भरने लगे हैं राखड़ बांध , महज 20 फीसदी ही राख का हो रहा उपयोग

भागवत दीवान 

कोरबा(गंगा प्रकाश) राज्य उत्पादन कंपनी के संयंत्र राखड़ निष्पादन में पीछे हैं। महज 20 फीसदी राखड़ निष्पादन के कारण कंपनी के ऐश डैम फुल है। जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम उठाते हुए राखड़ का निष्पादन नहीं किया गया तो राखड़ बांध में जगह कम पड़ जाएगी। जिसका दुष्परिणाम जिले वासियों को भुगतना पड़ेगा ।वैसे भी जिले में प्रदूषण की समस्या कम नहीं है।

राज्य उत्पादन कंपनी के चारों ऐश डेम में अभी 11 करोड़ 54 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा राखड़ अब भी भरा हुआ है। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और एनजीटी ने राखड़ का सौ फीसदी उपयोग करने के निर्देश दिए हैं। जितना राखड़ डेम से निकल रहा है उससे कहीं अधिक राखड़ जमा भी हो रहा है।बंद हो चुकी कोरबा पूर्व और वर्तमान में संचालित डीएसपीएम संयंत्र से पाइपलाइन के माध्यम से राखड़ गोढ़ी स्थित ऐश डेम में जमा होता है। जबकि एचटीपीपी और पश्चिम विस्तार का राखड़ लोतलोता, डिंडोलभाठा स्थित राखड़ डेम मेें जमा हो रहा है। कंपनी के इन ऐश डेम से लगातार राखड़ के उठाव पर प्रबंधन द्वारा कोशिश की जा रही है, लेकिन जिस गति से राखड़ का उठाव या फिर निष्पादन होना चाहिए। वह नहीं हो पा रहा है। हर साल कई लाख मीट्रिक टन राखड़ डेम मेें जमा हो रहा है, जबकि निष्पादन 20 फीसदी भी नहीं हो रहा है। मौजूदा स्थिति में जिले के पूर्व संयंत्र, डीएसपीएम, एचटीपीपी प्लांट का ही करीब 9 करोड़ मीट्रिक टन राखड़ डेम में भरा हुआ है। वहीं मड़वा संयंत्र के राखड़ डेम में करीब 46 लाख मीट्रिक टन राखड़ है। इस तरह उत्पादन कंपनी के इन राखड़ डेम में कुल 11 करोड़ 54 लाख मीट्रिक टन से अधिक राखड़ है।एक तरफ डेम में राखड़ का भराव और उपयोगिता में कमी की वजह से संयंत्र प्रबंधकों के पास अब राखड़ के भराव के लिए जगह की कमी की समस्या आ रही है। इसे देखते हुए अब राखड़ डेम की ऊंचाई बढ़ाने की तैयारी कर ली गई है। कोरबा वेस्ट ताप विद्युत गृह के राखड़ डेम के पांड की ऊंचाई बढ़ाई जाएगी। इसी तरह अन्य राखड़ डेम की भी ऊंचाई बढ़ाने की तैयारी है।

राखड़ पाटने के लिए अब जगह ही नहीं

डेम में भरे राखड़ को अब पाटने के लिए जगह ही नहीं मिल रही है। लो लाइन एरिया नहीं मिल रहा है। कंपनी के अधिकारी इसलिए परेशान हैं इतनी मात्रा में राखड़ पाटने के लिए अब जगह कहां से लाएं। जहां भी जगह मिल रही है वहां 50 हजार से लेकर दो लाख मीट्रिक टन से अधिक मात्रा में राखड़ भरा नहीं जा सकता। यही वजह है कि जिले में खुले में राखड़ पाटने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। जब केंद्रीय राज्य मंत्री कोरबा पहुंचे थे तब भी उन्होंने इस स्थिति पर चिंता जाहिर की थी।

सीमेंट फैक्ट्री की दूरी ज्यादा

सीमेंट फैक्ट्रियां भी जिले से करीब सौ किमी की दूरी पर संचालित है। इस वजह से सीमेंट कंपनियां कोरबा जिले से राखड़ लेने को लेकर रूचि नहीं लेते हैं। हालांकि इसे लेकर शासन स्तर पर भी पहल नहीं हो रही है, अगर बाध्य कर दिया जाए तो कंपनियां राखड़ लेना शुरु करेंगी। इस दिशा में कंपनी प्रबंधन को सुदृढ़ कार्ययोजना तैयार करनी होगी।


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