“रायगढ़ में जंगलों का कत्ल : पर्यावरण मंत्री के गृह जिले में ही आदिवासियों की आस्था, अधिकार और संविधान का सामूहिक बलात्कार!”…

 

रायगढ़ (गंगा प्रकाश)। यह लेख केवल जिले के आदिवासियों और पर्यावरण प्रेमियों के लिए नहीं, बल्कि समूचे देश के लिए एक आपातकालीन चेतावनी है। यहां हजारों-लाखों पेड़ों की निर्मम कटाई हो रही है, और यह किसी एक कंपनी या प्रशासन की करतूत नहीं, बल्कि एक व्यापक कॉरपोरेट-प्रशासन गठजोड़ का हिस्सा है, जो आदिवासी संस्कृति, संविधान, और कानून को एक ही झटके में चूर-चूर कर रहा है।

और यह सब हो रहा है – पर्यावरण मंत्री के गृह जिले रायगढ़ में, उनके सीधे हस्तक्षेप के बिना, और उनकी सभी नीतियों के खिलाफ। क्या यह चुप्पी संलिप्तता की निशानी है? क्या यह “विकास” के नाम पर देश के संविधान और आदिवासी अधिकारों का उल्लंघन नहीं है?

क्या हो रहा है रायगढ़ में :

रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र में स्थित ग्राम ढोलनारा और सराईटोला-मुड़ागांव में महाजैको कंपनी ने ग्रामसभा की अनुमति के बिना जंगलों की निर्मम कटाई शुरू कर दी है। यह इलाका पांचवीं अनुसूची और पेसा कानून के तहत आता है, और यहाँ ग्रामसभा की मंजूरी के बिना कोई भी संसाधन दोहन अवैध है। बावजूद इसके, पेसा कानून, वन अधिकार अधिनियम, और NGT के आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए, यह कंपनी जंगलों को साफ़ करने का कार्य कर रही है।

ये पेड़ सिर्फ पेड़ नहीं हैं, ये सदियों से सांस ले रही सभ्यता, आस्था, और परंपरा के प्रतीक हैं। ग्राम सराईटोला और मुड़ागांव के आदिवासी समुदायों के लिए, ये जंगल उनकी आत्मा, उनके देवता और उनकी जीवनरेखा हैं। अब इन पेड़ों की कटाई से सिर्फ पेड़ नहीं मर रहे, बल्कि आदिवासी समाज की जड़ें उखड़ी जा रही हैं, और उनका अस्तित्व खतरे में है।

कहाँ जा रहे हैं सरकारी अधिकारी :

क्या वन विभाग, राजस्व अधिकारी, और अनुविभागीय अधिकारी (घरघोड़ा) यह स्वीकार करेंगे कि कॉरपोरेट माफिया के साथ मिलकर उन्होंने ग्रामसभा से कोई प्रस्ताव लिए बिना ही कटाई का आदेश दिया? क्या यह समझ में आता है कि वन अधिकार अधिनियम और पेसा कानून की जो संरक्षण की शक्ति है, उसे सरकार ने जानबूझ कर ताक पर क्यों रखा? यह केवल अवैध कटाई नहीं है, यह संविधान, आस्था, और आदिवासी आत्मा की हत्या है!

पर्यावरण मंत्री, जवाब दें :

* क्या आप इस क़ानूनी उल्लंघन को देख कर भी मौन हैं? जब आपके ही जिले में आदिवासी संस्कृति और संविधान पर यह हमला हो रहा है, तो क्या यह आपकी नीतियों की विफलता नहीं है?

* क्या आपके “हरियाली” और “विकास” के भाषणों की सच्चाई सिर्फ कैमरे तक सीमित है, जबकि जमीन पर विनाश हो रहा है?

* क्या यह सच है कि संविधान और आदिवासी अधिकारों की कोई अहमियत नहीं रह गई जब कॉरपोरेट्स के फायदे सामने हों?

आदिवासी जन की मांग :

* महाजैको कंपनी पर आपराधिक प्रकरण दर्ज हो — कानूनी उल्लंघन के लिए।

* SC/ST एक्ट, वन कानून, पेसा एक्ट व NGT अवमानना के तहत संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो।

* तत्काल वन कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगे, और संविधान और पेसा कानून का उल्लंघन करने वाले हर व्यक्ति को सजा दी जाए।

* ग्रामसभा की सर्वोच्चता को संविधान के अनुरूप बहाल किया जाए, और ग्रामवासियों की सहमति के बिना कोई भी कार्यवाही न हो। अगर आप इस गंभीर संकट पर चुप रहे, तो आने वाली पीढ़ियों को पत्थर और राख ही विरासत में मिलेगी।

यह सिर्फ रायगढ़ की लड़ाई नहीं है – यह देश के हर आदिवासी, हर पेड़, हर नदी, और हर सभ्यता की पुकार है। अगर आप इस गंभीर संकट पर चुप रहे, तो आने वाली पीढ़ियों को पत्थर और राख ही विरासत में मिलेगी।


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