने के लिए परमिट देता है लेकिन बस चालक कर्मचारी 40 से 50 की क्षमता से अधिक सवारियां बिठाकर ले जाते हैं। इससे हादसे आशंका बनी रहती है।

बिना फिटनेस जांच के जारी किए जाते हैं प्रमाणपत्र

नियम तो यह है कि नए व्यावसायिक वाहन की फिटनेस दो साल पर और इसके बाद हर साल फिटनेस की जांच कर प्रमाण पत्र जारी होना चाहिए। प्रमाण पत्र जारी तो होता है, लेकिन बिना हकीकत देखे। बिना हेडलाइट, बैक लाइट, इंडीकेटर के वाहन सड़क पर फर्राटा भरते हैं। ट्रैक्टर ट्राली तो कृषि कार्य के लिए है। लेकिन इससे गांव की सवारियां को भी लेकर जाया जाता है। सड़क पर इस वाहन को नियंत्रित करना आसान नहीं। यही कारण है कि कई बार ट्रैक्टर ट्राली के नियंत्रण खो देने से बड़े हादसे हो जाते हैं। प्रशासन के पास ऐसे वाहनों को सड़क पर उतरने से रोकने के लिए कोई ठोस प्रबंध नहीं है और न ही किसी को इनकी परवाह है। ऐसे ही वाहनों के कारण शहर की आबोहवा खराब हो रही है।बिना फिटनेस के दर्जनों मिनी बस जिले की सड़कों पर दौड़ रहे हैं। जिले में कई वाहन 10 से 15 साल से भी अधिक पुराने हैं। इस प्रकार के वाहन किसी भी समय दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। दर्जनों  ऐसे वाहनों को देखा जा सकता है जो जिनमें फाग लाइट, हेड लाइट, बैक लाइट, पार्किग लाइट, कलर रिफ्लेक्टर जैसी सुविधाएं काफी औसत दर्जे की होती हैं, जिससे यह दुर्घटनाओं के वाहन बनते रहते हैं। इन्हें चलाने वाले अधिकतर लोगों के पास ड्राइविग लाइसेंस और कागजात तक नहीं होते। बड़े व्यावसायिक वाहनों के अलावा कार, साइकिल, स्कूटर, मोटर साइकिल, आदि छोटे वाहनों की फिटनेस भी राम भरोसे ही रहती है।


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