विभिन्न आयामों को लेकर 54 एकड़ में बसी कुंभ कल्प मेला की दुनिया: व्यवस्थाओं की हो रही जमकर तारीफ

 

व्यवस्थित मेले की छबि देख दर्शनार्थी हो रहे गदगद

 

गरियाबंद/राजिम(गंगा प्रकाश)। तीर्थ नगरी राजिम के पावन तट पर नवीन मेला मैदान राजिम-चौबेबांधा में कुंभ कल्प की एक अलग ही दुनिया बसी हुई है। इस बार नए मेला मैदान में 54 एकड़ के विशाल भूखंड को बहुत ही सुव्यवस्थित ढंग से सजाया गया है। जिसकी रौनकता और भव्यता देखकर यहां आने वाले पर्यटक प्रशंसा करने के से खुद को रोक नहीं पा रहे हैं।

मेला आयोजन को सफल बनाने विभिन्न विभागों के अधिकारी – कर्मचारी पूरी लगन, निष्ठा और मेहनत के साथ काम कर रहे हैं, जिसके कारण मेले का स्परूप बहुत ही व्यवस्थित और बहुआयामी हो गया है। विशाल मुख्य मंच में कलाकारों सहित आए हुए अतिथियों के लिए पर्याप्त जगह बनाई गई है, ताकि कलाकारों को अपनी कला का प्रदर्शन करने में किसी प्रकार की तकलीफों का सामना न करना पड़े। इसी प्रकार दर्शकों के बैठने 5 हजार से अधिक कुर्सियां लगाई गई है।

ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध राजिम कुंभ कल्प मेला में प्रतिवर्ष लाखों लोग आकर पर्व स्नान का पुण्य लाभ उठाते हैं। इसी भीड़ को मद्देनजर रखते हुए इस बार नए मेले मैदान में कुंभ कल्प का आयोजन किया गया। ताकि भीड़ से स्थानीय जनता सहित आने वाले श्रद्धालुओं को जाम जैसी असुविधाओं का सामना न करना पड़े। मेला में पहुंचे महासमुंद के नागेश साहू, दुर्गेश, कोमल, पुरेन्द्र एवं उसके साथियों ने अपना अनुभव बांटते हुए बताया कि हम लोग प्रतिवर्ष राजिम कल्प मेला घूमने आते हैं, लेकिन इस बार मेले की सजावट और व्यवस्था देखकर हम लोग काफी खुश हैं।

नए मेला मैदान में व्यापारी भी हैं उत्साहित

 

54 एकड़ के विशाल मेला मैदान में अलग-अलग व्यवस्था की गई, ताकि किसी भी आयोजन में किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न न हो। जिसमें मुख्य मंच, सांस्कृतिक मंच, फूड जोन, मीना बाजार, दाल-भात सेंटर, पंचकोशी धाम की झांकी, विभिन्न प्रकार की व्यावसायिक दुकानें आदि की व्यवस्था की गई है। मेला में आए व्यापारियों ने बताया कि मेला के प्रारंभ से ही दुकान अच्छी चली। हालांकि अभी व्यापार मंदा है शनिवार को व्यापार अच्छा चला। उन्होंने उम्मीद जताते हुए बताया कि आने वाले दिनों में हमारा व्यापार जरूर बढ़ेगा। खासकर छोटे व्यवसायियों को इस मेले से काफी उम्मीदे हैं।

 

शिवरीनारायण से ओखरा बेचने आई महिला ने बताया कि पिछली बार हमने एक लाख रुपए का व्यवसाय किया था। उम्मीद है इस बार भी अच्छी आमदनी हो जाएगी। छुट्टी के दिनों और महाशिवरात्रि में व्यवसाय बढ़ने की पूरी उम्मीद है। वैसे इस बार मेले में आए छोटे व्यापारियों को बहुत ही न्यूनतम दर पर दुकानें आबंटित की गई है, जिससे व्यापारी काफी खुश है। उनका कहना है कि इस बार प्रशासन द्वारा पांच सौ रुपए निर्धारित दर में दुकानें दी गई है, जिसमें लाइट सहित अन्य व्यवस्था भी निःशुल्क हैं। शासन की इस व्यवस्था से हम छोटे व्यापारी बहुत खुश है।

 

जगह-जगह पेयजल की उत्तम व्यवस्था

मेला में पहुंचने वाले लोगों की सुविधा को देखते हुए पीएचई विभाग द्वारा पाईप लाईन बिछाकर पूरे मेले मैदान में नल लगाकर पेयजल की व्यवस्था की गई है, जिसके कारण आने वाले सभी श्रद्धालुओं को पीने के पानी के लिए भटकना नहीं पड़ रहा है। महानदी आरती स्थल से लेकर नवीन मेला मैदान तक लंबी पाइप लाईन बिछाकर थोड़ी-थोड़ी दूर पर टोटी लगाकर पेयजल की व्यवस्था की गई है।

 

इस चिलचिलाती धूप में घूमते हुए थके शरीर को गला तर करने के लिए पानी मिल रहा है, तो इससे बड़ी बात क्या हो सकती है। इसी प्रकार महानदी आरती स्थल से संत समागम क्षेत्र तथा वहां पर लगी दुकानों के आसपास भी पेयजल की इसी प्रकार से व्यवस्था की गई है, जिससे लोगों को पीने के पानी सहजता से उपलब्ध हो रहा है।

 

10 रुपए में मिल रहा भर पेट भोजन

मेलार्थियों को स्वादिष्ट और भरपेट भोजन उपलब्ध हो इस बात को ध्यान में रखते हुए शासन – प्रशासन द्वारा भरपूर व्यवस्था की गई है। पूरे मेला मैदान में 53 से ज्यादा दाल भात सेंटर खोले गए हैं। ये दाल भात सेंटर की जिम्मेदारी महिला स्व सहायता समूह को दी गई है। लोगों को मात्र 10 रुपए में स्वादिष्ट गर्म भोजन मिल रहा है। वहीं 20 रुपए में दाल भात के साथ सब्जी और अचार भी दिया जा रहा है।

 

शासन द्वारा इन दाल भात सेंटरों पर बराबर नजर रखी जा रही है, ताकि भोजन की गुणवत्ता और मात्रा पर ध्यान दिया जा सके। दाल भात सेंटर में भोजन करने वालों ने बताया कि उन्हें जिस आत्मीयता और सम्मान के साथ भोजन कराया गया, उससे उनके पेट ही नहीं बल्कि खुशी से आत्मा भी तृप्त हो गई। इस व्यवस्था के लिए आने वाले दर्शनार्थियों ने आयोजक टीम की भी काफी प्रशंसा की।


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