बीते दो साल में 1072 मुखिया की मृत्यु

भागवत दीवान 

कोरबा (गंगा प्रकाश)। राशन कार्ड धारियों में आधार के सत्यापन के बाद से हडक़ंप मचा हुआ है। जिले में करीब आठ हजार राशनकार्ड धारी सत्यापन में अपात्र मिले। अपात्र होने के बाद विभाग की ओर से एक मौका दिया जाता है, करीब पांच हजार अपात्र लोग बाहरी थे, इसलिए उन्होनें विभाग को आवेदन ही नहीं दिया। लिहाजा सभी का राशन कार्ड निरस्त करने की कार्रवाई की जा रही है। जिले में बीते दो साल के भीतर 1072 राशन कार्डधारी के मुखिया की मौत हो चुकी है। मौत के बाद ऐसे कार्ड को अपात्र करने के बाद विभाग द्वारा परिवार के सदस्य को मुखिया का नाम बदलने के लिए समय दिया गया था। नाम बदलने के बाद नया कार्ड जारी कर दिया गया है।

जिले में शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के राशनकार्ड हितग्राहियों की कुल संख्या करीब ढाई लाख से अधिक है। खाद्य विभाग द्वारा लगातार राशन कार्डधारियों के आधार कार्ड का सत्यापन किया जा रहा है। सत्यापन में उनके आधार कार्ड में नाम, पते के आधार पर क्रास चेक किया जा रहा है। दरअसल बहुत सारे ऐसे लोगों ने भी कार्ड बनवा लिया था जो कि अन्य प्रदेशों के हैं। तो वहीं कुछ ऐसे भी परिवार हैं जिनका मुखिया जिले में निवासरत है जबकि उसके परिवार के सदस्य अन्य प्रदेश या शहर के हैं। संख्या बढ़ाने के लिए नाम जोडक़र राशन का लाभ लिया जा रहा था। विभाग द्वारा जब सत्यापन कराया गया तो ऐसे कार्डधारियों को अपात्र सूची में डाल दिया गया। अपात्र होने के बाद ऐसे लोगों को एक मौका विभाग की ओर से दिया जाता है ताकि पात्र होने के बाद भी कुछ वजहों से अपात्र हो गए थे। एक मौका देने के बाद भी जब लोग आवेदन नहीं करते हैं तो फिर उनका कार्ड निरस्त कर दिया जाता है।

98 हजार आधार सत्यापन में अपात्र

वर्ष 2020 से आधार कार्डों का सत्यापन शुरु हुआ है तब से अब तक पूरे जिले भर में करीब 98 हजार आधार सत्यापन में अपात्र पाए गए हैं। शहरी क्षेत्र में साढ़े 27 हजार और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 76 हजार राशन कार्डधारियों के सत्यापन अपात्र मिले। इसमें कार्डधारी और परिवार के सदस्यों के भी आधार कार्ड शामिल हैं।

ढाई हजार कार्डधारियों का पता नहीं

कोरबा शहर में सबसे अधिक करीब ढाई हजार ऐसे कार्डधारी हैं जिन्होनें अपात्र होने के बाद मौका देने के बाद भी आवेदन देने नहीं आए। अब इनका कार्ड भी निरस्त कर दिया गया है। बहुत सारे परिवार ऐसेे भी हैं जो दीगर राज्यों से काम की तलाश में कोरबा आए थे। एक-दो साल काम करने के बाद अब वापस भी लौट चुके हैं। तो कुछ ऐसे भी हैं जिनके परिवार का मुखिया नहीं है लेकिन परिवार के सदस्य राशन ले रहे हैं।सत्यापन करने जब नगरीय निकाय और ग्राम पंचायत के सचिव कार्डधारियों के घर गए तो डेढ़ हजार लोग पते पर नहीं मिले। जबकि राशन समय पर लिया जा रहा था। जब उनका राशन रोका गया तो कुछ परिवारों ने पता आधार कार्ड में अपडेट करवा लिया, जिन लोगों ने अपडेट नहीं कराया उनके कार्ड निरस्त कर दिए गए।


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